खाकी की सरपरस्ती में 'हिट एंड रन': पुलिस अधीक्षक की चौखट पर न्याय की गुहार, गोहपारू थाने में रसूखदारों के आगे बेबस कानून
Junaid Khan - शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली और 'जनसेवा-देशभक्ति' के नारे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ एक बेबस बेटा अपने लहूलुहान पिता को इंसाफ दिलाने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है, लेकिन गोहपारू थाने के एक मुंशी की दबंगई और आरोपी से उसकी कथित नजदीकियों ने न्याय के रास्ते में दीवार खड़ी कर दी है। मामला न केवल सड़क दुर्घटना का है, बल्कि वर्दी की आड़ में चल रहे 'पर्दादारी' के उस खेल का है, जहाँ पीड़ित को डराया-धमकाया जा रहा है।
शराब के नशे में रौंदा,मुंशी ने दिखाया 'भाईचारा'
घटना बीते 25 मार्च 2006 की रात करीब 11:15 बजे की है, जब ग्राम असवारी निवासी शिव कुमार सेन के पिता भुआले प्रसाद सेन अपने घर के सामने थे। तभी वाहन क्रमांक MP18 ZA7530 के चालक ने लापरवाही और नशे की हालत में उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। इस भीषण हादसे में बुजुर्ग भुआले प्रसाद की पसलियां टूट गईं, हाथ का अंगूठा कट गया और रीढ़ की हड्डी में भी गंभीर क्रैक आया है। जब घायल का बेटा शिव कुमार आधी रात को न्याय की उम्मीद में गोहपारू थाने पहुँचा, तो वहाँ मौजूद मुंशी ज्ञान सिंह ने कानून की रक्षा करने के बजाय आरोपी के 'एजेंट' के रूप में काम करना शुरू कर दिया।
FIR के बदले 'मैनेजमेंट' की सलाह
आरोप है कि मुंशी ज्ञान सिंह ने शिकायत दर्ज करने से साफ इनकार कर दिया। मुंशी ने कानून की किताब खोलने के बजाय पीड़ित को आरोपी ब्रजभूषण (पिता हरवंश) से इलाज के पैसे लेकर मामला रफा-दफा करने का दबाव बनाया। मुंशी के कहे अनुसार आरोपी ने श्री राम हॉस्पिटल में भर्ती करवाकर 25 हजार रुपये तो दिए, लेकिन जब पीड़ित की हालत बिगड़ने लगी और मदद माँगी गई, तो आरोपी ने सारी इंसानियत ताक पर रख दी। बदतमीजी पर उतारू आरोपी ने सीधे शब्दों में कह दिया। मुंशी जी से बात कर लो।" यह वाक्य साफ दर्शाता है कि अपराधी और पुलिस के बीच सांठगांठ कितनी गहरी है।
मेरा रिश्तेदार है, जो करना है कर लो
पीड़ित शिव कुमार जब दोबारा थाने पहुँचा, तो मुंशी ज्ञान सिंह का असली चेहरा सामने आ गया। मुंशी ने न केवल केस दर्ज करने से मना किया, बल्कि पीड़ित को धमकाते हुए यहाँ तक कह दिया कि आरोपी मेरा रिश्तेदार है, शिकायत नहीं लिखी जाएगी, तुम्हें जहाँ जाना है जाओ। एक लोक सेवक द्वारा खुलेआम एक अपराधी को संरक्षण देना और पीड़ित को उसकी पहुंच की धमकी देना, जिला पुलिस प्रशासन की छवि पर कालिख पोतने जैसा है।
व्यवस्था को चुनौती: रसूख के आगे घुटने टेकता सिस्टम
यह खबर केवल एक दुर्घटना की नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था को चुनौती है जो रसूखदारों के इशारे पर नाच रही है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाए और थाने सेटलमेंट' के अड्डे बन जाएं, तो आम आदमी कहाँ जाए? मुंशी ज्ञान सिंह का यह कृत्य मध्य प्रदेश पुलिस की निष्पक्षता पर बड़ा प्रश्नचिह्न है। क्या एक मुंशी इतना ताकतवर हो गया है कि वह भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं को अपने निजी रिश्तों के लिए दरकिनार कर दे?
अस्पताल के दस्तावेज और गवाह चीख रहे सच्चाई
पीड़ित के पास मेडिकल रिपोर्ट, अस्पताल के दस्तावेज और घटनास्थल के साक्ष्य मौजूद हैं। टूटी हुई हड्डियां और दर्द से कराहते बुजुर्ग पिता की हालत इस सच्चाई की गवाही दे रही है कि अपराध हुआ है। लेकिन गोहपारू पुलिस की आंखों पर बंधी रसूख की पट्टी उन्हें यह सच देखने नहीं दे रही। मुंशी द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करना सीधे तौर पर प्रशासनिक भ्रष्टाचार का मामला बनता है।
प्रशासन की चुप्पी पर उठते सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब गेंद पुलिस अधीक्षक शहडोल के पाले में है। पीड़ित ने लिखित आवेदन देकर मुंशी ज्ञान सिंह और आरोपी वाहन चालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। क्या शहडोल पुलिस अपने विभाग के ऐसे 'दागी' कर्मियों पर नकेल कसेगी जो खाकी को बदनाम कर रहे हैं? या फिर यह मामला भी फाइलों के ढेर में दबकर रह जाएगा?
न्याय की उम्मीद में टकटकी लगाए असवारी गाँव
पूरा ग्राम असवारी और पीड़ित परिवार अब जिला प्रशासन के रुख का इंतजार कर रहा है। शिव कुमार सेन का कहना है कि वे न्याय के लिए आखिरी सांस तक लड़ेंगे। अगर थाने में सुनवाई नहीं हुई, तो वे उच्च न्यायालय तक का दरवाजा खटखटाएंगे। फिलहाल, यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है और पुलिस की कार्यशैली पर जनता का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। प्रमुख बिंदु (हाइलाइट्स): दोषी वाहन: MP18 ZA7530 (नशे में धुत चालक) पीड़ित: भुआले प्रसाद सेन (गंभीर रूप से घायल)
आरोपी मुंशी: ज्ञान सिंह (गोहपारू थाना) संरक्षण: आरोपी को 'रिश्तेदार' बताकर शिकायत दर्ज करने से इनकार। संपादकीय टिप्पणी: पत्रकारिता का धर्म है सच को सामने लाना। यह रिपोर्ट उस पीड़ित की आवाज है जिसे सिस्टम ने दबाने की कोशिश की है। हम इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग करते हैं।
