बार बार शिकायत के बावजूद एमपीसीबी की चुप्पी, ग्रामीण बोले पानी बना बीमारी की वजह
Junaid khan - शहडोल। सोन नदी के जल को लेकर एक बार फिर बड़ा पर्यावरणीय विवाद सामने आया है। नगर परिषद क्षेत्र व बकहो से आगे सोन नदी का उपयोग करने वाले ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि शहडोल स्थित ओरियंट पेपर मिल (ओपीएम) द्वारा आधी रात के समय नदी में केमिकल युक्त जहरीला पानी छोड़ा जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे सोन नदी का पानी लगातार प्रदूषित हो रहा है और इसका सीधा असर मानव स्वास्थ्य व पशुधन पर पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, सोन नदी का पानी दैनिक निस्तार के लिए उपयोग किया जाता है, लेकिन अब यही पानी बीमारी की वजह बनता जा रहा है। लोगों को त्वचा रोग, पेट संबंधी समस्याओं सहित अन्य बीमारियों की आशंका सता रही है। वहीं नदी का पानी पीने वाले मवेशी लगातार बीमार पड़ रहे हैं और कई मामलों में इलाज के अभाव में उनकी असमय मौत भी हो रही है।
शिकायतें हुईं, लेकिन कार्रवाई नहीं
ग्रामीणों ने बताया कि इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) के अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। न तो जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हुई और न ही प्रदूषण रोकने के प्रभावी कदम उठाए गए, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी सवाल
ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों का कहना है कि पहले इस मुद्दे पर नगर परिषद की अध्यक्ष सक्रिय थीं, लेकिन अब उनकी चुप्पी ने संदेह और बढ़ा दिया है। इसी कारण कभी उपाध्यक्ष तो कभी अन्य पार्षद इस मामले में विरोध दर्ज करा रहे हैं। लोगों का आरोप है कि जनप्रतिनिधियों द्वारा दबाव बनाए जाने के बावजूद प्रशासन और प्रबंधन गंभीरता नहीं दिखा रहा।
ओपीएम प्रबंधन ने आरोपों को किया खारिज
वहीं ओरियंट पेपर मिल प्रबंधन ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। ओपीएम के सीनियर मैनेजर रवि शर्मा ने कहा कि मिल प्रबंधन द्वारा सोन नदी में किसी भी प्रकार का प्रदूषित या केमिकल युक्त जल प्रवाहित नहीं किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ असंतुष्ट लोग बिना ठोस प्रमाण के शिकायतें कर रहे हैं और राजनीतिक दबाव बनाने के उद्देश्य से विवाद खड़ा किया जा रहा है।
बड़ा सवाल: कौन जिम्मेदार?
सोन नदी जैसे महत्वपूर्ण जल स्रोत में प्रदूषण के आरोप और मवेशियों की मौत के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि आरोप गलत हैं तो स्वतंत्र जांच क्यों नहीं हो रही? और यदि सही हैं तो अब तक दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? ग्रामीणों की मांग है कि सोन नदी के पानी की तत्काल वैज्ञानिक जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई हो, ताकि नदी, इंसान और पशुधन तीनों को बचाया जा सके।
