प्रशासन से अपेक्षाए-एक कड़वा सवाल
लाखों की हार से टूटा परिवार: पिता ने पत्नी-बेटी को दिया जहर, बेटी और पिता की मौत; मां जिंदगी की जंग में, बेटा अनाथ सा
Junaid khan - शहडोल। मोबाइल स्क्रीन पर खेला जाने वाला एक खेल, देखते ही देखते एक परिवार की जिंदगी का “अंतिम खेल” बन गया। कोतवाली थाना क्षेत्र की पुरानी बस्ती में हुई दर्दनाक घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। 40 वर्षीय शंकर गुप्ता ने कथित रूप से आर्थिक तंगी और ऑनलाइन गेमिंग में लाखों रुपये गंवाने के बाद अपनी पत्नी और 16 वर्षीय बेटी को जहर पिलाया और स्वयं भी जहरीला पदार्थ सेवन कर लिया। इलाज के दौरान बेटी स्वाति गुप्ता और पिता शंकर गुप्ता की मौत हो गई, जबकि पत्नी राजकुमारी गुप्ता की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है।
इस घटना ने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि समाज और शासन-प्रशासन के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आर्थिक बर्बादी से मानसिक टूटन तक
जानकारी के अनुसार शंकर गुप्ता को पिछले कुछ महीनों से मोबाइल पर खेले जाने वाले ऑनलाइन गेम्स की लत लग गई थी। बताया जा रहा है कि वह इन गेम्स में बड़ी रकम दांव पर लगाता था। हार का सिलसिला लगातार बढ़ता गया और देखते ही देखते लाखों रुपये कर्ज में डूब गए। पड़ोसियों के मुताबिक वह पिछले कुछ दिनों से बेहद तनावग्रस्त और चुप-चुप रहने लगा था। आर्थिक दबाव, कर्जदाताओं की चिंता और परिवार के भविष्य की आशंका ने उसे मानसिक रूप से तोड़ दिया था।
कोल्डड्रिंक में मिलाया जहर
मंगलवार रात कथित रूप से शंकर ने पत्नी और बेटी को कोल्डड्रिंक में जहर मिलाकर पिला दिया। खुद भी जहरीला पदार्थ खा लिया। कुछ ही देर में तीनों की हालत बिगड़ गई। पड़ोसियों ने चीख-पुकार सुनकर तत्काल मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया। इलाज के दौरान किशोरी स्वाति की मौत हो गई। देर शाम शंकर ने भी दम तोड़ दिया। पत्नी राजकुमारी जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही हैं। घटना के समय परिवार का बेटा घर पर मौजूद नहीं था, जिससे उसकी जान बच गई। अब वह इस त्रासदी के बाद लगभग बेसहारा हो गया है।
पुलिस जांच में जुटी
मामले में पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में ऑनलाइन गेमिंग में भारी आर्थिक नुकसान को घटना का मुख्य कारण माना जा रहा है। मोबाइल डेटा,बैंक लेनदेन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
कानून और नियमन: क्या है व्यवस्था?
भारत में ऑनलाइन गेमिंग और सट्टा ऐप्स को लेकर नियम मौजूद हैं, लेकिन उनका प्रभावी क्रियान्वयन बड़ी चुनौती बना हुआ है। प्रमुख प्रावधान: आईटी एक्ट 2000 अवैध ऑनलाइन गतिविधियों पर कार्रवाई का प्रावधान। पब्लिक गैंबलिंग एक्ट 1867 पारंपरिक जुए पर रोक, हालांकि ऑनलाइन जुए को लेकर स्पष्टता सीमित। कई राज्यों में ऑनलाइन सट्टा/जुआ पर अलग-अलग कानून लागू हैं। हाल के वर्षों में केंद्र सरकार ने कई विदेशी सट्टा ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह पर्याप्त है?
समाज और शासन के लिए चेतावनी
यह घटना केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर चल रहे कई प्लेटफॉर्म युवाओं और मध्यमवर्गीय परिवारों को आर्थिक जाल में फंसा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि: अत्यधिक गेमिंग मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डालती है। कर्ज और आर्थिक तनाव आत्मघाती प्रवृत्तियों को जन्म दे सकते हैं। परिवारों को समय रहते हस्तक्षेप और परामर्श की जरूरत है।
प्रशासन से अपेक्षाएँ
ऐसे ऐप्स की सख्त निगरानी और नियमन। अवैध सट्टा और जुआ प्लेटफॉर्म पर तत्काल कार्रवाई।
साइबर सेल द्वारा वित्तीय ट्रैकिंग और ब्लॉकिंग। स्कूल-कॉलेजों में ऑनलाइन गेमिंग के दुष्प्रभाव पर जागरूकता अभियान। इस परिवार के बचे हुए बेटे को आर्थिक सहायता, काउंसलिंग और पुनर्वास योजना उपलब्ध कराई जाए। जरूरी है जागरूकता और संवाद
परिवारों को डिजिटल गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए। आर्थिक लेन-देन और कर्ज की स्थिति को परिवार में साझा करना चाहिए। मानसिक तनाव की स्थिति में काउंसलिंग और सहायता लेना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर हेल्पलाइन और स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं से संपर्क किया जाए।
एक कड़वा सवाल
जब सरकारें अन्य हानिकारक ऐप्स पर प्रतिबंध लगा सकती हैं, तो अवैध जुआ-सट्टा ऐप्स पर सख्ती क्यों नहीं? क्या सख्त डिजिटल निगरानी और लाइसेंस व्यवस्था से ऐसी घटनाओं को रोका नहीं जा सकता? इन सवालों के जवाब तलाशना जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है। एक और परिवार को टूटने से बचाना।
शहर में शोक, समाज में मंथन
शहडोल शहर इस घटना से स्तब्ध है। हर जुबान पर एक ही सवाल है। क्या मोबाइल स्क्रीन पर खेला जाने वाला यह खेल, जिंदगी से बड़ा हो गया है? एक बेटी की असमय मौत, एक पिता का अपराध और आत्मविनाश, एक मां की जूझती सांसें और एक मासूम बेटे का उजड़ा भविष्य यह त्रासदी हमें चेतावनी देती है कि डिजिटल लत केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक संकट बनती जा रही है। नोट: यदि आप या आपका कोई परिचित मानसिक तनाव, आर्थिक संकट या आत्मघाती विचारों से जूझ रहा हो, तो तुरंत स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं या परामर्श हेल्पलाइन से संपर्क करें। समय पर मदद जीवन बचा सकती है।
