सीमांकन के नाम पर 50 हजार की मांग का आरोप: महिला ने कलेक्टर से लगाई गुहार

राजस्व निरीक्षक और पटवारी पर गंभीर आरोप, आदेश के बाद भी नहीं हुआ सीमांकन; जनसुनवाई में भी नहीं मिली राहत


Junaid Khan - शहडोल। जिले में भूमि सीमांकन को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। एक महिला ने कलेक्टर को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि राजस्व विभाग के जिम्मेदार अधिकारी सीमांकन के नाम पर 50 हजार रुपये की मांग कर रहे हैं। शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होने से पीड़िता और उसका परिवार परेशान है।

क्या है पूरा मामला 

शिकायतकर्ता श्रीमती सरिता कनौजिया, पति स्व. फुलचंद लाल कनौजिया, निवासी वार्ड क्रमांक-39, शीतला मंदिर के पास, पुरानी बस्ती, शहडोल (म.प्र.) ने कलेक्टर को दिए आवेदन में बताया कि उनकी भूमि खसरा नंबर 579/1, रकबा 0.340 हेक्टेयर, स्थित पटवारी हल्का गोरतरा, तहसील सोहागपुर, जिला शहडोल में है। उन्होंने बताया कि भूमि सीमांकन के लिए उन्होंने विधिवत आवेदन प्रस्तुत किया था, जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर RB/460/0722/5206/2026 दिनांक 19.11.2025 दर्ज है। इसके बावजूद आज तक उनकी भूमि का सीमांकन नहीं किया गया। 

आदेश के बाद भी नहीं हुआ काम 

शिकायत में उल्लेख है कि तहसीलदार द्वारा भी सीमांकन के लिए आदेश जारी किया गया था। पत्र क्रमांक 721/प्रभा/तहसील/2025 दिनांक 10.12.2025 के तहत टीम गठित कर सीमांकन करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद राजस्व निरीक्षक और पटवारी द्वारा बार-बार नोटिस जारी करने के बाद भी सीमांकन की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।

रिश्वत मांगने का आरोप पीड़िता ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि राजस्व निरीक्षक भास्कर दत्ता गौतम एवं पटवारी विपुल सिंह द्वारा सीमांकन करने के एवज में 50,000 रुपये की मांग की जा रही है। पैसे नहीं देने पर जानबूझकर कार्य को लंबित रखा जा रहा है, जिससे वह और उनका परिवार मानसिक रूप से काफी परेशान हैं।

जनसुनवाई में भी नहीं मिली राहत 

श्रीमती सरिता कनौजिया ने बताया कि वह पूर्व में भी जनसुनवाई में आवेदन प्रस्तुत कर चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लगातार चक्कर लगाने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। संलग्न दस्तावेज भी दिए। शिकायत के साथ उन्होंने कई दस्तावेज भी प्रस्तुत किए हैं, जिनमें: सीमांकन आवेदन की रसीद (छायाप्रति) तहसीलदार द्वारा गठित टीम का आदेश पत्र। पटवारी द्वारा जारी सीमांकन सूचना पत्र। जनसुनवाई में दिए गए आवेदन की प्रति प्रशासन से की ये मांग। पीड़िता ने कलेक्टर से मांग की है कि: उनकी भूमि का जल्द सीमांकन कराया जाए। दोषी राजस्व निरीक्षक और पटवारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो रिश्वत मांगने के मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। प्रशासन पर उठे सवाल इस मामले ने एक बार फिर राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सीधे तौर पर भ्रष्टाचार का मामला बनता है और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है। निष्कर्ष: एक ओर सरकार पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था की बात करती है, वहीं ऐसे मामले जमीनी हकीकत को उजागर करते हैं। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस शिकायत पर कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है और पीड़ित महिला को कब तक न्याय मिलता है।

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