महाघोटाला: ग्रीन वैली कॉलोनी में सरकारी जमीन पर बैंक ने लुटाया जनता का पैसा,हाईकोर्ट के आदेश को भी ठेंगा दिखाया

महाघोटाला: ग्रीन वैली कॉलोनी में सरकारी जमीन पर बैंक ने लुटाया जनता का पैसा,हाईकोर्ट के आदेश को भी ठेंगा दिखाया



Junaid Khan - शहडोल। संभागीय मुख्यालय से सटे सोहागपुर तहसील के ग्राम फतेहपुर में स्थित 'ग्रीन वैली' कॉलोनी इस वक्त भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरी है। नियम-कायदों को ताक पर रखकर सरकारी नाले और विवादित भूमि पर बसाई गई इस कॉलोनी में न केवल हाईकोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ाई गईं, बल्कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के जिम्मेदार अधिकारियों ने कॉलोनाइजर के साथ मिलकर करोड़ों के 'अवैध' होम लोन बांट दिए। अब इस पूरे सिंडिकेट के खिलाफ अधिवक्ता सुमित दुबे ने मोर्चा खोलते हुए एजीएम (AGM) सेंट्रल बैंक, भोपाल से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

अखबार की सुर्खी का असर: शिकायतों के बाद तंत्र में खलबली

हाल ही में मीडिया में आई खबरों और शिकायतों के बाद अब प्रशासन और बैंकिंग हलकों में हड़कंप मचा हुआ है। यह महज एक जमीन का विवाद नहीं, बल्कि एक सुनियोजित वित्तीय अपराध की ओर इशारा कर रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब यह मांग उठने लगी है कि उन अधिकारियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज हो, जिन्होंने बंद आंखों से विवादित जमीनों पर लोन की फाइलें पास कीं।

हाईकोर्ट का 'यथास्थिति' आदेश दरकिनार, कॉलोनाइजर की मनमानी

शिकायत के अनुसार, ग्रीन वैली कॉलोनी का बड़ा हिस्सा शासकीय नाले और सरकारी जमीन पर कब्जा करके विकसित किया गया है। गौर करने वाली बात यह है कि वर्ष 2021 में माननीय उच्च न्यायालय, जबलपुर ने इस भूमि पर 'स्टेटस को' (यथास्थिति) बनाए रखने का स्पष्ट आदेश दिया था। कानूनन, इस आदेश के बाद न तो वहां निर्माण हो सकता था और न ही खरीद-फरोख्त। लेकिन रसूखदार कॉलोनाइजर मनोज जयसिंघानी उर्फ शंभू ने न्यायालय के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए न केवल प्लॉट बेचे, बल्कि आलीशान मकान भी खड़े करवा दिए।

बैंक अधिकारियों और शाखा प्रबंधक की भूमिका संदिग्ध

किसी भी बैंक से होम लोन लेने के लिए 'लीगल सर्च रिपोर्ट' और 'वैधानिक परीक्षण' अनिवार्य होता है। सवाल यह उठता है कि जब जमीन सरकारी नाले पर थी और मामला हाईकोर्ट में लंबित था, तो सेंट्रल बैंक के शाखा प्रबंधक और वैल्यूअर्स को यह दिखाई क्यों नहीं दिया? आरोप है कि बैंक अधिकारियों और कॉलोनाइजर के बीच गहरी सांठगांठ है, जिसके चलते बिना ठोस दस्तावेजों के धड़ल्ले से लोन स्वीकृत किए गए। यह सीधे तौर पर बैंकिंग नियमों का उल्लंघन और वित्तीय अनियमितता का मामला है।

सरकारी नाले पर कब्जा: प्रकृति और कानून दोनों से खिलवाड़ 

ग्रीन वैली कॉलोनी में जिस तरह से सरकारी नाले का अस्तित्व मिटाया गया है, वह आने वाले समय में बड़े जलभराव और पर्यावरणीय खतरे का संकेत है। राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नाले की भूमि पर निर्माण करना संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। अधिवक्ता सुमित दुबे ने अपनी शिकायत में स्पष्ट किया है कि यदि इस पर तत्काल रोक नहीं लगी, तो भविष्य में आम जनता की गाढ़ी कमाई डूबना तय है।

भ्रष्ट सिंडिकेट को खुली चुनौती

यह खबर उन सफेदपोश चेहरों को बेनकाब करती है जो खुद को कानून से ऊपर समझते हैं। सरकारी जमीन को अपनी जागीर समझने वाले कॉलोनाइजर और जनता के पैसे पर डाका डालने वाले बैंक अधिकारियों के इस गठजोड़ ने शहडोल के रियल एस्टेट सेक्टर को कलंकित किया है। अब गेंद एजीएम सेंट्रल बैंक और जिला प्रशासन के पाले में है कि वे दोषियों को जेल भेजते हैं या फाइलों को दबाने का प्रयास करते हैं।

आम नागरिकों के साथ बड़ा धोखा 

लोन की आड़ में आम नागरिकों को अंधेरे में रखा गया है। कल को यदि हाईकोर्ट का फैसला डिमोलिशन (तोड़ने) के पक्ष में आता है, तो उन मासूम खरीदारों का क्या होगा जिन्होंने बैंक से कर्ज लेकर वहां आशियाना बनाया है? बैंक की एक गलती या जानबूझकर की गई लापरवाही ने दर्जनों परिवारों को कानूनी पचड़े और आर्थिक बर्बादी की कगार पर खड़ा कर दिया है।

जांच की मांग: दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की दरकार

अधिवक्ता सुमित दुबे ने भोपाल स्थित एजीएम कार्यालय को भेजे पत्र में मांग की है कि संबंधित शाखा प्रबंधक और फील्ड अधिकारियों की संपत्ति और उनके द्वारा स्वीकृत लोन की फाइलों की फॉरेंसिक जांच हो। साथ ही, मांग की गई है कि भविष्य में किसी भी विवादित या सरकारी भूमि पर ऋण की स्वीकृति तत्काल रोकी जाए।

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

 इतने बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण और लोन का खेल चलता रहा, लेकिन स्थानीय राजस्व अमला और सोहागपुर तहसील प्रशासन मौन साधे रहा। क्या प्रशासन भी इस अवैध साम्राज्य का हिस्सा है? यह सवाल अब शहर की फिजाओं में गूंज रहा है। अगर जल्द ही इस मामले में बड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो जन-आंदोलन की स्थिति बन सकती है। संपादकीय नोट: हमारा अखबार इस पूरे मामले की तह तक जाएगा। यह केवल एक खबर नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र में बैठे घुन को साफ करने की मुहिम है। संबंधित विभाग जवाब देने के लिए तैयार रहें।

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