जांच में पुलिस की भूमिका संदिग्ध
Junaid Khan - शहडोल। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी विधि विभाग के प्रदेश उपाध्यक्ष- मनीष श्रीवास्तव ने बताया कि, कल शहडोल में क्रिश्चियन मिशनरी की जमीन और कई दशकों पुराने क्रिश्चियन अस्पताल की कुछ जमीनों को लीज में दिए जाने के संबंध में गिरफ्तारियां हुई हैं और कई करोड़ों के गबन का आरोप लगाकर पुलिस ने माननीय न्यायालय में पेश किया है। माननीय न्यायालय का निर्णय तो सर्वमान्य सिरोधार है। परंतु इस पूरे प्रकरण में जिला और कोतवाली पुलिस की भूमिका संदिग्ध है। मनीष श्रीवास्तव ने बताया कि इस अस्पताल की जमीन वर्ष 1946 में रीवा राज्य के दौरान क्रिश्चियन समाज की समाजसेविका रामाबाई जी ने श्री किशोरी लाल अग्रवाल जी से भारत क्रिश्चियन समाज मद्रास के नाम से क्रय की थी। इस जमीन में अस्पताल निर्माण एवं संचालन का कार्य ELC मिशन मुख्यालय छिंदवाड़ा के द्वारा किया जाता रहा है। कई दशकों पूर्व इसी क्रिश्चियनअस्पताल के एक डॉ व्ही.के.अली ने अस्पताल की कुछ एकड़ जमीन अपने नाम करवा ली और अस्पताल से अलग हो गये, उसके बाद के चिकित्सा अधीक्षक डॉ दीपक पॉल ने भी इस क्रिश्चियन हॉस्पिटल को अपने नाम करवाना चाहा पर वो ऐसा कर तो नही पाये लेकिन उनके इस कृत्य से दशकों पुराना जनहितार्थ अस्पताल बंद हो गया जिस कारण शहडोल क्षेत्र के हजारों लोग सस्ते सुलभ इलाज से वंचित हो गये और सैकड़ों कर्मचारी बेरोजगार। मनीष श्रीवास्तव ने बताया कि कुछ वर्षों बाद जानकारी मिली की अस्पताल का एक हिस्सा पुणे चालू किया जा रहा है और कुछ जमीन है पलीज में दी जा रही है जिससे अस्पताल से संबंधित मशीनरी व विभागों सहित अस्पताल का संचालन सुचारू रूप से किया जा सकेगा। अस्पताल तो चालू हुआ लेकिन लगभग 2 वर्ष के अंतराल में वह भी बंद हो गया। जानकारी मिली कि NMSI, ELC और वर्तमान केयरटेकर का काम संभाल रहे प्रबंधन के आपसी विवाद में यह बंद कर दिया गया है और जमीनों की लीज NMSI चेन्नई के पदाधिकारी ने आकर अपने हस्ताक्षर से कर दी है बाद में रजिस्ट्री भी करवा दी जाएगी। मनीष श्रीवास्तव ने कहा कि इतने वर्षों के बाद कल एक ऐसी शिकायत जिसमें आवेदक ना तो कभी इस अस्पताल में कर्मचारी रही,न ही एक वर्ष पूर्व पहले कहीं भी वैधानिक रूप संस्था में किसी पद में रही हैं और इसमें शामिल NMSI चेन्नई के सभी पदाधिकारी, ELC मिशन छिंदवाड़ा के प्रमुख पदाधिकारी सुरेंद्र कुमार सुक्खा बिशप,अशोक चौकसे कोषाध्यक्ष व शहडोल निवासी भूपेंद्र खरया भी 10 एकड़ जमीन के लीजधारी हैं, पुलिस ने अपनी जांच में इन लोगों से पूछताछ क्यों नहीं की और इन लोगों को भी इस प्रकरण में शामिल क्यों नहीं किया? अगर वर्तमान केयर टेकर प्रयास प्रकाश और क्रिस्टि इब्राहिम इसके लिए जिम्मेदार हैं, अगर ऐसा जांच में ऐसा आया है तो वो सब NMSI चेन्नई के प्रमुख पदाधिकारी जो जमीन के मालिक हैं और जो ELC संस्था जो अस्पताल का संचालन कर रही थी वह सब भी और उसके पदाधिकारी इसके लिए जिम्मेदार माने जाएंगे इस पूरे प्रकरण में जिला पुलिस और कोतवाली शहडोल की भूमिका संदिग्ध है जांच में बहुत कुछ छुपाया गया है और गलत तथ्य पेश करके कहीं न्यायालय को गुमराह तो नहीं किया गया है? इसकी जांच होना आवश्यक है। सर्व प्रमुख जिला प्रशासन को चाहिए कि जितने भी लीजधारी हैं उनकी लीज तत्काल कैंसिल कर जमीन को पूर्वरत भारत क्रिश्चियन समाज चेन्नई क्रिश्चियन मिशनरी को वापस किया जाए और तब तक अस्पताल और लीजधारी प्रांगण को सील किया जाना आवश्यक है।

