गैस की किल्लत से बंद पड़े चाट-फुल्की और फास्ट फूड के ठेले, दुकानदार बोले अब घर चलाना भी मुश्किल
Junaid Khan - शहडोल। जिले में व्याप्त कमर्शियल गैस सिलेंडर की भारी कमी ने शहर के प्रसिद्ध चौपाटी बाजार की रौनक छीन ली है। जहां पहले शाम होते ही चाट-फुल्की, पानीपुरी और फास्ट फूड के ठेलों पर लोगों की भीड़ उमड़ती थी, वहीं अब सन्नाटा पसरा नजर आ रहा है। गैस सिलेंडर न मिलने से अधिकांश दुकानदारों ने अपने ठेले बंद कर दिए हैं, जिससे उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ा है।
आधे से ज्यादा ठेले बंद, बाजार की रौनक गायब
चौपाटी बाजार में करीब 25–30 छोटे-बड़े ठेले रोज लगते थे, लेकिन सिलेंडर की कमी के चलते इनमें से आधे से ज्यादा ठेले बंद हो चुके हैं। जो कुछ ठेले खुले भी हैं, वे सीमित संसाधनों के साथ काम चला रहे हैं। पहले जहां ग्राहकों की लंबी कतारें लगती थीं, अब वहां इक्का-दुक्का लोग ही नजर आते हैं।
दुकानदारों का दर्द सिलेंडर नहीं तो काम कैसे?
चाट-फुल्की बेचने वाले दुकानदारों का कहना है कि उनका पूरा व्यवसाय कमर्शियल गैस सिलेंडर पर निर्भर है। सिलेंडर नहीं मिलने के कारण वे चाहकर भी दुकान नहीं खोल पा रहे हैं। कई दुकानदारों ने बताया कि अब घर का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना चुनौती बन गया है।
15 दिन से जारी संकट,समाधान नहीं
दुकानदारों के अनुसार पिछले 10–15 दिनों से यह समस्या लगातार बनी हुई है। सिलेंडर की बुकिंग कराने के बाद भी समय पर आपूर्ति नहीं हो पा रही है। कई बार तो एक सिलेंडर पाने के लिए दिनभर इंतजार करना पड़ता है, फिर भी सफलता नहीं मिलती। छोटे व्यापारियों पर सबसे ज्यादा मार। इस संकट का सबसे ज्यादा असर छोटे और फुटपाथ पर व्यवसाय करने वाले दुकानदारों पर पड़ा है। होटल और बड़े रेस्टोरेंट किसी तरह वैकल्पिक व्यवस्था कर लेते हैं, लेकिन छोटे ठेले वालों के पास ऐसा कोई विकल्प नहीं है। उनकी आय पूरी तरह ठप हो चुकी है।
प्रशासन से लगाई गुहार पीड़ित दुकानदारों ने प्रशासन से जल्द से जल्द कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो उनकी आर्थिक स्थिति और भी खराब हो जाएगी। जिम्मेदारों का दावा जल्द होगा समाधान जिला आपूर्ति विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई में कुछ दिक्कतें आई हैं, जिन्हें जल्द ही सुधार लिया जाएगा। फिलहाल प्राथमिकता अस्पतालों और आवश्यक सेवाओं को दी जा रही है, लेकिन बाजार की स्थिति को देखते हुए जल्द राहत देने का प्रयास किया जा रहा है। निष्कर्ष: चौपाटी बाजार की यह हालत सिर्फ एक बाजार की कहानी नहीं, बल्कि छोटे व्यापारियों के संघर्ष की तस्वीर है। यदि समय रहते गैस संकट का समाधान नहीं हुआ, तो यह समस्या हजारों परिवारों की आजीविका पर भारी पड़ सकती है।

