बिना डायवर्शन धड़ल्ले से कट रही कॉलोनियां,शासन को लाखों के राजस्व का चूना,क्या रसूखदारों के आगे नतमस्तक है प्रशासन?
Junaid Khan - शहडोल। शहर से सटे मेडिकल कॉलेज के ठीक पीछे इन दिनों जमीनों की अवैध खरीद-फरोख्त और नियम-विरुद्ध प्लॉटिंग का एक बहुत बड़ा 'सिंडिकेट' सक्रिय है। शहर के विस्तार की आड़ में भू-माफियाओं ने यहां की उपजाऊ कृषि भूमि को अपना नया शिकार बनाया है। बिना किसी कानूनी अनुमति और बिना डायवर्शन (लैंड यूज चेंज) कराए, खेतों को कटर मशीनों और ट्रैक्टरों के जरिए रातों-रात छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर प्लॉट का रूप दिया जा रहा है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि नाक के नीचे चल रहे इस खेल से बेखबर जिम्मेदार राजस्व अमला गहरी नींद में सोया हुआ है, जिससे स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
सरकारी खजाने को चपत, रसूखदारों की जेबें गर्म
जानकारों और भूमि विशेषज्ञों के अनुसार, इस पूरे अवैध कारोबार के कारण शासन को लाखों-करोड़ों रुपए के राजस्व (स्टांप ड्यूटी और डायवर्शन टैक्स) का सीधा नुकसान हो रहा है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNCP) और जिला प्रशासन के कड़े नियमों को ठेंगा दिखाते हुए, बिना किसी ले-आउट पास कराए खेतों के बीचो-बीच कच्ची सड़कें तान दी गई हैं। सूत्रों का दावा है कि इस खेल के पीछे कुछ सफेदपोशों और स्थानीय रसूखदारों का हाथ है, जिनके दबाव या साठगांठ के चलते धड़ल्ले से प्लॉट बेचे जा रहे हैं और जिम्मेदार अधिकारी केवल फाइलों में जांच का बहाना बना रहे हैं।
आम जनता के जीवनभर की कमाई पर मंडराया संकट
इस अवैध प्लॉटिंग के जाल में फंसकर सस्ते के चक्कर में प्लॉट खरीदने वाले आम नागरिक भविष्य में बहुत बड़ी कानूनी मुसीबत में पड़ सकते हैं। बिना डायवर्शन और बिना वैध अनुमति के बेचे जा रहे इन प्लॉटों पर न तो भविष्य में कोई वैध निर्माण हो पाएगा और ना ही इन्हें बैंक लोन मिल सकेगा। अवैध कॉलोनियों में बुनियादी सुविधाएं जैसे बिजली, पानी, सड़क और ड्रेनेज सिस्टम कभी नहीं मिल पाता, जिससे आने वाले समय में यहां सिर्फ और सिर्फ विवाद और धोखाधड़ी के मामले ही सामने आएंगे। भू-माफिया आज मोटी रकम ऐंठकर रफूचक्कर हो रहे हैं, लेकिन इसका खामियाजा कल उन मासूम खरीदारों को भुगतना पड़ेगा जो अपने जीवनभर की गाढ़ी कमाई इसमें झोंक रहे हैं।
ग्रामीणों में भारी आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी
इस अवैध धंधे से न केवल सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं, बल्कि आसपास के ग्रामीण इलाकों का माहौल भी बिगड़ने लगा है। स्थानीय ग्रामीणों और किसानों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी कृषि भूमि के स्वरूप को जबरन बिगाड़ा जा रहा है और प्राकृतिक रास्तों को अवरुद्ध किया जा रहा है। परेशान ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने और अवैध प्लॉटिंग करने वालों पर तत्काल सख्त कानूनी कार्रवाई (F.I.R.) दर्ज करने की मांग की है। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस अवैध निर्माण पर पीला पंजा नहीं चला, तो वे उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे।
इन तीखे सवालों के जवाब दे प्रशासन
जब खुलेआम कृषि भूमि पर सड़कें बनाई जा रही हैं,तो हल्का पटवारी और राजस्व अमला मौन क्यों है?
बिना टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की अनुमति के यह अवैध ले-आउट कैसे तैयार हो गया?
क्या प्रशासन किसी बड़े रसूखदार के दबाव में आकर कार्रवाई करने से बच रहा है?
जनता की गाढ़ी कमाई लूटने वाले इन अवैध कॉलोनाइज़र्स पर एफ़आईआर कब होगी?
