GM के लिखित 'आश्वासन' की धज्जियां उड़ा प्रबंधन ने फिर दागा ट्रांसफर का वार

रामपुर बटुरा के डम्पर ऑपरेटरों को जबरन भेजा जा रहा गेवरा, पांचों बड़े श्रम संघों में भारी उबाल


Junaid Khan - शहडोल। सोहागपुर SECL सोहागपुर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रामपुर बटुरा OCM एवं अमलाई OCM में औद्योगिक शांति को भंग करते हुए प्रबंधन ने एक बार फिर अपनी तानाशाही का खुला प्रदर्शन किया है। अप्रैल 2026 में जिन 16 डम्पर ऑपरेटरों का नियम-कायदों को ताक पर रखकर सुदूर गेवरा एरिया स्थानांतरण किया गया था, उनके हक में उठे पांचों प्रमुख श्रम संघों इंटक (INTUC), बीएमएस (BMS), एचएमएस (HMS), एआईटीयूसी (AITUC) और सीटू (CITU) के संयुक्त और उग्र आंदोलन के आगे तत्कालीन महाप्रबंधक बी.के. जेना को झुकना पड़ा था। 9 मार्च से महाप्रबंधक कार्यालय के मुख्य द्वार पर शुरू हुए आमरण अनशन और धरने को शांत करने के लिए GM साहब ने खुद श्रमिक नेताओं को यह सार्वजनिक आश्वासन दिया था कि "इन स्थानीय ऑपरेटरों को किसी भी हाल में गेवरा नहीं भेजा जाएगा, बल्कि सोहागपुर क्षेत्र में ही एक नया पैच खोलकर इन सभी का यहीं सम्मानजनक समायोजन किया जाएगा।" प्रबंधन के इसी गंभीर वादे और प्रशासनिक साख पर भरोसा करके श्रमिक संगठनों ने व्यापक जनहित में अपना क्रमिक अनशन स्थगित किया था। लेकिन अब उसी शीर्ष कुर्सी से हुए समझौते को ठेंगा दिखाते हुए प्रबंधन ने अपने वादे की क्रूर अवहेलना की है और 16 में से 6 ऑपरेटरों को गेवरा भेजने का तुगलकी फरमान दोबारा जारी कर दिया है, जिससे पूरे कोयला अंचल में आक्रोश की आग भड़क उठी है। बाकी बचे ऑपरेटरों को भी आगामी 30 जून को जबरन कार्यमुक्त (रिलीज) करने की तैयारी है, जो सीधे तौर पर औद्योगिक संधियों का खुला उल्लंघन है। सदस्यता सत्यापन चुनाव से पहले 'सीटू' अध्यक्ष पर वार, साज़िश बेनकाब। इस दमनकारी नीति के पीछे की क्रोनोलॉजी और प्रशासनिक टाइमिंग को देखें तो यह सामान्य स्थानांतरण नहीं, बल्कि आगामी माह में होने वाले कोल इंडिया के ऐतिहासिक श्रमिक संघ सदस्यता सत्यापन (मेम्बरशिप वेरिफिकेशन) चुनाव को प्रभावित करने और ट्रेड यूनियनों की आवाज दबाने की एक गहरी प्रशासनिक साजिश नजर आती है। श्रमिक नेताओं ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि रामपुर बटुरा OCM में सीटू (CITU) यूनियन के अध्यक्ष पद पर कार्यरत अतुल दास की बढ़ती लोकप्रियता और पैठ से घबराकर ही उन्हें इस सूची में शामिल किया गया है, ताकि चुनाव से ठीक पहले यूनियन को पूरी तरह नेतृत्वविहीन और कमजोर किया जा सके। सीटू के स्थानीय सचिव कमलेश साकेत ने इस कृत्य की घोर निंदा करते हुए सीधे प्रशासनिक व्यवस्था को चुनौती दी है कि कोल इंडिया के स्थापित सेवा नियमों के अनुसार किसी भी पंजीकृत यूनियन के निर्वाचित अध्यक्ष या सचिव का स्थानांतरण बिना एरिया अध्यक्ष एवं सचिव के पूर्व अनुमोदन और आपसी सहमति के नहीं किया जा सकता। इस विधिक प्रावधान को कुचलकर किया गया यह ट्रांसफर सीधे तौर पर श्रम कानूनों का मखौल है। ऑन रिक्वेस्ट" घर आए थे, फिर उजाड़े जा रहे परिवार। यह प्रशासनिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है कि ये सभी 6 डम्पर ऑपरेटर अपनी अत्यंत गंभीर पारिवारिक मजबूरियों, बीमार व वृद्ध माता-पिता की देखरेख और बच्चों की उच्च शिक्षा की खातिर पूर्व में गेवरा, कुसमुंडा और दीपका जैसे सुदूर क्षेत्रों से 'ऑन रिक्वेस्ट' (स्वैच्छिक अनुरोध) पर भारी नुकसान उठाकर अपने गृह क्षेत्र रामपुर बटुरा और अमलाई ओसीएम आए थे। कोल इंडिया लिमिटेड जैसी महारत्न कंपनी जब अपनी एक-एक साल की दीर्घकालिक मैनपावर प्लानिंग बनाकर काम करती है, तो फिर महज कुछ महीनों के भीतर ऐसी कौन सी आपातकालीन स्थिति आ गई कि इन श्रमिकों के स्थापित परिवारों को दोबारा उजाड़ने पर आमादा है? बार-बार के इस प्रशासनिक उत्पीड़न से इन कामगारों के घरेलू जीवन में मानसिक अवसाद और बिखराव की स्थिति पैदा हो गई है।

तत्काल प्रभाव से ट्रांसफर आदेश प्राप्त 6 डम्पर ऑपरेटरों का विवरण। आसित मिश्रा डम्पर ऑपरेटर (रामपुर बटुरा OCM)

अतुल दास डम्पर ऑपरेटर [अध्यक्ष, सीटू यूनियन] (रामपुर बटुरा OCM) कमलेश साहू – डम्पर ऑपरेटर (रामपुर बटुरा OCM) भूपेंद्र सिंह डम्पर ऑपरेटर (रामपुर बटुरा OCM)

मोहम्मद साहिद – डम्पर ऑपरेटर (रामपुर बटुरा OCM)

संतोष कचेर – डम्पर ऑपरेटर (रामपुर बटुरा OCM)

श्रम संघों की साख दांव पर; 'शह-मात' के इस खेल में अगला कदम क्या? वर्तमान में पूरे कोयला क्षेत्र के आम श्रमिकों और आपरेटर एसोसिएशन की निगाहें संयुक्त रूप से इन पांचों श्रम संघों की अगली रणनीति और उनकी रीढ़ की हड्डी पर टिकी हुई हैं। गलियारों में चर्चा है कि यदि महाप्रबंधक (GM) द्वारा स्वयं दिए गए आधिकारिक और नैतिक आश्वासन का सम्मान करते हुए इन डम्पर ऑपरेटरों का अवैध स्थानांतरण आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त नहीं किया जाता, तो सोहागपुर क्षेत्र एक बार फिर बड़े औद्योगिक टकराव का गवाह बनेगा। श्रमिक संगठनों ने दोटूक चेतावनी दी है कि वे अपने साथियों के मान-सम्मान और रोजगार की रक्षा के लिए पूर्व की भांति ही उग्र धरना-प्रदर्शन, क्रमिक अनशन और जरूरत पड़ने पर खदान बंद जैसे आत्मघाती कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। प्रबंधन को यह साफ समझ लेना चाहिए कि वादे से मुकर कर वे कोयला उत्पादन की गति को संकट में डाल रहे हैं, जिसकी पूरी जवाबदेही सोहागपुर क्षेत्र के शीर्ष प्रबंधन की होगी। अब देखना यह है कि 'शह और मात' की इस जंग में आगे-आगे होता है क्या!

इस खबर की विशेषताएं (जो इसे और दमदार बनाती हैं) औद्योगिक नियम का समावेश: कोल इंडिया के उस नियम को प्रमुखता से उकेरा गया है जिसके तहत बिना एरिया कमेटी के अनुमोदन के अध्यक्ष/सचिव का ट्रांसफर नहीं हो सकता। यह सीधे प्रबंधन को बैकफुट पर धकेलेगा। क्रोनोलॉजी और टाइमिंग: अगले महीने होने वाले 'सदस्यता सत्यापन चुनाव' को जोड़कर इसे प्रशासनिक साज़िश के रूप में स्थापित किया गया है, जिससे खबर राष्ट्रीय कोयला यूनियनों के ध्यान में आएगी।

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