प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस बुढ़ार में नियुक्तियों को लेकर पारदर्शिता पर सवाल,जांच की उठी मांग
Junaid Khan - शहडोल। जिले के प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शासकीय नेहरू स्नातकोत्तर महाविद्यालय बुढ़ार में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कॉलेज में की गई हालिया नियुक्तियों को लेकर स्थानीय लोगों और आवेदकों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित नियमों और पारदर्शिता की अनदेखी करते हुए कॉलेज प्रबंधन ने अपने परिचितों और संबंधियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से मनमाने ढंग से नियुक्तियां कर दीं। बताया जा रहा है कि महाविद्यालय में आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से विभिन्न पदों पर कर्मचारियों की भर्ती की गई थी। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया को लेकर कई अभ्यर्थियों ने सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि उन्होंने नियमानुसार आवेदन पत्र जमा किए थे, इसके बावजूद उन्हें किसी प्रकार की सूचना नहीं दी गई और उनकी जगह अन्य लोगों को नौकरी दे दी गई। इससे कई योग्य और पात्र उम्मीदवारों में नाराजगी और असंतोष का माहौल बन गया है।
पारदर्शिता पर उठे सवाल
आवेदकों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की सार्वजनिक सूचना, चयन सूची या मेरिट सूची जारी नहीं की गई। इससे पूरी प्रक्रिया पर संदेह उत्पन्न हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नियुक्तियां नियमों के अनुसार की गई हैं तो महाविद्यालय प्रबंधन को चयन प्रक्रिया और चयनित अभ्यर्थियों की सूची सार्वजनिक करनी चाहिए।
रिश्वत लेकर नियुक्ति देने के भी आरोप
कुछ आवेदकों ने यह भी आरोप लगाया है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान पैसों के लेन-देन का खेल भी चला है। आरोप है कि कुछ लोगों से मोटी रकम लेकर उन्हें नौकरी दिलाई गई। हालांकि इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इस तरह की चर्चाओं ने पूरे मामले को और अधिक गंभीर बना दिया है।
जानकारी मांगने पर नहीं मिला संतोषजनक जवाब
मामले की जानकारी लेने के लिए जब कुछ लोग महाविद्यालय पहुंचे और भर्ती से संबंधित दस्तावेजों तथा प्रक्रिया के बारे में जानकारी मांगी, तो उन्हें स्पष्ट और संतोषजनक जवाब नहीं मिला। आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन इस मामले में जानकारी देने से बच रहा है और पूरे प्रकरण को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे महाविद्यालय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। निष्पक्ष जांच की मांग
स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और आवेदकों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता या पक्षपात पाया जाता है, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। फिलहाल इस मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और लोगों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला न केवल महाविद्यालय बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।
