जिला चिकित्सालय शहडोल में ‘चिकित्सकों पर भारी’ नर्सिंग ऑफिसर रश्मि राव..!

क्या अस्पताल में बदल रहा शक्ति संतुलन...?


Junaid khan - शहडोल। शहडोल जिला चिकित्सालय एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। इस बार मामला किसी कमी या संसाधन संकट का नहीं, बल्कि अस्पताल के अंदर बढ़ते शक्ति संघर्ष का बताया जा रहा है। चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं नर्सिंग ऑफिसर रश्मि राव, जिनके बारे में कहा जा रहा है कि की मेटरनिटी विंग के पांच चिकित्सकों द्वारा सिविल सर्जन को उन्हें अन्यत्र पदस्थ करने हेतु ज्ञापन पत्र सौंपा गया है। शहडोल जिला चिकित्सालय के मेटरनिटी विंग के चिकित्सकों द्वारा मेटरनिटी विंग में पदस्थ नर्सिंग ऑफिसर रश्मि राव की कार्य कुशलता पर ही प्रश्न चिन्ह लगा दिया गया है...! यह चर्चा सिर्फ अफवाह नहीं बल्कि अस्पताल के अंदर चल रहे आपसी मतभेदों की ओर इशारा करती हुई बताई जा रही है।

कौन है नर्सिंग ऑफिसर रश्मि राव....!

08 जनवरी 2026 को चार चिकित्सकों डॉ अरविंद अंबेडकर,डॉ अपूर्व पांडे, डॉक्टर व्ही पी पटेल, डॉ रेखा कारखुर,द्वारा सिविल सर्जन के समक्ष लिखित आपत्ति दर्ज कराई गई थी।जिसमें बताया गया था कि जिला चिकित्सालय के ऑपरेशन थिएटर से अनुभवी स्टाफ को अन्यत्र स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलने हेतु पदस्थ कर दिया गया है। जिसमें नर्सिंग ऑफिसर रश्मि राव का नाम प्रमुखता के साथ लिया जा रहा था।जिन चार चिकित्सकों द्वारा नर्सिंग ऑफिसर रश्मि राव को कार्य कुशलता और दक्षता की दुहाई देते हुए उन्हें उन्हें ऑपरेशन थिएटर में पुनःपदस्थ किए जाने हेतु पुरजोर प्रयास और कोशिश की थी।और इसी बीच शिकवा और शिकायतों का दौर भी चल पड़ा था।वहीं जिला चिकित्सालय शहडोल पदस्थ एक सर्जन के विरुद्ध भी चार डॉक्टर और कुछ नर्सिंग ऑफिसर लाम बंद हुई थी।

चिकित्सकों के बीच ही विरोधाभास।

जिला चिकित्सालय शहडोल में पदस्थ डॉ अरविंद अंबेडकर,डॉ अपूर्व पांडे, डॉक्टर व्ही पी पटेल, डॉ रेखा कारखुर,द्वारा जिस नर्सिंग ऑफिसर रश्मि राव का पुनः ऑपरेशन थिएटर में पदस्थ किए जाने हेतु एड़ी चोटी का जोर लगाते हुए भरसक प्रयास किया था और नर्सिंग ऑफिसर रश्मि राव को कार्य में दक्ष और अनुभवी बताते हुए गुणगान किया था।वही जिला चिकित्सालय शहडोल के मैटरनिटी विंग के पांच चिकित्सक जिनमें डॉ. ममता जगतपाल,डॉ अजीत सिंह,डॉक्टर त्रिगेन्द्र सिंह डॉ अंजू झा,डॉ हर्षित शर्मा द्वारा उसीअनुभवी और कार्य में दक्ष नर्सिंग ऑफिसर रश्मि राव को को मेटरनिटी विंग से अन्यत्र पदस्थ किए जाने हेतु सिविल सर्जन को ज्ञापन पत्र सौंपा है। अब जनता यह नहीं समझ पा रही है जिला चिकित्सालय में पदस्थ कर सजनों द्वाराजिस नर्सिंग ऑफिसर कामुक्त कंठ से गुणगान किया जा रहा थाइस अनुभवी नर्सिंग ऑफिसर का मेटरनिटी विंग में पदस्थ पांच डॉक्टरों द्वारा उसकी कार्य कुशलता पर ही प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया गया है.....!

शिकायत और ज्ञापन ठंडा बस्ते में....! 

सूत्र बताते हैं कि सिविल सर्जन डॉ शिल्पी सराफ द्वारा अपने कार्यों में रुचि नहीं ली जाती है।शिकवे शिकायत और ज्ञापन पर।कोई भी न्याय संगत कार्रवाई करने का प्रयास नहीं किया जाता है।जिससे जिला चिकित्सालय के अंदर ही सभी के साथ समन्वय स्थापित करना अब टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। जिला अस्पताल की मूलभूत सुविधाएं एवं मरीज के बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था एवं सुविधाओं के लिए संकल्पित डॉक्टर शिल्पी सराफ अपने मूल उद्देश्य से भटक गई हैं।जिसकी वजह से जिला अस्पताल शहडोल की स्वास्थ्य व्यवस्था पंगु हो गई है...!

नर्सिंग ऑफिसर रश्मि राव पर मेहरबान सहायक प्रबंधक अस्पताल प्रशासन पूजा सोनी..! 

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा सोचने वाला तथ्य तो यह था कि सहायक प्रबंधक अस्पताल प्रशासन पूजा सोनी द्वारा नर्सिंग ऑफिसर रश्मि राव को जिला चिकित्सालय के ऑपरेशन थिएटर से हटाकर अति महत्वपूर्ण मेटरनिटी विंग के ऑपरेशन थिएटर में किन नियम मापदंड के आधार पर कैसे पदस्थ कर दिया गया।जो आम जनमानस में आज भी चर्चा का विषय बनी हुई है।क्योंकि कुछ डॉक्टर जिन्होंने नर्सिंग ऑफिसर रश्मि राव का पुरजोर समर्थन किया था कहीं ना कहीं मरीज से अवैध रूप से रुपये लेने के नाम पर चर्चित हो चुके हैं...!कहीं ऐसा तो नहीं की सहायक प्रबंधक पूजा सोनी की इसमें मिली भगत हो...? यह भी अपने आप में एक जांच का विषय है....!

अब शुरू होगा जोर आजमाइश का दौरा.!!!!

जिला चिकित्सालय के मेटरनिटी विंग में पदस्थनर्सिंग ऑफिसर रश्मि राव को हटाने हेतु लामबद्ध हुए पांच चिकित्सकों द्वारा ज्ञापन पत्र तो सिविल सर्जन डॉक्टर शिल्पी सराफ को सौंप दिया गया है।वहीं जिला चिकित्सालय में पदस्थ चार चिकित्सकों जिन्होंने मुक्त कंठ से नर्सिंग ऑफिसर रश्मि राव का समर्थन किया था उनके अब दोनों हाथों में जैसे लड्डू आ गए हो।एक बार फिर से जिला चिकित्सालय के ऑपरेशन थिएटर में नर्सिंग ऑफिसर रश्मि राव के पदस्थ होने की उम्मीद फिर से जाग रही है.!!!

अब देखना यह होगा कि जिला अस्पताल प्रबंधन और प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर क्या कदम उठाता है क्योंकि मामला सीधे तौर पर मरीजों की सुरक्षा और इलाज की गुणवत्ता से जुड़ा हुआ है।

इनका कहना है।

जिला चिकित्सालय शहडोल में पदक सिविल सर्जन डॉक्टर शिल्पी सराफ से जब उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया।तो उन्होंने अपना मोबाइल उठाना ही जरूरी नहीं समझा।

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