ईएलसी इन एमपी ने लगाए गंभीर आरोप,अस्पताल की संपत्ति बेचने और दस्तावेजों में गड़बड़ी का दावा
Junaid Khan - शहडोल। शहर के क्रिश्चियन हॉस्पिटल को लेकर विवाद एक बार फिर सामने आया है। ईएलसी इन एमपी (Evangelical Lutheran Church in Madhya Pradesh) के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि कुछ लोगों द्वारा फर्जी दस्तावेजों और कथित साजिश के माध्यम से अस्पताल को बंद कराने तथा उसकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई है। संस्था ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। ईएलसी इन एमपी के अनुसार क्रिश्चियन हॉस्पिटल का संचालन पिछले करीब 53 वर्षों से संस्था द्वारा किया जाता रहा है, लेकिन वर्ष 2010 में कुछ लोगों द्वारा कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों और षड्यंत्र के माध्यम से अस्पताल को बंद करा दिया गया। संस्था का कहना है कि अस्पताल की जमीन और संपत्ति को लेकर विवाद उत्पन्न किया गया, जिसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। संस्था के पदाधिकारियों का दावा है कि हाईकोर्ट के चार फैसले ईएलसी इन एमपी के पक्ष में आए हैं और अस्पताल की संपत्ति पर उनका वैधानिक अधिकार है। साथ ही अनुविभागीय न्यायालय द्वारा धारा 145 के तहत कब्जा भी संस्था के पक्ष में माना गया है।
गरीब मरीजों के लिए अस्पताल दोबारा शुरू करने की तैयारी
ईएलसी इन एमपी के पदाधिकारियों ने बताया कि संस्था पिछले दस वर्षों से गरीब और असहाय मरीजों को कम लागत में बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अस्पताल को फिर से शुरू करने के प्रयास कर रही है। अस्पताल में फिलहाल 30 बेड की व्यवस्था तैयार है और आईसीयू वार्ड शुरू करने की भी तैयारी की जा रही है। संस्था ने कहा कि यदि प्रशासन सहयोग करता है तो जल्द ही अस्पताल को दोबारा शुरू कर दिया जाएगा, जिससे क्षेत्र के गरीब मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।
संपत्ति बेचने और उपकरण हटाने के आरोप
संस्था के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि अस्पताल से संबंधित जनरेटर और अन्य उपकरणों को बेचा गया, साथ ही एफसीआरए मद से प्राप्त चार वाहनों को भी बिना अनुमति बाजार में बेच दिया गया। उन्होंने कहा कि इस मामले से संबंधित दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं।
गिरफ्तारी की मांग
ईएलसी इन एमपी के प्रधान कोषाध्यक्ष अशोक चौकसे और विशप सुरेन्द्र सुक्का ने आरोप लगाया कि संस्था के खिलाफ झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं और प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से भ्रम फैलाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने बताया कि इस मामले में श्रीमती शिल्पा जॉली टंडी के खिलाफ 3 एफआईआर दर्ज हैं और धारा 16 के तहत कार्रवाई भी हो चुकी है। संस्था ने प्रशासन और पुलिस से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि अस्पताल की संपत्ति और संस्थान की प्रतिष्ठा को नुकसान न पहुंचे।
