कथित कच्चे दस्तावेजों के आधार पर कब्जे का आरोप.!!
ईएलसी इन एमपी के पदाधिकारी ने की पत्रकार वार्ता
Junaid Khan - शहडोल। ईएलसी इन एमपी द्वारा विगत तिरपन वर्षों से निर्बाध रूप से क्रिश्चियन अस्पताल का संचालन किया जा रहा था। इस दौरान अस्पताल ने क्षेत्र के हजारों गरीब और जरूरतमंद मरीजों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई और लंबे समय तक यह संस्थान सेवा और मानवता का प्रतीक बना रहा।बताया जाता है कि कई दशकों तक अस्पताल का संचालन शांतिपूर्वक और व्यवस्थित ढंग से चलता रहा, लेकिन बाद के वर्षों में जमीन, प्रबंधन अधिकार और दस्तावेजों को लेकर विवाद खड़े होने लगे। धीरे-धीरे यह विवाद इतना बढ़ गया कि अस्पताल की कार्यप्रणाली और सेवाओं पर भी असर पड़ने लगा।स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस अस्पताल ने आधी सदी से अधिक समय तक समाज की सेवा की, वही आज विवादों और आरोप-प्रत्यारोप के बीच घिर गया है।
हाईकोर्ट के चार आदेश ईएलसी के पक्ष में,फिर भी क्यों जारी है विवाद...?
क्रिश्चियन हॉस्पिटल विवाद में एक अहम पहलू यह भी सामने आता है कि बताया जाता है कि माननीय हाईकोर्ट द्वारा चार अलग-अलग अवसरों पर दिए गए आदेश ईएलसी इन एमपी के पक्ष में रहे हैं। इन आदेशों को लेकर ईएलसी इन एमपी का दावा है कि न्यायालय ने अस्पताल के संचालन और उससे जुड़े अधिकारों के संबंध में उनके पक्ष को मजबूती दी है।इसके बावजूद यह सवाल लगातार उठ रहा है कि जब अदालत के आदेश सामने हैं, तो फिर भी विवाद खत्म क्यों नहीं हो पाया।सूत्र बताते हैं कि हाई कोर्ट में दर्ज रिट के बाद वर्तमान में ईएलसी इन एमपी का ही कब्जा क्रिश्चियन अस्पताल परिसर में है.!!
जमीन के लालचियों ने रचा पूरा षड्यंत्र?
बताया जा रहा है कि क्रिश्चियन हॉस्पिटल की जमीन को लेकर विवाद के पीछे जमीन के लालचियों द्वारा रचा गया एक कथित षड्यंत्र भी बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अस्पताल की बहुमूल्य जमीन पर नजर रखते हुए कुछ लोगों ने कागजी दावों और संदिग्ध दस्तावेजों के सहारे पूरा खेल रचने की कोशिश की।दशकों से सेवा दे रहे इस संस्थान को लेकर अचानक खड़ा हुआ विवाद अब कई सवाल खड़े कर रहा है। लोगों का कहना है कि यदि जमीन के लालच में किसी प्रकार की साजिश रची गई है, तो इसकी निष्पक्ष और गहन जांच होना जरूरी है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और जिम्मेदार लोगों की पहचान हो सके।
ईएलसी इन एमपी ने डॉ. के.के. टांडी को दिया मकान!
क्रिश्चियन हॉस्पिटल से जुड़े विवाद के बीच एक और जानकारी सामने आई है कि ईएलसी इन एमपी द्वारा डॉक्टर के.के. टांडी को अस्पताल परिसर में रहने के लिए मकान फर्नीचर सहित उपलब्ध करवाया कराया गया था। बताया जाता है कि यह व्यवस्था अस्पताल के संचालन और चिकित्सा सेवाओं को सुचारु बनाए रखने के उद्देश्य से की गई थी।सूत्रों के अनुसार उस समय अस्पताल में कार्यरत डॉक्टरों और स्टाफ को परिसर के भीतर या आसपास रहने की सुविधा दी जाती थी, ताकि मरीजों को आपातकालीन स्थिति में तुरंत इलाज मिल सके। इसी व्यवस्था के तहत डॉ. के.के. तांदी को भी आवास उपलब्ध कराया गया था।हालांकि बाद के वर्षों में अस्पताल और उससे जुड़ी संपत्तियों को लेकर विवाद खड़ा होने के बाद इस मकान और उसके उपयोग को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई।
खुर्द-बुर्द हुई बहुमूल्य जमीन का अब क्या होगा?
क्रिश्चियन हॉस्पिटल से जुड़ी बहुमूल्य जमीन को लेकर उठे विवाद के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो रहा है कि यदि जमीन के साथ किसी प्रकार की अनियमितता या खुर्द-बुर्द हुई है, तो उसका भविष्य क्या होगा।स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि अस्पताल की जमीन मूल रूप से सेवा और स्वास्थ्य कार्यों के उद्देश्य से उपयोग के लिए दी गई थी। ऐसे में यदि जमीन को लेकर किसी तरह का विवाद, कब्जा या दस्तावेजी गड़बड़ी हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच और कानूनी समाधान जरूरी है। आप ईएलसी इन एमपी ने इस लड़ाई को व्यापक रूप देने का मन बना लिया है।और इस सम्मान की लड़ाई को अब वह निर्णायक मोड़ तक ले जाएंगे।
2010 से बंद है क्रिश्चियन अस्पताल का संचालन!
शहडोल का क्रिश्चियन अस्पताल, जो कभी क्षेत्र के गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र माना जाता था, वर्ष 2010 से बंद पड़ा है। बताया जाता है कि जमीन विवाद, प्रबंधन अधिकारों को लेकर टकराव और कानूनी उलझनों के कारण अस्पताल की सेवाएं अचानक ठप हो गईं।लगभग आधी सदी तक निरंतर सेवा देने वाला यह अस्पताल बंद होने के बाद से हजारों मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधा प्रभावित हुई। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को इलाज के लिए दूर-दराज के अस्पतालों पर निर्भर होना पड़ा।
एफसीआरए फंड से मिले चार वाहन बेचने का आरोप!
क्रिश्चियन हॉस्पिटल विवाद के बीच अब एक नया आरोप सामने आया है। सूत्रों के अनुसार अस्पताल को विदेशी सहायता (FCRA फंड) के माध्यम से सेवा कार्यों के लिए चार वाहन उपलब्ध कराए गए थे, जिनका उपयोग मरीजों की सेवा, दवाओं की आपूर्ति और सामाजिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए किया जाना था। लेकिन आरोप है कि समय के साथ इन चारों वाहनों का सही हिसाब-किताब सामने नहीं आया और उन्हें कथित रूप से खुर्दबुर्द कर दिया गया। इस मामले को लेकर अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं।बताया जाहां है कि जोली शिल्पा टांडी द्वारा उक्त चारों वाहनों को बेच दिया गया है!उक्त चारों ही वाहन को बेचने के लिए जोली शिल्पा टांडी द्वारा ना तो एफसीआरए से और ना ही ईएलसी से अनुमति ली गई थी..!
शासन-प्रशासन सहयोग करे तो जल्द खुलेगा अस्पताल-अशोक चौकसे
क्रिश्चियन हॉस्पिटल को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब अस्पताल को फिर से शुरू करने की मांग तेज होती जा रही है। इस संबंध में ईएलसी इन एमपी अशोक चौकसे प्रधान कोषाध्यक्ष ने कहा है कि यदि शासन और प्रशासन का सहयोग मिले, तो अस्पताल को जल्द ही दोबारा चालू किया जा सकता है।उन्होंने कहा कि यह अस्पताल वर्षों तक क्षेत्र के गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र रहा है। लेकिन विवाद और कानूनी उलझनों के कारण अस्पताल की सेवाएं बंद हो गईं, जिससे आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।अशोक चौकसे का कहना है कि यदि संबंधित विभाग, प्रशासन समाधान निकालें, तो अस्पताल को फिर से शुरू कर क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा सकता है।गरीब और असहाय वर्ग को हम बेहतर चिकित्सा सुविधा मे करने के लिए वचनबद्ध हैं।
