केंद्रीय निरीक्षण टीम की सख्ती से खदान प्रबंधन में हड़कंप, सुरक्षा और श्रमिक मुद्दों पर कड़े सवाल-जवाब

सोहागपुर एरिया के रामपुर बटूरा ओपन कास्ट प्रोजेक्ट का गहन निरीक्षण, श्रमिकों से सीधे संवाद कर जानी जमीनी हकीकत


Junaid Khan - शहडोल। केंद्रीय निरीक्षण दल ने गुरुवार को सोहागपुर एरिया स्थित रामपुर बटूरा ओपन कास्ट प्रोजेक्ट का औचक निरीक्षण कर खदान प्रबंधन और अधिकारियों को सख्त संदेश दिया। निरीक्षण के दौरान टीम ने सुरक्षा व्यवस्थाओं, उत्पादन प्रक्रिया और श्रमिकों की समस्याओं पर विशेष ध्यान देते हुए अधिकारियों से तीखे सवाल-जवाब किए। खबर न्यूज़ ब्यूरो के अनुसार, इस निरीक्षण में राष्ट्रीय स्तर के श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों और एसईसीएल के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में पूरे प्रोजेक्ट की व्यवस्थाओं की गहन पड़ताल की गई। टीम ने खदान क्षेत्र में पहुंचकर सुरक्षा इंतजाम, मशीनों की स्थिति और कार्य प्रणाली का बारीकी से निरीक्षण किया। कई स्थानों पर अधिकारियों से जवाब-तलब भी किया गया, जिससे प्रबंधन में हलचल साफ नजर आई। निरीक्षण के दौरान सुरक्षा, उत्पादन और श्रमिकों से जुड़ी समस्याओं को लेकर टीम का रुख काफी सख्त दिखाई दिया। केंद्रीय टीम के अचानक पहुंचने से खदान प्रबंधन में हड़कंप की स्थिति बन गई। टीम ने बिना पूर्व सूचना के सीधे खदान क्षेत्र में पहुंचकर वास्तविक स्थिति का जायजा लिया, जिससे व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत सामने आ सकी। निरीक्षण दल में एटक, एचएमएस, इंटक और बीएमएस जैसे राष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि शामिल रहे। टीम का सबसे अहम पहलू रहा श्रमिकों से सीधा संवाद। अधिकारियों के दायरे से बाहर निकलकर टीम ने मजदूरों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास किया। श्रमिकों ने खुलकर सुरक्षा उपकरणों की कमी, कार्यस्थल की कठिनाइयों और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी परेशानियों को सामने रखा। मजदूरों की बातों को गंभीरता से लेते हुए टीम ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा व्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निरीक्षण के दौरान टीम ने यह भी संकेत दिए कि यदि खामियों में सुधार नहीं किया गया तो जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के औचक निरीक्षण से न केवल खदानों में कार्यरत श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है, बल्कि उत्पादन प्रणाली में भी पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है। इस निरीक्षण के बाद प्रबंधन पर व्यवस्थाओं को सुधारने का दबाव साफ तौर पर देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, निरीक्षण रिपोर्ट तैयार कर उच्च स्तर पर भेजी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल केंद्रीय टीम के इस सख्त रुख से यह स्पष्ट हो गया है कि श्रमिकों की सुरक्षा और अधिकारों के मामले में किसी भी तरह की ढिलाई अब स्वीकार नहीं की जाएगी।

Previous Post Next Post