अधिकारी और चहेते सुपरवाइजरों की जुगलबंदी, सरकारी खजाने को लग रहा लाखों का चूना
अधिकारियों की सरपरस्ती में नियमों की धज्जियां उड़ा रहे 'चौहान और राकेश', गेटपास किसी का, भुगतान किसी और के खाते में; RTI से खुलेगा पूरा कच्चा चिट्ठा
Junaid Khan - शहडोल। अनूपपुर चचाई मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के अमरकंटक थर्मल पावर प्लांट (चचाई) में इन दिनों मेंटेनेंस और ओवरहॉलिंग के नाम पर सरकारी धन के बेजा इस्तेमाल का एक बड़ा खेल सामने आ रहा है। आंतरिक सूत्रों से मिली बेहद चौंकाने वाली जानकारियों के मुताबिक, प्लांट के भीतर चल रहे शटडाउन कार्यों में नियमों को ताक पर रखकर निजी ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाया जा रहा है। गंभीर आरोप है कि इस पूरे खेल में मण्डल (विद्युत मंडल) के ही एक रसूखदार कार्यपालन अभियंता (EE) परदे के पीछे से साझीदार की भूमिका निभा रहे हैं। चचाई पावर प्लांट में हर साल होने वाली ओवरहॉलिंग और मेंटेनेंस के नाम पर बजट को ठिकाने लगाने का यह संगठित ढर्रा अब प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए एक खुली चुनौती बनता जा रहा है।
बिना काम किए खातों में आ रहा पैसा, 'रनिंग' के लड़कों से बेगारी
पूरे मामले में सबसे संगीन गड़बड़ी मैनपावर के इस्तेमाल और वित्तीय भुगतान को लेकर सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि अभिषेक एंटरप्राइजेज (कैंप पाली) के सुपरवाइजर राकेश और अब शुक्ला एसोसिएट्स के खास कारिंदे चौहान और राकेश मिलकर मिल (Mill) और बैंड कोल पाइप के कार्यों में सीधे तौर पर मण्डल के फंड का दुरुपयोग कर रहे हैं। नियमों के मुताबिक जो कार्य अनुबंधित कांट्रेक्टर के विशेष लेबरों को करना चाहिए, वह कार्य प्लांट में पहले से मौजूद 'रनिंग' के स्थानीय लड़कों से करवा लिया जाता है। हद तो तब हो जाती है जब डक्ट एक्सपेंशन और कोल पाइप मिल के इन तकनीकी कार्यों का भुगतान करने की बारी आती है। सूत्रों का दावा है कि गेटपास किसी और कर्मचारी के नाम पर जारी होता है, काम कोई दूसरा करता है और राशि किसी तीसरे के खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है। यहाँ तक कि एक ही खाते में दो-दो बार भुगतान ट्रांसफर करने की गंभीर वित्तीय अनियमितताएं भी चर्चा में हैं। हाल ही में वायलेट्री फोनिक के कार्ड संबंधी कार्यों में भी रनिंग लड़कों से काम कराकर भुगतान का रास्ता बदलने की बात सामने आई है।
RTI से होगा 'दूध का दूध, पानी का पानी', मण्डल में मची खलबली
इस पूरे मामले में जब हकीकत जानने के लिए मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी, चचाई के अतिरिक्त मुख्य अभियंता विजय कुमार देव से संपर्क किया गया, तो उन्होंने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए सीधे तौर पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, "मैं मीडिया से इस विषय पर बात नहीं कर सकता, मैं मीडिया आचरण संहिता (कंडक्ट रूल) से बंधा हुआ हूँ। आधिकारिक तौर पर बात करना नियमों का उल्लंघन माना जाता है।" शीर्ष अधिकारी की इस चुप्पी और 'मीडिया कंडक्ट' के हवाले ने इन चर्चाओं को और बल दे दिया है। बहरहाल, इस पूरे कथित सिंडिकेट और भ्रष्टाचार के खेल को बेनकाब करने के लिए अब सूचना के अधिकार (RTI) का सहारा लिया जा रहा है। दस्तावेजी सबूतों के साथ अगले अंक में इस महाघोटाले के हर एक किरदार की भूमिका को सार्वजनिक किया जाएगा, जिसके बाद प्रबंधन और जिम्मेदार ठेकेदारों के लिए जवाब देना मुश्किल हो जाएगा।
