शहंशाह-ए-खैरहा हज़रत बाबा मकबूल शाह रह.अलै. का 83वां उर्स मुबारक श्रद्धा और अकीदत के साथ सम्पन्न

उर्स में रहा कौमी एकता, प्रेम,सद्भाव और सूफियाना संस्कृति का अनुपम संगम 


Junaid Khan - शहडोल। खैराहा हज़रत बाबा मकबूल शाह रह. अलै. के 83वें उर्स मुबारक  के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन श्रद्धा,अकीदत, प्रेम, भाईचारे और कौमी एकता के अद्वितीय वातावरण में भव्यता के साथ सम्पन्न हुआ। खैरहा की पावन धरती पर आयोजित इस ऐतिहासिक आयोजन में शहडोल सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों एवं दूर-दराज़ क्षेत्रों से हजारों अकीदतमंदों ने शिरकत कर बाबा की दरगाह पर हाजिरी दी तथा अमन, चैन, खुशहाली और भाईचारे के साथ देश की तरक्की के लिए दुआएं मांगीं। उर्स के दौरान पूरा आयोजन स्थल जनसैलाब से खचाखच भरा रहा। विशेष रूप से कव्वाली की महफ़िलों में उमड़ी भारी भीड़ ने इस आयोजन की बढ़ती लोकप्रियता और जनआस्था को एक बार फिर प्रमाणित किया। समापन अवसर पर अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कव्वाल रईस अनीस साबरी एवं मशहूर कव्वाला शाहीन सबा भारती ने अपनी रूहानी, सूफियाना और कौमी एकता से ओत-प्रोत प्रस्तुतियों से पूरी फिज़ा को मोहब्बत और इंसानियत के रंग में रंग दिया। उनके कलामों ने उपस्थित जनसमूह को देर रात तक मंत्रमुग्ध और भावविभोर बनाए रखा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पुष्पराजगढ़ विधायक फुंदेलाल सिंह मार्को ने अपने उद्बोधन में कहा कि सूफी संतों की शिक्षाएं मानवता, सेवा, प्रेम और सामाजिक समरसता की अमूल्य धरोहर हैं, जो समाज को जोड़ने का कार्य करती हैं और यही हमारी संस्कृति और पहचान है। जिला न्यायाधीश हिदायत उल्ला खान ने कहा कि बुजुर्गों के आस्ताने सदैव प्रेम, करुणा, सहिष्णुता और इंसानियत के केंद्र रहे हैं और उनकी शिक्षाएं आज भी समाज को आपसी सम्मान, भाईचारे और राष्ट्रीय एकता का संदेश देती हैं।  इस ऐतिहासिक अवसर पर उर्स से विगत 75 वर्षों से निरंतर जुड़े रह कर अपनी सेवाएं और सहभागिता प्रदान करने वाले अधिवक्ता अजीत कुमार शुक्ला का जिला न्यायाधीश हिदायत उल्ला खान द्वारा अपने विशेष कलाम की प्रस्तुति से सम्मान किया गया, जिस पर उपस्थित जनसमूह ने जोरदार तालियों के साथ स्वागत करते हुए उनकी बहुत सराहना की। स्पेशल ब्लास्ट कंपनी के डायरेक्टर राजीव सिंह और जिला पंचायत सदस्य जगन्नाथ शर्मा ने कहा कि खैरहा का यह उर्स केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सांप्रदायिक सौहार्द, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का जीवंत प्रतीक है, जो नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य कर रहा है। कार्यक्रम के दौरान उर्स में 75 वर्षों की सहभागिता पूर्ण करने पर एडवोकेट अजीत शुक्ला की डायमंड जुबली में उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित भी किया गया। उर्स के सफल आयोजन में उर्स कमेटी के अध्यक्ष मोहम्मद इरशाद अहमद, उपाध्यक्ष अख्तर रज़ा, सचिव मोहम्मद इम्तियाज, सरपरस्त हाजी राशिद कादरी, हाजी अखलाक खान, शेर खान "शेरू", राजा भैया रघुनंदन सिंह, अजीत कुमार शुक्ला एडवोकेट, रोहित पांडे, कमलेश शर्मा, भूपेश शर्मा, अजय अवस्थी, नन्नू सिंह,तनवीर अहमद, शहजाद,इकबाल अहमद, मुबीन, निसार, नूर मोहम्मद सहित अनेक गणमान्य नागरिकों का विशेष योगदान एवं सहयोग रहा। कार्यक्रम के समापन पर उर्स कमेटी ने सभी अतिथियों, जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस प्रशासन,पत्रकार बंधुओं, समाजसेवियों, सहयोगकर्ताओं एवं दूर-दराज़ से पधारे अकीदतमंदों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। चादरपोशी, फातिहा, कुल शरीफ, लंगर एवं अन्य धार्मिक आयोजनों के साथ सम्पन्न हुआ यह उर्स मुबारक प्रेम, सद्भाव, कौमी एकता, आध्यात्मिक चेतना और भारतीय गंगा-जमुनी तहज़ीब की ऐसी अनुपम मिसाल बन गया, जिसकी स्मृतियां लंबे समय तक जनमानस में जीवंत रहेंगी।

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