जमीन नाप के बहाने साजिश रचकर जानलेवा हमला,थाने के चक्कर काटकर थक चुके पीड़ित ने व्हील चेयर पर एसपी दफ्तर पहुंचकर खोली व्यवस्था की पोल
Junaid Khan - शहडोल। जैतपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाते हुए दबंगई और पुलिस की शर्मनाक कार्यशैली का एक ऐसा खौफनाक मामला सामने आया है, जिसने खाकी के इकबाल पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। मामला जमीन की नाप-जोख से जुड़ा है, जहां साजिश के तहत पीड़ित परिवार को मौके पर बुलाकर प्राणघातक हमला किया गया और जब लहूलुहान अवस्था में पीड़ित न्याय की गुहार लगाने थाने पहुंचा, तो जैतपुर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करने के बजाय टालमटोल कर पीड़ितों को ठेंगा दिखा दिया। अंततः न्याय की आस खो चुके बदहवास परिजनों को अपने गंभीर रूप से घायल पिता सत्येन्द्र सिंह बरगाही को व्हील चेयर पर बैठाकर जिला मुख्यालय स्थित एसपी कार्यालय की चौखट पर शरण लेनी पड़ी। षड्यंत्र रचकर लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से किया जानलेवा हमला। शिकायतकर्ता और पीड़ित परिवार के अनुसार, पूरी घटना एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा थी। गत 24 जुलाई को गांव के कोटवार ने पीड़ित परिवार को सूचना दी थी कि 25 जुलाई को उनकी जमीन की शासकीय नाप होनी है और उन्हें खेत पर उपस्थित रहना है। सीधे-सादे पीड़ित सत्येन्द्र सिंह बरगाही जब 25 जुलाई को खेत पहुंचे, तो वहां पहले से ही घात लगाए बैठे गांव के पंचायत सचिव, उसकी पत्नी, पुत्र तथा अन्य लोगों ने अचानक हमला बोल दिया। आरोप है कि दबंगों ने लाठी-डंडों और जानलेवा धारदार हथियारों से सत्येन्द्र सिंह पर बर्बरतापूर्वक वार करना शुरू कर दिया। बीच-बचाव करने पहुंचे परिजनों को भी दबंगों ने नहीं बख्शा और उनकी भी जमकर पिटाई कर दी। इस खूनी खेल में सत्येन्द्र सिंह गंभीर रूप से घायल होकर वहीं ढह गए, लेकिन हमलावरों का दिल नहीं पसीजा। अस्पताल भेजने का बहाना बनाकर टालती रही पुलिस, अब एसपी के पाले में गेंद। घटना की सूचना तत्काल स्थानीय जैतपुर पुलिस को दी गई, लेकिन पुलिस ने संवेदनहीनता की हदें पार करते हुए न तो तत्काल एफआईआर दर्ज की और न ही आरोपियों को पकड़ने की जहमत उठाई। उल्टे पीड़ित पक्ष को अस्पताल भेजकर 'बाद में रिपोर्ट लिखने' का घिसा-पिटा झुनझुना थमा दिया गया। सवाल यह उठता है कि क्या जैतपुर पुलिस दबंग पंचायत सचिव और रसूखदारों के दबाव में काम कर रही थी? जब लहूलुहान पीड़ित न्याय पाने के लिए भटकता रहा, तब जिम्मेदार अधिकारी किस गहरी नींद में सो रहे थे? अब जबकि मामला एसपी दफ्तर तक पहुंच चुका है, पीड़ित परिवार ने निष्पक्ष जांच और दबंग आरोपियों के खिलाफ संगीन धाराओं में सख्त कार्रवाई की मांग की है। जिम्मेदारों को सीधी चुनौती: कब जागेगा प्रशासन, या किसी अनहोनी का है इंतजार? यह मामला सिर्फ एक जमीनी विवाद या मारपीट का नहीं, बल्कि पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली और कर्तव्यहीनता का खुला प्रमाण है। यदि समय रहते ऐसे बेखौफ दबंगों और लापरवाह पुलिसकर्मियों पर शिकंजा नहीं कसा गया, तो आम जनता का कानून से भरोसा उठना तय है। अब देखना यह है कि पुलिस कप्तान इस पूरे मामले में जैतपुर थाना पुलिस की भूमिका की जांच कराकर दोषी अधिकारियों और दबंगों पर कार्रवाई की गाज गिराते हैं, या फिर यह फाइल भी प्रशासनिक सुस्ती की भेंट चढ़ जाएगी?
