अस्पताल परिसर में उम्मीदों की नई रसोई,जिला प्रशासन की अनूठी पहल से 'आजीविका दीदी कैफे' तैयार, अब बस उद्घाटन का इंतजार

मरीजों के तीमारदारों और स्टाफ को मिलेगी बड़ी राहत,कम लागत में गुणवत्तापूर्ण खान-पान परोसकर स्वावलंबन की नई इबारत लिखेंगी स्व-सहायता समूह की दीदियां 


Junaid Khan - शहडोल। जिला अस्पताल परिसर में स्वास्थ्य सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के साथ-साथ अब मरीजों, उनके परिजनों और अस्पताल स्टाफ की बुनियादी सहूलियत के लिए जिला प्रशासन ने एक बेहद सराहनीय और संवेदनशील कदम उठाया है। अस्पताल परिसर के भीतर ही बनकर पूरी तरह तैयार हो चुका अत्याधुनिक 'आजीविका दीदी कैफे' (कैंटीन) स्थानीय प्रशासन की दूरगामी सोच और जन-हितैषी नीतियों का जीता-जागता उदाहरण है। अब तक जिला अस्पताल आने वाले मरीजों के परिजनों और चौबीसों घंटे मुस्तैद रहने वाले चिकित्सा स्टाफ को चाय, नाश्ते या गरमा-गरम भोजन (जैसे पकौड़े, आलूबांडा और चाय) के लिए अस्पताल परिसर से बाहर भटकना पड़ता था या फिर मजबूरी में निजी होटलों पर निर्भर रहना पड़ता था। जिला प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन ने आमजन की इस गंभीर व्यावहारिक समस्या को न केवल समझा, बल्कि बेहद कम समय में इसका एक स्थाई और बेहतरीन समाधान भी तलाश लिया है। पुलिस चौकी के ठीक बगल में निर्मित यह कैफे अब पूरी तरह सज-धजकर तैयार है और सिर्फ इसका फीता कटने (औपचारिक उद्घाटन) की कतरन शेष है।

कलेक्टर के कुशल मार्गदर्शन और सिविल सर्जन की मुस्तैदी से योजना को मिला मूर्त रूप

इस कल्याणकारी परियोजना को धरातल पर उतारने में जिले के प्रशासनिक मुखिया और संवेदनशील अधिकारी कलेक्टर डॉ. केदार सिंह का मार्गदर्शन बेहद निर्णायक रहा है। उनके कुशल दिशा-निर्देशों और जिला अस्पताल की सजग सिविल सर्जन डॉ. शिल्पी सराफ की बेहतरीन मॉनिटरिंग के चलते ही यह प्रोजेक्ट आज अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच सका है। सिविल सर्जन डॉ. शिल्पी सराफ ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन और जिला प्रशासन ने मिलकर इस योजना को आकार दिया है, जिसमें जिला अस्पताल द्वारा जगह, बिजली और पानी जैसी अत्यंत आवश्यक मूलभूत सुविधाएं प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराई गई हैं। वहीं, आजीविका मिशन ने इस पूरे कैफे को सुसज्जित और तैयार करने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी। प्रशासन की इस अनूठी पहल की चौतरफा सराहना हो रही है, क्योंकि यह प्रयास न केवल अस्पताल आने वाले मजबूर और परेशान मरीजों के परिजनों को न्यूनतम दरों पर स्वच्छ और पौष्टिक खान-पान सुनिश्चित कराएगा, बल्कि सरकारी व्यवस्था में संवेदनशीलता की एक नई मिसाल भी पेश करेगा।

स्वावलंबन की ओर बढ़ते कदम,'जमुआ स्व-सहायता समूह' की दीदियां संभालेंगी कमान 

प्रशासन की इस पूरी योजना का सबसे खूबसूरत और मजबूत पहलू महिला सशक्तिकरण और स्वावलंबन से जुड़ा है। इस 'आजीविका दीदी कैफे' के संचालन की पूरी जिम्मेदारी 'जमुआ स्व-सहायता समूह' की अंजू यादव और उनकी पूरी टीम को सौंपी गई है। रविवार को कैफे एरिया में पूरी तरह व्यवस्थित ढंग से सामग्री, बर्तन और राशन पहुँचा दिया गया है। पानी, बिजली से लेकर हर बारीक व्यवस्था को पूरी बारीकी से मुकम्मल कर लिया गया है। ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाने वाली ये दीदियां अब अस्पताल परिसर में आने वाले हर शख्स को 'घर जैसा' शुद्ध और साफ-सुथरा स्वाद परोसने के लिए पूरी तरह से तैयार और उत्साहित हैं। आने वाले दिनों में यह कैफे सेवा और सत्कार का एक बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। कुल मिलाकर, जिला प्रशासन का यह कदम एक तीर से दो निशाने साधने जैसा है। एक तरफ मरीजों के तीमारदारों को भटकना नहीं पड़ेगा, तो दूसरी तरफ स्थानीय महिलाओं को रोजगार देकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का यह प्रयास वाकई मील का पत्थर साबित होगा।

Previous Post Next Post