प्रोफेसर से अभद्रता और मारपीट का मामला: 11 छात्रों पर केस, विश्वविद्यालय ने किया निष्कासन

अनुशासनहीनता पर सख्ती,15 दिन में मांगा जवाब परिसर में बढ़ी हलचल 


Junaid Khan - शहडोल। सँभाग के जिले अनूपपुर में अमरकंटक इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजाति विश्वविद्यालय, अमरकंटक में एक गंभीर घटना सामने आई है, जहां प्रोफेसर के साथ अभद्रता और मारपीट के मामले में पुलिस ने 11 छात्रों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। इस घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी सख्त रुख अपनाते हुए सभी आरोपित छात्रों को तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया है, जिससे पूरे परिसर में हड़कंप मच गया है।

प्रोफेसर की शिकायत पर दर्ज हुआ मामला

अमरकंटक थाना प्रभारी लाल बहादुर तिवारी के अनुसार, शिकायतकर्ता प्रोफेसर डॉ. चार्ल्स वर्गीज (उम्र लगभग 40 वर्ष) ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि कुछ छात्रों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार करते हुए मारपीट की। घटना विश्वविद्यालय के लालपुर परिसर में हुई, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया।

इन छात्रों पर हुई कार्रवाई

पुलिस द्वारा दर्ज मामले में आरोपी छात्रों में कुमार मंगलम, जय गणेश दीक्षित, अनिकेत सिंह, शिवेंद्र तिवारी, आर्यन गर्ग, सुरेश यादव, राहुल पाल, दयाशंकर मिश्रा, रितिक कुमार, अभय यादव और ब्रजेश यादव के नाम शामिल हैं। सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है।

विश्वविद्यालय प्रशासन की सख्त कार्रवाई

घटना की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रबंधन ने 19 मार्च की रात हुई अनुशासनहीनता, घेराव और तालाबंदी की घटनाओं को आधार मानते हुए सभी 11 छात्रों को निष्कासित कर दिया है। साथ ही उन्हें 15 दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि परिसर में किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

राजनीतिक प्रतिक्रिया से मामला गरमाया

इस पूरे प्रकरण ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। भाजपा जिला अध्यक्ष हीरा सिंह श्याम ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय को किसी भी हालत में “धर्मांतरण का गढ़” नहीं बनने दिया जाएगा। उन्होंने इस विवाद को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

जांच जारी,आगे और खुलासों की संभावना

पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन दोनों ही स्तर पर मामले की जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर आगे और कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने न केवल विश्वविद्यालय के अनुशासन पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि शिक्षा संस्थानों में बढ़ती असहिष्णुता को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।

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