शहर का हृदय स्थल 'गांधी चौक' बना हादसों का केंद्र,आवारा मवेशी बड़ी मुसीबत, परदे के पीछे सक्रिय है लोगों को प्रताड़ित करने वाला गिरोह

डॉक्टर की दोटूक- बाहर का कोई सभ्रांत नागरिक चपेट में आया तो खराब होगी शहर की छवि,सोशल मीडिया पर अनर्गल प्रलाप करने वालों को नोटिस देने की उठी मांग

बेजुबान पशुओं को सड़कों पर लावारिस छोड़ने वाले मालिकों पर भी हो सख्त कानूनी कार्रवाई; 'अटल कामधेनु संस्थान' में डॉ. मनीष सिंह की देखरेख में जिंदगी की जंग लड़ रहा घायल बछड़ा


Junaid Khan - शहडोल। शहडोल शहर का सबसे व्यस्ततम और गरिमामयी केंद्र 'गांधी चौक' इन दिनों आवारा मवेशियों और उनके आड़ में फल-फूल रहे एक संगठित गिरोह के चलते गंभीर हादसों और विवादों का अड्डा बनता जा रहा है। हाल ही में गांधी चौक के समीप एक कार के नीचे बछड़े के आने और उसके बाद उपजे विवाद ने अब तूल पकड़ लिया है। इस पूरे घटनाक्रम ने नगर पालिका प्रशासन और स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ सर्जन डॉ. मनीष सिंह ने तीखा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने साफ कहा कि गांधी चौक जैसे चौबीसों घंटे आवाजाही वाले मुख्य मार्ग पर आवारा मवेशियों का जमावड़ा होना और सड़क किनारे दुकान लगाने वालों की आड़ में कुछ संदिग्ध युवकों का डेरा जमे रहना किसी बड़ी साजिश का हिस्सा लगता है। डॉ. सिंह के अनुसार, यहाँ एक ऐसा संगठित गिरोह सक्रिय है, जिसका मकसद केवल राहगीरों और वाहन चालकों को परेशान करना तथा विवाद खड़ा कर अवैध वसूली या मानसिक प्रताड़ना देना है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस अराजकता के कारण शहडोल के बाहर से आने वाला कोई सभ्रांत नागरिक या वीआईपी इसकी चपेट में आ गया, तो पूरे संभाग और शहर की छवि देश-प्रदेश में धूमिल हो जाएगी। बुधवार को हुई घटना का प्रत्यक्षदर्शी विवरण देते हुए उन्होंने बताया कि वहां पहले से ही करीब 15 लोग घात लगाए तैयार बैठे थे; जैसे ही किसी ने बछड़े को जानबूझकर डंडा मारा, वह घबराकर कार के नीचे आ गया और बैठे-बैठे लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया। इस तरह की सुनियोजित साजिशों को बेनकाब करने और दोषियों पर तत्काल सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग अब जोर पकड़ रही है।

सोशल मीडिया के 'फर्जीयो लोगो पर कसना होगा शिकंजा, मवेशी मालिकों की जवाबदेही हो तय इस हादसे के बाद एक और चिंताजनक पहलू सामने आया है—वह है सोशल मीडिया पर बिना सोचे-समझे, बिना तथ्यों को जाने कुछ भी लिखने और बोलने वाले स्वघोषित बुद्धिजीवियों का। शहर के वरिष्ठ नागरिकों और पत्रकारिता जगत का मानना है कि जो लोग सोशल मीडिया पर इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर अनर्गल और भ्रामक बातें फैला रहे हैं, पुलिस प्रशासन को उन्हें चिन्हित कर तत्काल कानूनी नोटिस भेजना चाहिए। अधूरा सच या झूठ परोसकर शहर का माहौल बिगाड़ने वालों को कतई बख्शा नहीं जाना चाहिए। इसके साथ ही, इस पूरी समस्या की जड़ उन मवेशी मालिकों पर भी सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है, जो दूध दुहने के बाद अपने गाय और बछड़ों को सड़कों पर लावारिस मरने और हादसों का शिकार होने के लिए छोड़ देते हैं। इन बेजुबान जानवरों की वजह से आए दिन राहगीरों की जान जोखिम में पड़ रही है और शहर बदनाम हो रहा है। प्रशासन को चाहिए कि ऐसे लापरवाह पशुपालकों पर भारी जुर्माना ठोकने के साथ-साथ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत जेल भेजने का प्रावधान करे, ताकि भविष्य में कोई भी अपने पालतू पशुओं को सड़क पर छोड़ने की हिम्मत न कर सके। देवदूत बने डॉ. मनीष सिंह, अटल कामधेनु संस्थान के गौरव मिश्रा बोले- 'जब तक पैरों पर खड़ा नहीं होगा बछड़ा, जारी रहेगी सेवा' जहाँ एक तरफ समाज में ऐसी घिनौनी मानसिकता वाले लोग सक्रिय हैं, वहीं दूसरी तरफ मानवता की एक मिसाल भी देखने को मिली है। हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए बेजुबान बछड़े के लिए डॉ. मनीष सिंह स्वयं देवदूत बनकर सामने आए हैं। वर्तमान में 'अटल कामधेनु संस्थान' (अटल गौसेवा) में इस घायल बछड़े का सघन इलाज चल रहा है। इस संबंध में जब 'अटल कामधेनु संस्थान' के संचालक गौरव मिश्रा से बात की गई, तो उन्होंने बड़े गर्व से बताया कि डॉक्टर साहब (डॉ. मनीष सिंह) ने बछड़े की जान बचाने में अभूतपूर्व आर्थिक और चिकित्सकीय मदद की है। डॉक्टर साहब न केवल खुद नियमित रूप से आकर बछड़े का हाल-चाल ले रहे हैं, बल्कि हर संभव दवा और संसाधनों की व्यवस्था भी अपने स्तर पर करा रहे हैं। डॉ. मनीष सिंह ने संकल्प लिया है कि जब तक वह बेजुबान गाय का बच्चा पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो जाता, तब तक वे उसकी हर प्रकार से मदद और इलाज करते रहेंगे। गौरव मिश्रा ने भावुक होते हुए कहा कि डॉक्टर साहब के इस सेवा भाव से संस्थान को संबल मिला है और वे खुद भी ऐसे पुनीत कार्यों के लिए हमेशा अग्रिम पंक्ति में खड़े रहने को संकल्पित हैं। अब देखना यह है कि इस गंभीर मानवीय और प्रशासनिक मुद्दे पर जिला प्रशासन कब जागता है और गांधी चौक को इस अराजकता से कब मुक्ति दिलाता है।

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