अंतिम क्षणों में निरस्त हुआ दौरा,विश्वविद्यालय और प्रशासन की तैयारियां धरी रह गईं
Junaid khan - शहडोल। पंडित शंभूनाथ शुक्ल विश्वविद्यालय, नवलपुर में बुधवार को आयोजित दीक्षांत समारोह उस समय चर्चा का विषय बन गया, जब मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल का प्रस्तावित दौरा अंतिम समय में निरस्त कर दिया गया। हेलीकॉप्टर में आई तकनीकी खराबी के कारण वे भोपाल से शहडोल के लिए उड़ान नहीं भर सके,जिससे कार्यक्रम की रूपरेखा में अचानक बदलाव करना पड़ा। राज्यपाल का कार्यक्रम पूर्व निर्धारित समयानुसार प्रातः 8:55 बजे भोपाल से रवाना होकर सुबह 11:00 बजे जमुई हेलीपैड, शहडोल पहुंचने का था। इसके बाद 11:05 बजे वे विश्वविद्यालय परिसर, नवलपुर पहुंचकर दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते और मेधावी विद्यार्थियों को उपाधि व पदक प्रदान करते।
मंच से दी गई निरस्तीकरण की जानकारी
समारोह के दौरान लगभग 11:48 बजे मंच से कुलपति रमाशंकर तिवारी ने मीडिया और उपस्थित विद्यार्थियों को राज्यपाल के दौरे के निरस्त होने की औपचारिक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हेलीकॉप्टर में तकनीकी कारणों से उड़ान संभव नहीं हो सकी, जिसके चलते कार्यक्रम को रद्द करना पड़ा।
घोषणा के बाद कुछ समय के लिए समारोह स्थल पर असमंजस की स्थिति बनी रही। विद्यार्थियों और अभिभावकों में निराशा देखी गई, क्योंकि कई छात्रों को स्वयं राज्यपाल के हाथों उपाधि प्राप्त करने की उम्मीद थी। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए कार्यक्रम को नियत प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ाया।
एक सप्ताह से चल रही थीं तैयारियां
राज्यपाल के आगमन को लेकर पिछले एक सप्ताह से विश्वविद्यालय और जिला प्रशासन तैयारियों में जुटा हुआ था। परिसर की साफ-सफाई, मंच सज्जा,अतिथि दीर्घा, सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन को लेकर विशेष इंतजाम किए गए थे। सुरक्षा के मद्देनजर कार्यक्रम स्थल और आसपास के क्षेत्रों में चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात किया गया था। जिले के विभिन्न थानों के थाना प्रभारी अपनी-अपनी टीमों के साथ मंगलवार से ही नवलपुर में डटे हुए थे। इसके अलावा पड़ोसी जिलों से भी अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया था। हेलीपैड पर भी विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किया गया था।
बिना मुख्य अतिथि के संपन्न हुआ समारोह
राज्यपाल के न पहुंचने के बावजूद दीक्षांत समारोह स्थगित नहीं किया गया। कुलपति ने स्वयं अध्यक्षता करते हुए उपाधि वितरण की औपचारिकताएं पूरी कराईं। विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों को स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध उपाधियां प्रदान की गईं। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में विद्यार्थी एवं अभिभावक उपस्थित रहे। विद्यार्थियों में मिश्रित प्रतिक्रिया समारोह में शामिल कई छात्रों ने बताया कि वे राज्यपाल के हाथों डिग्री लेने को लेकर उत्साहित थे। हालांकि तकनीकी कारणों को देखते हुए उन्होंने स्थिति को समझने की बात कही। अभिभावकों ने भी प्रशासन की त्वरित व्यवस्था की सराहना की कि कार्यक्रम को बिना अव्यवस्था के संपन्न कराया गया।
प्रशासनिक सतर्कता की भी हुई परीक्षा
अचानक हुए बदलाव ने जिला प्रशासन की तत्परता की भी परीक्षा ली। सुरक्षा और प्रोटोकॉल में लगे अधिकारियों को तत्काल नई व्यवस्था बनानी पड़ी। हालांकि किसी प्रकार की अव्यवस्था या अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। कुल मिलाकर, राज्यपाल के दौरे के निरस्त होने से दीक्षांत समारोह का आकर्षण कुछ कम अवश्य हुआ, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने संयम और सुव्यवस्थित प्रबंधन का परिचय देते हुए कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संपन्न कराया। यह आयोजन विद्यार्थियों के शैक्षणिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव रहा, भले ही मुख्य अतिथि की अनुपस्थिति ने इसे चर्चा का विषय बना।
