बड़ा सवाल,11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन से कैसे सटकर झूल रहे हैं निजी कंपनियों के केबल? अवैध जाल और प्रशासनिक अंधापन कब तक ढाएगा कहर?
Junaid Khan - शहडोल। शहर का घरौला मोहल्ला, वार्ड क्रमांक 22 (गुरुद्वारा के पास) बीती रात लगभग 11:30 बजे एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही का कुरुक्षेत्र बन गया। प्रत्यक्षदर्शियों के रोंगटे खड़े कर देने वाले बयानों के अनुसार, जियो फाइबर का एक तार 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन विद्युत लाइन के सीधे संपर्क में आ गया था। यह जानलेवा तार किसी मकड़जाल की तरह दीवार से सटा हुआ सीधे जमीन पर गिरा पड़ा था, जिसमें मौत का करंट पूरी रफ्तार से दौड़ रहा था। इसी दौरान वहां पहुंचे दो निर्दोष नंदी बैल इस करंट की चपेट में आ गए। देखते ही देखते दोनों बेजुबानों ने मौके पर ही तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। यह हृदयविदारक दृश्य जिसने भी देखा, उसका कलेजा कांप उठा। आधी रात को हुए इस हादसे के बाद से पूरे क्षेत्र के नागरिकों में भारी आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय जनता सड़कों पर उतर आई है और उसने संबंधित विभागों की आपराधिक लापरवाही पर तीखे सवाल दागना शुरू कर दिए हैं।
निजी कंपनियों की 'अवैध मनमानी' और बिजली विभाग का 'मौन संरक्षण'
इस दर्दनाक हादसे ने शहर में चल रहे टेलीकॉम कंपनियों के अवैध और असुरक्षित केबल नेटवर्क की पोल खोल कर रख दी है। स्थानीय नागरिकों का साफ कहना है कि यदि जियो फाइबर के तार और विद्युत लाइन का समय रहते रखरखाव, उचित दूरी और नियमित निरीक्षण किया गया होता, तो यह भयानक हादसा कभी नहीं होता। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या बिजली विभाग के इंजीनियर और निजी कंपनियों के नुमाइंदे किसी बड़े मानव हादसे का इंतजार कर रहे थे? नियमों को ताक पर रखकर, बिना सुरक्षा मानकों के, हाईटेंशन लाइनों के समानांतर और उनसे सटाकर फाइबर केबल दौड़ाने का यह अवैध धंधा पूरे शहर को मौत के मुहाने पर खड़ा कर चुका है। बिजली विभाग इस पूरे अवैध खेल को देखकर भी आंखें मूंदे बैठा है, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और घोर लापरवाही का सबूत है।
जिम्मेदारी किसकी? कब तय होगी जवाबदेही या फिर फाइलों में दफन होगा मामला?
अब सबसे बड़ा और यक्ष प्रश्न यह खड़ा होता है कि इस खूनी लापरवाही की अंतिम जिम्मेदारी किसकी है? क्या करोड़ों का मुनाफा कमाने वाली दूरसंचार कंपनी, कागजों पर मेंटेनेंस का दावा करने वाली विद्युत वितरण कंपनी अथवा इसके रखरखाव के लिए जिम्मेदार एजेंसियां इस दुर्घटना के लिए उत्तरदायी नहीं हैं? इन बेजुबान पशुओं की क्रूर मौत की एफआईआर (FIR) किस पर दर्ज होगी? क्षेत्रवासी अब प्रशासन से आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। स्थानीय जनता ने प्रशासन को खुली चुनौती देते हुए निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि सिर्फ जांच का दिलासा नहीं, बल्कि दोषियों के विरुद्ध ऐसी कड़ी दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए जो नजीर बने, ताकि भविष्य में किसी इंसान या पशु को अपनी जान न गंवानी पड़े।
अखबार की तीखी टिप्पणी: 'सिस्टम' की रीढ़ पर कड़ा प्रहार
प्रशासन और संबंधित विभागों को अब अपनी कुंभकर्णी नींद से जागना ही होगा। यह महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि 'सिस्टम' द्वारा किया गया संस्थागत अपराध है। जब तक टेलीकॉम कंपनियों की इस अवैध मनमानी और बिजली कंपनी के लापरवाह रवैये पर कड़ा कानूनी हंटर नहीं चलेगा, तब तक शहर की सड़कें ऐसे ही असुरक्षित रहेंगी। प्रशासन को तुरंत इस घटना की जिम्मेदारी तय कर दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे भेजना चाहिए, ताकि इन बेजुबानों की आत्मा को न्याय मिल सके और जनता का कानून पर भरोसा कायम रहे।
