धनपुरी नगर पालिका में ‘भ्रष्टाचार का खेल’! पार्षदों का सीधा हमला,अध्यक्ष और परिजनों पर टेंडर से निर्माण तक गंभीर आरोप

धनपुरी नगर पालिका में ‘भ्रष्टाचार का खेल’! पार्षदों का सीधा हमला,अध्यक्ष और परिजनों पर टेंडर से निर्माण तक गंभीर आरोप


Junaid Khan - शहडोल। धनपुरी धनपुरी नगर पालिका परिषद अब खुलकर आरोपों के घेरे में आ गई है। परिषद के कई पार्षदों ने एकजुट होकर संभागीय कमिश्नर और कलेक्टर शहडोल को विस्तृत शिकायत सौंपते हुए नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती रविंदर कौर छाबड़ा और उनके परिजनों पर नियम-कायदों को ताक पर रखकर मनमाने ढंग से काम कराने के तीखे और गंभीर आरोप लगाए हैं। इस शिकायत के सामने आते ही स्थानीय प्रशासन और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। शिकायतकर्ता पार्षद सकन्द सोनी, आनंद कचेर,भोला पनिका, प्रवीण बड़ोलिया सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने सीधे शब्दों में आरोप लगाया है कि नगर पालिका में अब “लोकतंत्र नहीं, बल्कि दबाव और संरक्षण की राजनीति” चल रही है। उनका कहना है कि परिषद की बैठकों में सवाल उठाना “गुनाह” बन चुका है। जो भी पार्षद पारदर्शिता की मांग करता है, उसे धमकाया जाता है, दबाव बनाया जाता है और कार्यवाही की चेतावनी देकर चुप कराने की कोशिश की जाती है। शिकायत में यह भी उल्लेख है कि पहले भी एक पार्षद को मुद्दा उठाने की “सजा” भुगतनी पड़ी।

टेंडर प्रक्रिया पर बड़ा सवाल: खेल पहले से तय!

पार्षदों ने आरोप लगाया कि नगर पालिका की टेंडर प्रक्रिया केवल दिखावा बनकर रह गई है। असल खेल अंदरखाने तय होता है और चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों की खुलेआम अनदेखी की जाती है। सोलर पैनल, हाईराइज बिल्डिंग जैसे बड़े कार्यों में कथित गड़बड़ियों को लेकर पार्षदों ने सीधे जांच की मांग की है।

कम बोली वालों को बाहर, महंगे को ठेका,खुलेआम नुकसान?

शिकायत में कहा गया है कि जो ठेकेदार कम दर पर काम करने को तैयार होते हैं, उन्हें तकनीकी खामियों का हवाला देकर बाहर कर दिया जाता है, जबकि अधिक दर वाले ठेकेदारों को काम सौंप दिया जाता है। पार्षदों का दावा है कि यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सीधे तौर पर नगर पालिका को आर्थिक नुकसान पहुंचाने का मामला है।

खरीदी में गड़बड़ी’निर्माण में लापरवाही

नगर पालिका में सामग्री खरीदी को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि बिना उचित प्रक्रिया के ऊंची दरों पर सामग्री खरीदी जाती है, जबकि मौके पर उसकी आपूर्ति कम की जाती है। वहीं बिना ठोस योजना के बहुमंजिला निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं, जिससे भवनों की गुणवत्ता और सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।

जनहित योजनाओं में भी कट का आरोप

पार्षदों ने यह भी आरोप लगाया है कि जनहित से जुड़ी योजनाओं में भी “कट और कमीशन” का खेल चल रहा है। जरूरत की सामग्री कम देकर बिल ज्यादा बनाया जाता है, जिससे सीधा नुकसान आम जनता को उठाना पड़ रहा है। इसके अलावा परिषद के कार्यों में बाहरी व्यक्तियों की दखलंदाजी को लेकर भी गंभीर आपत्ति जताई गई है।

सड़क निर्माण में भी भ्रष्टाचार की गूंज

पिछले वर्षों में हुए सड़क निर्माण कार्यों पर भी सवाल उठाते हुए पार्षदों ने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया। कई सड़कों की स्थिति कम समय में ही खराब होने की बात सामने आई है।

कार्यवाही नहीं हुई तो सड़क पर उतरेंगे

पार्षदों ने प्रशासन को साफ चेतावनी दी है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच नहीं कराई गई, तो वे जनहित में उग्र आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि अब चुप्पी नहीं, जवाब चाहिए। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतने गंभीर और संगठित आरोपों के बाद प्रशासन क्या कार्यवाही करता है। क्या जांच होगी या मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दब जाएगा? फिलहाल, धनपुरी नगर पालिका का यह मामला जिले की राजनीति में बड़ा मुद्दा बनता नजर आ रहा है।

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