जांच के घेरे में देवांता: संदिग्ध दस्तावेज,इलाज में लापरवाही और वसूली के आरोपों से मचा बवाल
बीते दिनों प्रशासन ने अस्पताल के पंजीयन को निरस्त किया था
Junaid khan - शहडोल। शहर के चर्चित देवांता अस्पताल से जुड़ा मामला अब सिर्फ एक शिकायत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासनिक कार्रवाई, आयुष्मान योजना में कथित गड़बड़ी, संदिग्ध दस्तावेज और इलाज में लापरवाही जैसे कई गंभीर सवालों का केंद्र बन गया है। बीते दिनों प्रशासन ने अस्पताल के पंजीयन को निरस्त करने की कार्रवाई की, वहीं दूसरी ओर पुराने मामलों की जांच और नई शिकायतों ने इस पूरे प्रकरण को जिले की बड़ी खबर बना दिया है।
पहले की खबर: महिला मरीज की मौत के बाद जांच, पंजीयन निरस्तीकरण और दस्तावेजों की पड़ताल
देवांता अस्पताल उस समय सुर्खियों में आया जब एक महिला मरीज की मौत के बाद परिजनों ने गंभीर आरोप लगाए। आरोप था कि मरीज की मौत के बाद भी उसे जिंदा बताकर इलाज के नाम पर राशि वसूली गई। इस शिकायत के बाद प्रशासन हरकत में आया और अपर कलेक्टर के नेतृत्व में जांच टीम गठित की गई। जांच के दौरान अस्पताल के संचालन, स्टाफ सूची, रजिस्ट्रेशन दस्तावेज और बैंक से जुड़े लेन-देन की फाइलों की जांच की गई। सूत्रों के अनुसार टीम को कुछ दस्तावेज संदिग्ध स्थिति में मिले, जिनमें बंद लिफाफों में रखे बैंक दस्तावेज और एटीएम कार्ड तक शामिल थे। प्रशासन ने बैंक प्रबंधन और एलडीएम से भी जानकारी तलब की। इस पूरे प्रकरण में अस्पताल प्रबंधन और संचालकों पर आपराधिक धाराओं में प्रकरण दर्ज होने की बात सामने आई। बताया गया कि संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ पहले से मामला दर्ज है और वे गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार बताए गए। हालांकि पुलिस कार्रवाई की गति को लेकर भी सवाल उठे। इसी बीच एक बड़ा सवाल यह भी उठा कि अस्पताल का पंजीयन आखिर कब और किन आधारों पर दिया गया था, और क्या नियमानुसार स्टाफ व संसाधन उपलब्ध थे? जांच रिपोर्ट आने के बाद प्रशासन ने अस्पताल का पंजीयन निरस्त करने की कार्रवाई की, जिससे निजी अस्पतालों में हड़कंप मच गया। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यदि आयुष्मान योजना या अन्य सरकारी योजनाओं में अनियमितता पाई गई तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई को जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था पर नियंत्रण और पारदर्शिता की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
अभी की खबर: आयुष्मान कार्ड के बावजूद 10 हजार की वसूली का आरोप, पीड़ित ने कलेक्टर को सौंपा शिकायत पत्र
इसी बीच अब एक नया मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रकरण को और गंभीर बना दिया है। शहर के वार्ड क्रमांक 31 निवासी विकास गुप्ता ने कलेक्टर को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि उनके पिता कमलेश गुप्ता के हाथ के ऑपरेशन के दौरान आयुष्मान कार्ड लगाने के बावजूद 10 हजार रुपये की मांग की गई। शिकायत पत्र में उल्लेख है कि करीब तीन वर्ष पूर्व दुर्घटना में हाथ टूटने के बाद पहले एक अन्य अस्पताल में ऑपरेशन कराया गया था, जहां भी आयुष्मान कार्ड के बावजूद राशि ली गई। बाद में स्थिति में सुधार न होने पर देवांता अस्पताल में उपचार कराया गया। यहां भी आयुष्मान योजना के तहत इलाज होने की बात कही गई, लेकिन अतिरिक्त राशि जमा कराने का दबाव बनाया गया। पीड़ित का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद भी हाथ से खून और मवाद निकलता रहा, कई बार ड्रेसिंग कराई गई, फिर भी लाभ नहीं मिला। जिला अस्पताल में जांच कराने पर प्लेट गलत तरीके से फिट होने की आशंका जताई गई और दोबारा ऑपरेशन की बात सामने आई। इससे परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से टूट गया है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि आयुष्मान योजना के नाम पर मरीजों से नकद राशि ली जा रही है, जबकि योजना का उद्देश्य गरीबों को निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराना है। पीड़ित ने दोनों चिकित्सकों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई और उचित आर्थिक सहायता की मांग की है। दूसरी ओर, अस्पताल प्रबंधन ने पूर्व में लगे आरोपों को निराधार बताया था और कहा था कि उपचार नियमानुसार किया गया। हालांकि नए शिकायत पत्र के सामने आने के बाद प्रशासन पर निष्पक्ष और व्यापक जांच का दबाव बढ़ गया है।
बड़े सवाल: आयुष्मान योजना की साख, निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और प्रशासन की अग्निपरीक्षा
देवांता अस्पताल प्रकरण अब सिर्फ एक अस्पताल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने पूरे जिले में आयुष्मान योजना के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद मरीजों से नकद वसूली के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह योजना की मूल भावना के खिलाफ गंभीर अपराध माना जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि निजी अस्पतालों की नियमित ऑडिट, बिलिंग की पारदर्शिता और ऑनलाइन क्लेम सिस्टम की सख्त निगरानी जरूरी है। साथ ही, मरीजों को भी यह जानकारी दी जानी चाहिए कि आयुष्मान योजना में किन सेवाओं के लिए अलग से भुगतान वैध है और किनके लिए नहीं। फिलहाल प्रशासन ने जांच जारी होने की बात कही है। जिले की जनता की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या दोषियों पर ठोस कार्रवाई होगी या मामला कागजी कार्रवाई तक सिमट जाएगा। देवांता अस्पताल का यह मामला आने वाले दिनों में स्वास्थ्य तंत्र की पारदर्शिता और जवाबदेही की असली परीक्षा साबित हो सकता है।
