छात्र की मौत पर बड़ा एक्शन: ज्ञानोदय हॉस्टल के अधीक्षक निलंबित

लापरवाही पर सख्ती छुट्टी न मिलने से बिगड़ी तबीयत, 12वीं के छात्र की मौत के बाद प्रशासन हरकत में; तीन सदस्यीय जांच समिति पहले ही गठित 



Junaid khan - शहडोल। 23 फरवरी 2026।जिले के चर्चित ज्ञानोदय आवासीय विद्यालय, विचारपुर में 12वीं कक्षा के छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। छात्र की तबीयत खराब होने के बावजूद समय पर छुट्टी और समुचित उपचार न मिलने के आरोपों के बीच उपायुक्त जनजातीय कार्य विभाग श्री जे.पी. यादव ने छात्रावास अधीक्षक श्री नीलशरण सिंह को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई सिविल सेवा आचरण नियम 1966 के नियम 09 के तहत की गई है। निलंबन अवधि के दौरान अधीक्षक का मुख्यालय कार्यालय विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, जैसिंहनगर (जिला शहडोल) नियत किया गया है। इस अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, विचारपुर स्थित शासकीय ज्ञानोदय आवासीय विद्यालय में अध्ययनरत 12वीं के छात्र की तबीयत पिछले कुछ दिनों से खराब चल रही थी। परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि छात्र ने कई बार स्वास्थ्य खराब होने की जानकारी दी, लेकिन हॉस्टल प्रबंधन ने गंभीरता नहीं दिखाई। बताया जा रहा है कि 16 फरवरी को अचानक हालत अधिक बिगड़ने पर छात्र को परिजन अपने साथ घर ले गए, जहां उपचार के दौरान 19 फरवरी को उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश फैल गया और विद्यालय प्रबंधन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगे। तीन सदस्यीय जांच समिति गठित। घटना की गंभीरता को देखते हुए पहले ही तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की जा चुकी है, जो पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच करेगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। उपायुक्त जनजातीय ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही प्रमाणित होती है तो संबंधित जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। 

परिजनों का आरोप 

समय पर इलाज मिलता तो बच सकती थी जान। परिजनों का कहना है कि यदि छात्र को समय रहते छुट्टी देकर उचित उपचार की व्यवस्था कर दी जाती, तो संभवतः उसकी जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन पर संवेदनहीनता और स्वास्थ्य सुविधाओं की अनदेखी का आरोप लगाया है। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि आवासीय विद्यालयों में स्वास्थ्य जांच और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था की नियमित निगरानी आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। प्रशासन पर उठे सवाल, जवाबदेही की मांग तेज इस घटना ने एक बार फिर आवासीय विद्यालयों की व्यवस्थाओं और निगरानी प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल अधीक्षक के निलंबन को प्रशासन की प्रारंभिक सख्त कार्रवाई माना जा रहा है, लेकिन पूरे जिले की नजर अब जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी है, जो इस मामले की असली तस्वीर सामने लाएगी।

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