अधिनियम रोककर कांग्रेस ने किया देश की 70 करोड़ महिलाओं का अपमान- सांसद हिमाद्री सिंह
महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए मोदी सरकार कृत संकल्पित- विधायक मनीषा सिंह
Junaid Khan - शहडोल। नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ संशोधन प्रस्ताव के संसद में पारित नहीं होने के विरोध में भारतीय जनता पार्टी द्वारा जिला शहडोल द्वारा बुधवार को शहडोल संभागीय मुख्यालय सर्किट हाउस में प्रेस वार्ता आयोजित की गई। प्रेस वार्ता में मुख्य वक्ता के रूप में शहडोल संसद श्रीमती हिमाद्री सिंह व भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष विधायक श्रीमती मनीषा सिंह एवं भाजपा जिला अध्यक्ष श्रीमती अमिता चपरा ने संयुक्त रूप से मीडिया को संबोधित किया। पत्रकार वार्ता का सफल संचालन भाजपा जिला मीडिया प्रभारी विनय केवट ने किया एवं आभार भाजपा जिला अध्यक्ष अमिता चपरा द्वारा किया गया। सांसद श्रीमती हिमाद्री सिंह ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए बताया कि हाल ही में लोकसभा में जो घटनाक्रम हुआ, वह केवल एक संसदीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी के अधिकारों से जुड़ा एक अत्यंत गंभीर विषय है।महिला विरोधी गठबंधन (Anti Women Alliance) ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को प्रभावी बनाने वाले 131वें संविधान संशोधन विधेयक को रोककर अपनी वास्तविक मानसिकता उजागर कर दी है। एंटी वूमन एलाएंस की सच्चाई देश के सामने आ चुकी है। कांग्रेस, डीएमके और उनके सहयोगियों के इस महिला-विरोधी गठबंधन ने न केवल एक विधेयक को रोका, बल्कि करोड़ों महिलाओं के अधिकारों और भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। और विडंबना देखिए-इस पर विपक्ष जश्न मनाता रहा। विपक्ष का जश्न, हर महिला का अपमान है। कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी, समाजवादी पार्टी और पूरे इंडि गठबंधन ने एक ऐतिहासिक अवसर को बाधित किया। महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की दिशा में यह एक निर्णायक कदम था, जिसे राजनीतिक स्वार्थों के कारण रोक दिया गया। यह लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी को टालने का स्पष्ट उदाहरण है। भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष विधायक श्रीमती मनीषा सिंह ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि विपक्ष की मानसिकता का इतिहास गवाह है राहुल गांधी और उनके (Anti Women Alliance) ने एक बार फिर दिखा दिया कि उनके लिए महिला सशक्तिकरण केवल चुनावी नारा है, वास्तविक प्रतिबद्धता नहीं। कांग्रेस का इतिहास महिलाओं के अधिकारों का विरोध करने का रहा है। शाहबानो प्रकरण, तीन तलाक अनुच्छेद 370 से प्रभावित कश्मीरी महिलाओं के अधिकार का विरोध किया। हर महिला-हितैषी कदम पर कांग्रेस ने विरोध का रास्ता चुना है। कांग्रेस ने महिलाओं के राजनीतिक अधिकारों पर 98 वर्षों का अहसान जताया, लेकिन संसद में उनकी आकांक्षाओं को कुचलते हुए इठलाई, मुस्कुराई, मेज थपथपाई और जश्न मनाया। कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने 33 प्रतिशत आरक्षण मांग रही महिलाओं को वंचित रखने पर उत्सव मनाया। यह हर उस महिला का अपमान है, जो वर्षों से अपने अधिकार का इंतजार कर रही है। भारत के संविधान के अनुसार, लोकसभा और विधानसभाओं का पुनर्गठन जनगणना के बाद परिसीमन आयोग द्वारा किया जाता है। 2001 की जनगणना के बाद श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार में यह निर्णय लिया गया कि 2026 के बाद पहली जनगणना तक परिसीमन स्थगित रहेगा, ताकि दक्षिणी राज्यों को संभावित नुकसान से बचाया जा सके। इसके बावजूद विपक्ष भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहा है। भाजपा जिला अध्यक्ष श्रीमती अमिता चपरा ने विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस को देश की संवैधानिक व्यवस्थाओं, संसद और महिलाओं किसी पर भी विश्वास नहीं है। प्रियंका गांधी वाड्र द्वारा महिलाओं के लिए इस्तेमाल जैसी भाषा का उपयोग करना भारत की सांस्कृतिक भावना के विरुद्ध है। जिस देश में नारी को दुर्गा, काली, सरस्वती और लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है, वहां ऐसी सोच अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। क्षेत्रीय राजनीति पर सवाल,डीएमके के नेता जानबूझकर तमिलनाडु की महिलाओं को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित करने का प्रयास कर रहे हैं। यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी को रोकने की सोची-समझी रणनीति प्रतीत होती है। पत्रकारों को संबोधित करते हुए श्रीमती चपरा कहां की भाजपा की प्रतिबद्धता प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को ‘शक्ति मानकर उन्हें सशक्त किया गया है। महिलाएं यह अवश्य याद रखेंगी कि 33 प्रतिशत आरक्षण का मार्ग भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने प्रशस्त किया जबकि कांग्रेस ने दशकों तक केवल वादे किए भाजपा ने केवल कहा नहीं, बल्कि करके भी दिखाया है,तीन तलाक से मुक्ति,शौचालय, बैंक खाते और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने स्पष्ट किया है कि परिसीमन से किसी भी राज्य के साथ अन्याय नहीं होगा और संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा। देश की 70 करोड़ महिलाएं इस घटनाक्रम को देख रही हैं, समझ रही हैं और इसे याद रखेंगी। विपक्ष को यह आक्रोश हर चुनाव, हर स्तर और हर स्थान पर झेलना पड़ेगा। यह मुद्दा अब केवल संसद तक सीमित नहीं रहेगा। यह जन-जन का मुद्दा बनेगा। कई बार जो विजय दिखाई देती है, वह वास्तव में अहंकार से उपजी एक बड़ी पराजय होती है। भारतीय जनता पार्टी महिला सशक्तिकरण के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह केवल कहने तक सीमित नहीं, बल्कि करके भी दिखाया गया है। देश की नारी शक्ति अब मूकदर्शक नहीं, निर्णायक शक्ति है, और वही देश का भविष्य तय करेगी।
