को-एड शासकीय महाविद्यालय, एडी कार्यालय, इंजीनियरिंग शाखाएं, ब्लड बैंक और रिसर्च लैब सहित कई मुद्दों पर कार्रवाई की मांग
Junaid Khan - शहडोल। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) शहडोल के कार्यकर्ताओं द्वारा जिले में व्याप्त विभिन्न शैक्षणिक एवं प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर उपमुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन के माध्यम से छात्र हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाते हुए शीघ्र समाधान की मांग की गई। इस दौरान अभाविप के जिला संयोजक अमन त्रिपाठी ने बताया कि शहडोल जिले में लंबे समय से कई शैक्षणिक एवं प्रशासनिक समस्याएं बनी हुई हैं, जिनका सीधा प्रभाव विद्यार्थियों और कर्मचारियों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं के समाधान के लिए संगठन द्वारा उपमुख्यमंत्री को विस्तृत ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की गई है। ज्ञापन में प्रमुख रूप से मांग की गई है कि पंडित शंभूनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद भी शहडोल जिला मुख्यालय में आज तक कोई को-एड (सह-शिक्षा) शासकीय महाविद्यालय स्थापित नहीं किया गया है, जबकि इसकी पूर्व में घोषणा की जा चुकी है। ऐसे में इस घोषणा को जल्द से जल्द क्रियान्वित किया जाए। इसी तरह वर्तमान में अतिरिक्त संचालक (एडी) का कार्यालय रीवा में संचालित हो रहा है, जो शहडोल से लगभग 300 किलोमीटर दूर है। इसके कारण शहडोल संभाग के कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों को आवश्यक कार्यों के लिए रीवा तक जाना पड़ता है, जिससे समय, धन और असुविधा का सामना करना पड़ता है। कई बार दूरी के कारण जरूरी कार्य समय पर नहीं हो पाते, जिससे प्रशासनिक कार्य भी प्रभावित होते हैं। इसलिए एडी कार्यालय को शहडोल में शुरू किए जाने की मांग की गई है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि यआईटी (YIT) महाविद्यालय शहडोल को प्रारंभ हुए लगभग 10 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन वर्तमान में यहां केवल दो ही शाखाएं माइनिंग और मैकेनिकल इंजीनियरिंग संचालित हो रही हैं। क्षेत्र के विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए महाविद्यालय में अन्य इंजीनियरिंग शाखाएं भी प्रारंभ करने की मांग की गई है।
इसके अलावा शहडोल स्थित शासकीय बिरसा मुंडा मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में ब्लड बैंक की व्यवस्था होने के बावजूद आज तक उसे संचालित नहीं किया जा सका है, जिससे मरीजों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अभाविप ने मेडिकल कॉलेज में जल्द ब्लड बैंक शुरू करने की मांग की है।
नई शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत ऑनर्स एवं ऑनर्स विद रिसर्च पाठ्यक्रम के लिए जिले में रिसर्च लैब का अभाव भी प्रमुख समस्या बताया गया है। परिषद ने मांग की है कि पंडित शंभूनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय शहडोल और पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस बुढार में रिसर्च लैब की स्थापना की जाए, ताकि विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और शोध के बेहतर अवसर मिल सकें। ज्ञापन में एक गंभीर अनियमितता की ओर भी ध्यान दिलाया गया, जिसमें बताया गया कि पूर्व कुलपति डॉ. सुनील गुप्ता के कार्यकाल में कई प्रतिनियुक्तियां की गई थीं, जिन पर करोड़ों रुपये के घोटाले के आरोप सिद्ध होने के कारण वे जेल भी जा चुके हैं। इसी क्रम में अशासकीय महाविद्यालय एस.ए.टी.आई. विदिशा से डॉ. पी.एल. वर्मा को शासन के नियमों की अनदेखी करते हुए यआईटी शहडोल में प्रतिनियुक्त किया गया। ज्ञापन में बताया गया कि आरजीपीवी भोपाल द्वारा डॉ. पी.एल. वर्मा को 3 नवंबर 2020 से 2 नवंबर 2021 तक एक वर्ष के लिए यआईटी शहडोल में प्रतिनियुक्त किया गया था। इसके बाद जब उनका कार्यकाल बढ़ाया गया तो 3 जनवरी 2022 को पुनः नियुक्ति की गई, लेकिन इस दौरान लगभग दो महीने के ब्रेक पीरियड के बावजूद वेतन आहरित किया गया, जो गंभीर अनियमितता प्रतीत होती है। परिषद ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। इसके साथ ही यह भी बताया गया कि शहडोल संभाग में व्यापम (MPESB) की ऑनलाइन परीक्षाओं के लिए परीक्षा केंद्र उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण विद्यार्थियों को अन्य जिलों में जाकर परीक्षा देनी पड़ती है। इससे विद्यार्थियों को आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि पंडित शंभूनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय शहडोल द्वारा प्रथम वर्ष के परीक्षा परिणाम घोषित करने के बाद रिवॉल्यूशन (पुनर्मूल्यांकन) के लिए आवेदन लिए गए, लेकिन दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद संशोधित परिणाम घोषित नहीं किए गए हैं। इससे विद्यार्थियों के उच्च अध्ययन और प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, इसलिए शीघ्र परिणाम घोषित करने की मांग की गई है। इसके अलावा यह भी आरोप लगाया गया कि शहडोल जिले के कई शासकीय एवं अनुदान प्राप्त महाविद्यालयों में लेखपाल पद पर ऐसे अधिकारी कार्यरत हैं जो पूर्व में सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद पिछले 8 से 10 वर्षों से लगातार उसी पद पर कार्य कर रहे हैं। यह शासन के नियमों का उल्लंघन है और योग्य अभ्यर्थियों के अधिकारों का भी हनन करता है। परिषद ने इस पूरे मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
इस दौरान उपमुख्यमंत्री ने ज्ञापन पर संज्ञान लेते हुए आश्वासन दिया कि इन सभी विषयों पर शीघ्र कार्रवाई की जाएगी और दोषियों के खिलाफ उचित कदम उठाए जाएंगे। ज्ञापन सौंपते समय विभाग छात्रा प्रमुख अंजली पांडे, अमन तिवारी, भूमिका द्विवेदी, आकाश मिश्रा, ओम सोनी, आकाश साहू, शिवम कोरी सहित परिषद के कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
