NH-43 पर ‘रीवा होटल’ का कब्जा: हाईवे बना पार्किंग और अड्डा,प्रशासन मौन,हादसों को दे रहा खुला न्योता
Junaid Khan - शहडोल। जिले से गुजरने वाला नेशनल हाईवे-43, जो कि यातायात की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है, इन दिनों अवैध अतिक्रमण और प्रशासनिक उदासीनता के कारण गंभीर समस्या का केंद्र बनता जा रहा है। हाईवे के किनारे स्थित तथाकथित रीवा होटल द्वारा वर्षों से सरकारी भूमि पर कब्जा कर खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं,लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। बताया जा रहा है कि होटल संचालक ने सड़क से लगी सरकारी जमीन पर टीन शेड डालकर स्थायी रूप से टेबल-कुर्सियां जमा रखी हैं और 24 घंटे व्यवसाय संचालित कर रहा है। जबकि नियमों के अनुसार होटल के अंदर ही भोजन की व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन यहां हाईवे की जमीन को ही भोजन स्थल बना दिया गया है। हाईवे पर खड़ी गाड़ियां,हर दिन जाम और हादसे का खतरा स्थिति यह है कि होटल में आने वाले ग्राहक अपनी चार पहिया, दो पहिया और भारी वाहन सीधे हाईवे पर खड़े कर देते हैं। इससे डबल लेन सड़क सिंगल लेन में तब्दील हो जाती है और आए दिन जाम की स्थिति बनती है। कई बार दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद कोई स्थायी कार्रवाई नहीं हुई।
नशे और मारपीट का अड्डा बना होटल?
स्थानीय लोगों के अनुसार, होटल परिसर और उसके बाहर का क्षेत्र नशाखोरी और असामाजिक गतिविधियों का अड्डा बन चुका है। आए दिन शराब के नशे में विवाद, गाली-गलौज और मारपीट की घटनाएं सामने आती हैं। कई बार थाने में शिकायत भी दर्ज कराई गई, लेकिन हर बार मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि कलेक्टर, एसडीएम, नगर पालिका और यातायात पुलिस के अधिकारी रोजाना इस मार्ग से गुजरते हैं, इसके बावजूद अवैध अतिक्रमण पर कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं होती? स्थानीय लोगों का आरोप है कि हर बार कार्रवाई की सूचना पहले ही होटल संचालक तक पहुंच जाती है और कथित लेन-देन के बाद मामला रफा-दफा कर दिया जाता है?
जनता की मांग बुलडोजर कार्रवाई हो
स्थानीय नागरिकों और राहगीरों ने प्रशासन से मांग की है कि इस अवैध अतिक्रमण को तत्काल हटाया जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि जब तक बुलडोजर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसे अतिक्रमणकारी और मनमानी करने वालों पर लगाम नहीं लगेगी। निष्कर्ष-NH-43 जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मार्ग पर इस प्रकार का अतिक्रमण न सिर्फ कानून का उल्लंघन है, बल्कि आम जनता की जान के साथ खिलवाड़ भी है। यदि समय रहते प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई नहीं की, तो कोई बड़ा हादसा होने से इंकार नहीं किया जा सकता।
अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी कब जागते हैं और क्या वास्तव में अतिक्रमण हटाकर हाईवे को सुरक्षित बनाया जाता है या फिर सब कुछ यूं ही चलता रहेगा।
