आयुष्मान योजना में बड़ा खेल! 54 करोड़ का भुगतान, फिर भी इलाज का हिसाब गायब स्वास्थ्य विभाग पर उठे गंभीर सवाल
Junaid Khan - शहडोल। आयुष्मान भारत योजना, जिसे गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवनरेखा माना जाता है, अब शहडोल जिले में गंभीर अनियमितताओं के आरोपों में घिरती नजर आ रही है। मामला तब और चौंकाने वाला हो गया जब जानकारी सामने आई कि करीब 54 करोड़ रुपये का भुगतान हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद मरीजों और उनके इलाज से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड स्वास्थ्य विभाग के पास उपलब्ध नहीं है। यह स्थिति न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करती है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, आयुष्मान योजना के तहत जिले में बड़ी संख्या में मरीजों का इलाज दर्शाया गया और अस्पतालों को भारी भरकम राशि का भुगतान भी किया गया। लेकिन जब इस भुगतान और इलाज के रिकॉर्ड की जांच की गई, तो विभाग के पास समुचित दस्तावेज और स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं पाई गई। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब रिकॉर्ड ही नहीं है, तो आखिर भुगतान किस आधार पर किया गया?
अस्पतालों और विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि कई निजी और संबद्ध अस्पतालों में इलाज के नाम पर फर्जीवाड़े की आशंका जताई जा रही है। मरीजों के नाम पर बिल तो बनाए गए, लेकिन वास्तविक इलाज हुआ या नहीं इसकी पुष्टि करने वाला कोई ठोस डेटा सामने नहीं है। यही वजह है कि अब पूरा मामला संदेह के घेरे में आ गया है।
जिम्मेदारों की चुप्पी,जांच की मांग तेज
इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी अब तक स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आ रहे हैं। न तो रिकॉर्ड की कमी पर कोई ठोस सफाई दी गई है और न ही भुगतान प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने आया है। इससे आम जनता और सामाजिक संगठनों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। जिले में 54 करोड़ का भुगतान, लेकिन विभाग के पास डेटा नहीं”सूत्रों के अनुसार, यह स्थिति न केवल वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि योजना के क्रियान्वयन में गंभीर खामियां हैं। यदि समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में और बड़े घोटाले सामने आ सकते हैं।
उच्च स्तरीय जांच की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि: भुगतान किन आधारों पर किया गया। किन अस्पतालों को लाभ मिला। वास्तविक मरीजों का इलाज हुआ या नहीं और आखिर रिकॉर्ड क्यों गायब है। जनता के बीच बढ़ती चिंता। आयुष्मान योजना जैसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य कार्यक्रम में इस तरह की अनियमितता सामने आना आम जनता के भरोसे को कमजोर करता है। लोगों का कहना है कि यदि गरीबों के इलाज के नाम पर भी पारदर्शिता नहीं होगी, तो फिर इस योजना का उद्देश्य ही अधूरा रह जाएगा। अब सबसे बड़ा सवाल यही है। क्या इस 54 करोड़ के खेल का सच सामने आएगा, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?
