मानवता की मिसाल,पार्षद सिल्लू रजक एवं नंदी गौ सेवा धाम के सदस्यों ने कराया अज्ञात शव का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार
Junaid Khan - शहडोल। जब अपने भी साथ छोड़ दें,तब किसी अज्ञात और बेसहारा व्यक्ति को सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई देना सच्ची मानवता का सबसे बड़ा धर्म माना जाता है। इसी मानवीय संवेदना का परिचय देते हुए पार्षद सिल्लू रजक एवं नंदी गौ सेवा धाम के सदस्यों ने एक अज्ञात व्यक्ति के शव का पूरे विधि-विधान और धार्मिक रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार कर समाज के सामने सेवा और करुणा का प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया.जानकारी के अनुसार, एक अज्ञात व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार अवस्था में मिला था। स्थानीय लोगों की मदद से उसे जिला अस्पताल शहडोल में भर्ती कराया गया। स्वास्थ्य में सुधार न होने पर चिकित्सकों ने उसे मेडिकल कॉलेज शहडोल रेफर किया, जहाँ कई दिनों तक उपचार के बावजूद उसकी मृत्यु हो गई। मृत्यु के बाद पुलिस प्रशासन ने मृतक की पहचान एवं उसके परिजनों का पता लगाने के लिए हरसंभव प्रयास किए, लेकिन कोई भी व्यक्ति उसकी पहचान करने या उसे अपना बताने नहीं पहुँचा। निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुलिस प्रशासन ने समाजसेवी रंजीत बाशा से संपर्क कर अंतिम संस्कार कराने में सहयोग का आग्रह किया। सूचना मिलते ही पार्षद सिल्लू रजक एवं नंदी गौ सेवा धाम के सदस्य बिना किसी विलंब के आगे आए। नगर पालिका के सहयोग से जेसीबी की व्यवस्था कर शव को रेडियो स्टेशन के सामने स्थित शांति धाम ले जाया गया, जहाँ पूरे सम्मान, श्रद्धा और धार्मिक परंपराओं के अनुसार अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए मौन रखकर ईश्वर से प्रार्थना भी की। इस सेवा कार्य ने यह संदेश दिया कि मानवता की कोई जाति, धर्म, पहचान या परिचय नहीं होता। किसी अज्ञात व्यक्ति को भी सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई देना हमारे सामाजिक और नैतिक दायित्व का हिस्सा है। अंतिम संस्कार केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि उस व्यक्ति के प्रति सम्मान और मानवीय संवेदना की सर्वोच्च अभिव्यक्ति है। स्थानीय नागरिकों ने पार्षद सिल्लू रजक, नंदी गौ सेवा धाम के सदस्यों, वरिष्ठ समाजसेवी रंजीत बशाक तथा सहयोगी टीम के इस सराहनीय कार्य की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। लोगों ने कहा कि ऐसे निस्वार्थ सेवा कार्य समाज में यह विश्वास जगाते हैं कि इंसानियत आज भी जीवित है। जब कोई अपना नहीं होता, तब मानवता ही सबसे बड़ा सहारा बनकर सामने आती है। ऐसे कार्य न केवल दिवंगत आत्मा के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं, बल्कि समाज को सेवा, करुणा और परोपकार की राह पर चलने की प्रेरणा भी देते हैं।यदि यह स्थानीय समाचार पत्र के प्रथम पृष्ठ या सोशल मीडिया पर प्रकाशित होना है, तो यह संस्करण अधिक प्रभावशाली और भावनात्मक रहेगा।
