प्रशासनिक शह पर आदिवासियों की जमीन पर डाका

जयसिंहनगर के बसोहरा में खौफ के साए में 'अवैध' घाट निर्माण,अंधा कानून' बना तंत्र



Junaid Khan - शहडोल। सूत्रों की मानें तो जनपद पंचायत जयसिंहनगर के अंतर्गत इन दिनों वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं का खुला खेल चल रहा है, जिसका सबसे वीभत्स रूप ग्राम पंचायत बसोहरा में देखने को मिला है। यहाँ विकास के नाम पर विनाश का ऐसा खेल रचा जा रहा है, जो सीधे तौर पर देश के मूल निवासियों के अधिकारों पर कुठाराघात है। ग्राम पंचायत बसोहरा में बेखौफ और निरंकुश हो चुके पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा सीधे-साधे आदिवासियों के पट्टे आराजी (वैध पट्टा भूमि) पर जबरन घाट निर्माण कराया जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरी अमानवीय और गैर-कानूनी प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए आदिवासियों को डरा-धमका कर, उनके सीने पर बंदूक और रसूख की धौंस रखकर ग्राम पंचायत द्वारा निर्माण कार्य कराया जा रहा है। आदिवासियों की पुश्तैनी जमीन को हथियाने का यह खूनी खेल प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा है,लेकिन रसूखदारों के आगे पूरा तंत्र नतमस्तक नजर आ रहा है।

चौथे स्तंभ को देखकर उड़े अधिकारियों के तोते,दफ्तरों में लटका 'मौनव्रत' का ताला

अखबार में पहले प्रकाशित हुई प्राथमिक खबरों का ऐसा व्यापक असर हुआ है कि भ्रष्टाचार की नींव हिल उठी है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासनिक ढीठपन कम होने का नाम नहीं ले रहा है। जब इस महाघोटाले और तानाशाही की जमीनी हकीकत जानने के लिए सजग पत्रकारों की टीम कार्य स्थल पर पहुँची, तो वहाँ का नजारा देखकर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का भी माथा ठनक गया। पत्रकारों के कार्य स्थल पर घंटों बैठने और पूरी मुस्तैदी से डटे रहने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों का कोई जवाब नहीं मिल रहा है। फोन बंद कर लेना, कमरों से नदारद हो जाना और सवालों पर चुप्पी साध लेना यह साबित करता है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है। अधिकारियों की यह रहस्यमयी खामोशी सीधे तौर पर इस बात का सुबूत है कि इस अवैध घाट निर्माण और आदिवासियों के उत्पीड़न में ऊपर से लेकर नीचे तक मोटी रकम की बंदरबांट हुई है।

कलेक्टर साहब सुनिए

आदिवासियों की चीख और साहबों की 'सैटिंग' को अब और कितना झेलेगा शहडोल? यह खबर सीधे तौर पर शहडोल के जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' की नीति को खुली चुनौती है। एक तरफ सूबे के मुखिया मंचों से आदिवासियों के पैरों में चप्पल पहनाने और उन्हें जमीन का मालिकाना हक देने की कसमें खाते हैं, वहीं जयसिंहनगर का यह बसोहरा कांड सरकार के दावों की धज्जियां उड़ा रहा है। आदिवासियों की अपनी पट्टे की आराजी पर उनकी मर्जी के खिलाफ, डरा-धमका कर निर्माण कराना सीधे तौर पर 'क्रिमिनल ट्रेसपास' और एट्रोसिटी एक्ट का खुला उल्लंघन है। इस पूरे मामले में जनपद पंचायत के बड़े चेहरों की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता। अब देखना यह है कि इस बेबाक और जनहित की खबर के बाद क्या कुंभकर्णी नींद में सोया प्रशासन जागता है या फिर आदिवासियों की जमीन को भू-माफियाओं और भ्रष्ट पंचायत राज के हवाले कर 'सब ठीक है' का राग अलापता रहेगा? हमारे अखबार की पैनी नजर इस पूरे मामले के एक-एक भ्रष्ट किरदार पर टिकी हुई है।

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