कांग्रेस पार्टी पर पड़ सकता बड़ा असर लोगो ने कहा,पार्टी के युवा जब जेल जाएंगे तो किस काम की ऐसी राजनीति सच की लड़ाई

जब रक्षक ही उठाए लाठी,तो लोकतंत्र कैसे बचे?

मुख्यमंत्री के दौरे में तानाशाही का नंगा नाच,कलेक्टर ने खुद भांजी लाठी

भाजपा सरकार माफी मांगे, कलेक्टर को तत्काल हटाकर निलंबित करे–कांग्रेस 




Junaid khan - शहडोल। लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन नागरिकों का संवैधानिक अधिकार होता है, लेकिन जब उसी अधिकार का जवाब लाठी से दिया जाने लगे और वह भी प्रशासन के शीर्ष अधिकारी द्वारा, तो यह केवल कानून-व्यवस्था का सवाल नहीं रह जाता, बल्कि पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर देता है। शहडोल जिले के बुढार-धनपुरी क्षेत्र में रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दौरे के दौरान जो कुछ हुआ, उसने प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे को शर्मसार कर दिया है। मुख्यमंत्री के काफिले के आगे बढ़ते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाकर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराना शुरू किया। यह विरोध पहले से प्रशासन को सूचित बताया जा रहा है। बावजूद इसके, सुरक्षा व्यवस्था इतनी कमजोर साबित हुई कि कुछ ही देर में हालात बिगड़ने लगे। प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए और इसी अफरा-तफरी के बीच एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने सबको चौंका दिया। स्थिति को संभालने के नाम पर शहडोल कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने सारी प्रशासनिक मर्यादाएं लांघ दीं। आरोप है कि उन्होंने एक आरक्षक से डंडा लेकर स्वयं कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर लाठी भांज दी। यह पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई और देखते ही देखते वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि एक जिलाधिकारी, जो संविधान का संरक्षक माना जाता है, खुद कानून हाथ में लेते नजर आ रहा है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि कलेक्टर ने ब्लॉक कांग्रेस कमेटी बुढार के अध्यक्ष अंकित सिंह पर सीधे लाठी चलाई। कांग्रेस का कहना है कि यदि प्रशासन चाहता, तो शांतिपूर्वक गिरफ्तारी की जा सकती थी, लेकिन जानबूझकर बल प्रयोग कर डराने की कोशिश की गई। यह लोकतंत्र नहीं, बल्कि खुली तानाशाही का उदाहरण है। इस घटना के बाद पुलिस ने करीब 50 कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया, जिनमें से अधिकांश को देर शाम जमानत पर छोड़ दिया गया। हालांकि, जयसिंहनगर विधानसभा अध्यक्ष शेख साजिल (शनि), सत्यम और आशू के खिलाफ अतिरिक्त धाराएं लगाकर उन्हें जेल भेज दिया गया। राजनीतिक आग में घी डालने का काम किया है। कांग्रेस का आरोप है कि चुनिंदा नेताओं को निशाना बनाकर बदले की कार्रवाई की गई। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह पूरा घटनाक्रम प्रशासनिक विफलता और खुफिया तंत्र की नाकामी को उजागर करता है। यदि विरोध की सूचना पहले से थी, तो काफिले के मार्ग में कार्यकर्ताओं का पहुंच जाना किसकी चूक है? सवाल यह भी है कि जब मुख्यमंत्री का दौरा विकास योजनाओं के लोकार्पण और भूमिपूजन के लिए था, तो सरकार विरोध की आवाज से इतनी असहज क्यों हुई? कांग्रेस ने इस पूरे मामले को भाजपा सरकार द्वारा लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का प्रतीक बताया है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष अजय अवस्थी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह घटना केवल कांग्रेस पर हमला नहीं, बल्कि हर उस नागरिक पर हमला है जो सरकार से सवाल पूछने का अधिकार रखता है। उन्होंने मांग की है कि भाजपा सरकार सार्वजनिक रूप से माफी मांगे और कलेक्टर डॉ. केदार सिंह को तत्काल पद से हटाकर निलंबित किया जाए। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह आंदोलन शहडोल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे प्रदेश में सड़कों पर उतरेगा। पार्टी इसे “लाठी नहीं, लोकतंत्र चाहिए” के नारे के साथ जन-जन तक ले जाने की तैयारी में है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अब विरोध का जवाब डंडे से दिया जाएगा? जब रक्षक ही भक्षक बन जाए और कलेक्टर खुद लाठी उठाए, तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करे? शहडोल की यह घटना आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति को और गर्माने के पूरे संकेत दे रही है।

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