अस्पताल प्रबंधन की नाक के नीचे 'डॉक्टर' बनकर उगाही

स्वास्थ्य व्यवस्था के सुरक्षा चक्र को ठग ने भेदा, अब जागे अफसर


Junaid Khan - शहडोल। जिला चिकित्सालय में इलाज की उम्मीद लेकर आने वाले गरीब मरीजों की लाचारी का फायदा उठाने वाले एक शातिर ठग का पर्दाफाश हुआ है। खुद को डॉक्टर का करीबी बताकर और सफेदपोशों की आड़ में अवैध वसूली करने वाले इस युवक ने न केवल मरीजों की जेब काटी, बल्कि पूरे जिला प्रशासन और अस्पताल सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। अस्पताल प्रबंधन ने जब पानी सिर से ऊपर जाते देखा, तब कहीं जाकर सीसीटीवी की मदद से आरोपी को दबोचकर पुलिस के हवाले किया है।

इलाज के नाम पर सौदेबाजी,प्रशासन को खुली चुनौती

सरकारी अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था कितनी खोखली है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक बाहरी व्यक्ति अस्पताल परिसर के भीतर घुसकर खुद को डॉक्टर का परिचित बताता है और सरेआम पैसों की मांग करता है। हैरान करने वाली बात यह है कि यह खेल एक दिन नहीं, बल्कि हफ्तों से चल रहा था। यह उन अधिकारियों के चेहरे पर करारा तमाचा है जो हर दिन अस्पताल के निरीक्षण और सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करते हैं। क्या अस्पताल के गलियारे अपराधियों की शरणस्थली बन गए हैं?

25 अप्रैल की उस वारदात ने उड़ाई नींद

मामले का खुलासा तब हुआ जब ग्राम दरदुआ निवासी एक मरीज के परिजन ने हिम्मत दिखाते हुए शिकायत दर्ज कराई। बताया गया कि 25 अप्रैल 2026 को एक अज्ञात युवक ने इलाज में मदद के नाम पर उनसे 3 हजार रुपये की नगद वसूली की और चंपत हो गया। ठगी का शिकार हुए गरीब परिजन ने जब अस्पताल प्रबंधन को अपनी आपबीती सुनाई, तब जाकर विभाग की नींद टूटी। सवाल यह उठता है कि क्या सीसीटीवी कैमरों का इस्तेमाल सिर्फ वारदात होने के बाद ही किया जाएगा? क्या निगरानी के लिए तैनात कर्मचारी ड्यूटी पर सोते रहते हैं?

सीसीटीवी की फुटेज और आरोपी की पहचान

शिकायत के बाद हरकत में आए प्रबंधन ने जब सीसीटीवी खंगाला, तो एक संदिग्ध युवक की गतिविधियां उजागर हुईं। पुलिस को दी गई जानकारी के अनुसार, आरोपी की पहचान इन्द्र पाल गड़ारी, निवासी हर्रा टोला मिठौरी के रूप में हुई है। आरोपी इतना बेखौफ था कि एक बार ठगी करने के बाद वह दोबारा शुक्रवार को अस्पताल परिसर में शिकार की तलाश में घूम रहा था। इसी दौरान अस्पताल प्रबंधन ने उसे रंगे हाथ धर दबोचा और कोतवाली पुलिस के हवाले कर दिया।

सिविल सर्जन ने मांगी कठोर कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन ने कोतवाली प्रभारी को पत्र लिखकर आरोपी के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि इस तरह की घटनाओं से अस्पताल की छवि धूमिल होती है। लेकिन यहाँ असली सवाल छवि का नहीं, बल्कि सुरक्षा का है। अगर कोई भी ऐरा-गैरा डॉक्टर बनकर मरीजों तक पहुँच सकता है, तो कल को किसी गंभीर अनहोनी की जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या प्रशासन किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है?

अवैध उगाही के सिंडिकेट पर प्रहार की जरूरत

यह केवल एक इन्द्र पाल गड़ारी का मामला नहीं है। सूत्रों की मानें तो जिला अस्पताल के भीतर और बाहर ऐसे कई गिरोह सक्रिय हैं जो जांच, बेड और दवाइयों के नाम पर ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले सीधे-सादे लोगों को लूट रहे हैं। इस मामले में पुलिस को केवल एक गिरफ्तारी तक नहीं रुकना चाहिए, बल्कि उन सफेदपोशों की भी पहचान करनी चाहिए जिनकी शह पर ऐसे 'फर्जी डॉक्टर' अस्पताल में फल-फूल रहे हैं।

भविष्य की सुरक्षा पर सवालिया निशान

अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस से गुहार लगाई है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। लेकिन क्या केवल पत्र लिखने से व्यवस्था सुधर जाएगी? जब तक अस्पताल के एंट्री पॉइंट्स पर सख्त चेकिंग, कर्मचारियों का आई-कार्ड अनिवार्य और सुरक्षा गार्डों की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक मरीज ऐसे ही लुटेरों का शिकार बनते रहेंगे। प्रशासन को अब कागजों से बाहर निकलकर धरातल पर कड़े फैसले लेने होंगे, ताकि सरकारी अस्पताल 'इलाज का मंदिर' बना रहे, 'लूट का अड्डा' नहीं।

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