भू-माफियाओं के आगे बेबस कानून?

शहडोल में तेजी से फैल रहा अवैध प्लॉटिंग का जाल,खेती की जमीन पर बस रहीं बेतरतीब कॉलोनियां 


Junaid Khan - शहडोल। जिले में अवैध प्लॉटिंग का कारोबार तेजी से पैर पसारता जा रहा है। खेती की उपजाऊ जमीन को छोटे-छोटे प्लॉटों में बांटकर बेचा जा रहा है और देखते ही देखते वहां बेतरतीब कॉलोनियां बसती जा रही हैं। हैरानी की बात यह है कि बिना किसी वैध अनुमति, नक्शा स्वीकृति और बुनियादी सुविधाओं के यह कारोबार खुलेआम जारी है। इससे न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि आम लोगों की जीवनभर की कमाई भी खतरे में पड़ती दिखाई दे रही है।

खेतों पर उग रहीं अवैध कॉलोनियां 

शहर के आसपास और ग्रामीण इलाकों में जहां कभी खेती होती थी, वहां अब तेजी से कॉलोनियां बसाई जा रही हैं। भू-माफिया किसानों से सस्ती कीमत पर जमीन खरीदकर उसे छोटे-छोटे प्लॉटों में बांट देते हैं और आकर्षक ऑफरों के साथ बेचने लगते हैं। कम कीमत में प्लॉट”, “आसान किस्तों में जमीन”, “जल्द बसने वाली कॉलोनी” जैसे लुभावने विज्ञापनों के जरिए लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया जा रहा है। लेकिन इन कॉलोनियों में न तो पक्की सड़कें होती हैं, न नाली व्यवस्था और न ही बिजली-पानी की कोई ठोस सुविधा। इसके बावजूद प्लॉटों की खरीद-बिक्री लगातार जारी है।

कागजों में खेत,जमीन पर कॉलोनी 

अवैध प्लॉटिंग का सबसे बड़ा खेल यह है कि कागजों में जमीन अब भी कृषि भूमि ही दर्ज रहती है, लेकिन जमीन पर कॉलोनी बस चुकी होती है। कृषि भूमि को आवासीय उपयोग में बदलने के लिए विधिवत अनुमति और प्रक्रिया जरूरी होती है, लेकिन भू-माफिया इस प्रक्रिया को नजरअंदाज कर सीधे प्लॉट बेचने लगते हैं। इस तरह की कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को बाद में कई तरह की कानूनी और सुविधाओं से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

आम आदमी बन रहा सबसे बड़ा शिकार 

इस पूरे खेल में सबसे ज्यादा नुकसान आम लोगों का हो रहा है। शहर में अपना छोटा सा घर बनाने का सपना लेकर लोग अपनी जमा-पूंजी लगाकर प्लॉट खरीद लेते हैं, लेकिन बाद में पता चलता है कि जमीन का कानूनी दर्जा स्पष्ट नहीं है या निर्माण की अनुमति ही नहीं मिल सकती।

कई मामलों में लोगों को लंबी कानूनी प्रक्रिया और प्रशासनिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

अवैध प्लॉटिंग का यह कारोबार खुलेआम चल रहा है, बड़े-बड़े बोर्ड लगाकर प्लॉट बेचे जा रहे हैं और दलाल खुले तौर पर ग्राहकों को जमीन दिखा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि संबंधित विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं है, और यदि है तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।

यह मामला केवल अवैध प्लॉटिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े करता है। शहर के भविष्य पर मंडरा रहा खतरा। बिना किसी योजना के बसती कॉलोनियां किसी भी शहर के लिए भविष्य में बड़ी समस्या बन जाती हैं। संकरी सड़कें, जल निकासी की कमी और अव्यवस्थित निर्माण से आने वाले समय में शहरी व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ता है। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो शहडोल में भी अव्यवस्थित शहरीकरण की गंभीर समस्या खड़ी हो सकती है।

जरूरी है सख्त कार्रवाई और जनजागरूकता विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध प्लॉटिंग पर रोक लगाने के लिए प्रशासन को सख्त कार्रवाई करनी होगी। साथ ही लोगों को भी जागरूक किया जाना जरूरी है कि जमीन खरीदने से पहले उसके कानूनी दस्तावेज, भूमि उपयोग और स्वीकृति की पूरी जांच अवश्य करें। अन्यथा घर का सपना दिखाकर लोगों की मेहनत की कमाई लूटने का यह सिलसिला यूँ ही चलता रहेगा।

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