विश्वविद्यालय प्रशासन की शर्मनाक अनदेखी,टूटकर लटक रहा मुख्य पहचान बोर्ड,क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे जिम्मेदार?

विश्वविद्यालय प्रशासन की शर्मनाक अनदेखी,टूटकर लटक रहा मुख्य पहचान बोर्ड,क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे जिम्मेदार? 


Junaid Khan - शहडोल। उच्च शिक्षा के केंद्र और जिले के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय परिसर की गरिमा इन दिनों प्रशासनिक नाकामी और घोर लापरवाही के आगोश में सिसक रही है। विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश मार्ग पर लगा पहचान बोर्ड पिछले कई महीनों से जर्जर अवस्था में टूटकर लटका हुआ है। जिस बोर्ड पर संस्था का नाम अंकित था, उसका मुख्य हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर गिर चुका है और शेष बचा ढांचा अब आने-जाने वाले छात्रों व आम लोगों के सिर पर काल बनकर मंडरा रहा है। सबसे बड़ा और शर्मनाक सवाल यह है कि यह जर्जर ढांचा शहर के कोतवाली थाने के ठीक सामने स्थित मुख्य मार्ग पर है, जहां से प्रतिदिन विश्वविद्यालय के कुलपति, कुलसचिव सहित तमाम आला अधिकारी, कर्मचारी और हजारों छात्र-छात्राएं गुजरते हैं। इसके बावजूद जिम्मेदारों की नजर इस ओर न पड़ना या देखकर भी अनजान बने रहना, अधिकारियों की गैर-जिम्मेदाराना कार्यशैली और गंभीर उदासीनता पर कड़ा प्रहार करता है। मुख्य प्रवेश द्वार किसी भी प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान की पहचान, साख और गरिमा का प्रतीक होता है, लेकिन यहां प्रबंधन की कुंभकर्णी नींद ने विश्वविद्यालय की साख को धूलधूसरित कर दिया है। जर्जर बोर्ड का भारी-भरकम हिस्सा यदि किसी छात्र या राहगीर पर गिरता है, तो एक बड़ी जनहानि तय है। क्या विश्वविद्यालय प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारी किसी जानलेवा हादसे का इंतजार कर रहे हैं? रोज गाड़ियों के हूटर बजाते हुए इस मार्ग से निकलने वाले जिम्मेदार अधिकारियों को आखिर यह बदहाली क्यों नजर नहीं आ रही? यह सिर्फ एक बोर्ड का टूटना नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन की कर्तव्यहीनता का सीधा प्रमाण है। यदि इस गंभीर खतरे को तत्काल हटाकर नया व सुरक्षित बोर्ड नहीं लगाया गया, तो किसी भी अप्रिय घटना की पूरी जवाबदेही और नैतिक जिम्मेदारी विश्वविद्यालय के कुलपति व संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की होगी।

Previous Post Next Post