टाइम ऑफ डे टैरिफ से लाखों की बचत,50 हजार से अधिक उपभोक्ता जुड़े स्मार्ट सिस्टम से पारदर्शिता बढ़ी, भरोसा मजबूत
Junaid Khan - शहडोल। तकनीक जब जनहित से जुड़ती है, तो बदलाव की इबारत लिखी जाती है। जिले में बिजली क्षेत्र में एक बड़ा डिजिटल चमत्कार देखने को मिल रहा है। मेटे काले कंपनी द्वारा संचालित स्मार्ट मीटरिंग परियोजना ने जिले में बिजली खपत और बिलिंग की पूरी तस्वीर बदल दी है। अब उपभोक्ताओं को न केवल सटीक बिल मिल रहे हैं, बल्कि सब्सिडी और इंसेंटिव का सीधा लाभ भी उनकी जेब तक पहुंच रहा है।
स्मार्ट मीटरिंग से उपभोक्ताओं की जेब में लोट रही मुस्कान साफ नजर आ रही है। पहले जहां अनुमानित बिलिंग और गड़बड़ियों की शिकायतें आम थीं, वहीं अब डिजिटल व्यवस्था ने इन समस्याओं पर पूरी तरह लगाम लगा दी है। उपभोक्ताओं को अब अपनी बिजली खपत की रियल-टाइम जानकारी मिल रही है, जिससे वे अपने उपयोग को बेहतर तरीके से नियंत्रित कर पा रहे हैं।
बढ़ी सोलर पावर और इंसेंटिव की पहुंच
स्मार्ट मीटरिंग के सटीक आंकड़ों ने शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की राह आसान कर दी है। जिले के लगभग 22,150 उपभोक्ता हर महीने अटल गृह ज्योति योजना के तहत बिजली सब्सिडी का सीधा लाभ पा रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि मार्च माह की बिलिंग में 11,264 उपभोक्ताओं को टाइम ऑफ डे टैरिफ का लाभ मिला। ऑफ-पीक आवर्स (कम लोड वाले समय) में बिजली इस्तेमाल करने पर उपभोक्ताओं ने कुल 6.34 लाख रुपये की भारी बचत (इंसेंटिव) की है। यह सुविधा पुराने मीटरों में संभव नहीं थी। लक्ष्य से आगे निकला शहडोल शहर शहडोल शहर ने डिजिटल सशक्तिकरण में कीर्तिमान स्थापित किया है। यहां स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य 100.17 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। शहर के 32,594 के लक्ष्य के मुकाबले 32,650 मीटर स्थापित किए जा चुके हैं। वहीं बुढ़ार में 10,898 और ब्यौहारी में 6,553 उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर की रोशनी पहुंच चुकी है। प्रोग्रेस रिपोर्ट के मुताबिक 1 अप्रैल 2026 तक जिले के 50,101 घरेलू उपभोक्ताओं और 347 ट्रांसफार्मरों को इस स्मार्ट प्रणाली से लैस किया जा चुका है। पारदर्शिता से बढ़ा भरोसा अब उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत की जानकारी रियल-टाइम में मिल रही है। इससे न केवल बिलिंग की विसंगतियां खत्म हुई हैं, बल्कि लोग अपनी खपत के पैटर्न को समझकर फिजूलखर्ची भी रोक रहे हैं। औद्योगिक क्षेत्रों के लिए यह तकनीक लागत कम करने में क्रांतिकारी साबित हो रही है। डिजिटल तकनीक के इस विस्तार ने बिजली व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बना दिया है। अब न केवल उपभोक्ता बल्कि प्रशासन भी हर यूनिट की निगरानी कर पा रहा है, जिससे चोरी और अनियमितताओं पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव हो रहा है। उपभोक्ता ही असली पावर शहडोल में स्मार्ट मीटरिंग का यह पहला चरण न केवल तकनीकी सुधार है, बल्कि यह पारदर्शिता और भरोसे का एक नया युग है, जहां उपभोक्ता ही असली पावर बनकर उभर रहा है। आने वाले समय में इस पहल से ऊर्जा बचत, पर्यावरण संरक्षण और बेहतर बिजली प्रबंधन को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
