कॉरपोरेट की 'बुलडोजर संस्कृति' और प्रशासन की मूक सहमति,नवलपुर में बीमार बुजुर्ग किसान की आजीविका पर रिलायंस ने चलाया क्रूरता का पहिया

अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा था अन्नदाता, पीछे से रिलायंस के कारिंदों ने बिना अनुमति खेत में जबरन गाड़ दिए पाइप,पूरे खेत को मलबे में तब्दील कर पूंजीपतियों ने की खुली डकैती 


Junaid Khan - शहडोल। विकास की चकाचौंध के पीछे छिपी कॉरपोरेट जगत की बेलगाम तानाशाही और स्थानीय जिला प्रशासन की रीढ़विहीन कार्यप्रणाली का एक बेहद खौफनाक और अमानवीय चेहरा शहडोल के ग्राम नवलपुर में सामने आया है। यहाँ एक बेहद गरीब और लाचार बुजुर्ग किसान, दादी प्रसाद प्रजापति की आजीविका पर रिलायंस कंपनी लालपुर के रसूखदार अफसरों ने क्रूरता का बुलडोजर चलाकर उनके आशियाने और वजूद को मलबे में तब्दील कर दिया। सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि जब पीड़ित बुजुर्ग किसान अपनी गंभीर बीमारी का इलाज कराने पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़ गया हुआ था, तब कंपनी के बेखौफ अफसरों ने उसकी लाचारी और अनुपस्थिति का फायदा उठाया। बिना किसी कानूनी नोटिस, भूस्वामी की अनुमति या आपसी सहमति के, कंपनी के गुमाश्तों ने भारी मशीनों के साथ किसान के निजी खेत की मेड़ तोड़कर जबरन घुसपैठ की और वहां पाइप गाड़ दिए। इस अवैध निर्माण के दौरान पूरे उपजाऊ खेत को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया गया, मानो देश का संविधान और भूमि कानून इन रसूखदारों की जेब में बंधक हो।

मानसून की दस्तक के बीच दाने-दाने को मोहताज हुआ पीड़ित,काम खत्म होने के बाद समतल करने तक की नहीं उठाई जहमत 

गंभीर बीमारी से जूझकर जब वृद्ध किसान मौत को मात देकर वापस अपने गांव लौटा, तो अपने पुरखों की जमीन और उजाड़ खेत की दुर्दशा देख उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। रिलायंस कंपनी की बर्बरता का आलम यह रहा कि उन्होंने न केवल अवैध रूप से जमीन को बुरी तरह क्षतिग्रस्त किया, बल्कि अपना काम निकल जाने के बाद उस मलबे को हटाने या खेत को समतल करने की न्यूनतम जहमत तक नहीं उठाई। वर्तमान में जब मानसून की बौछारें शुरू हो चुकी हैं और पूरे शहडोल संभाग में किसान अपनी खरीफ की बोआई में व्यस्त हैं, तब पीड़ित किसान के खेत में हल चलाना तो दूर, पैर रखना भी दूभर हो गया है। उम्रदराज और शारीरिक रूप से कमजोर होने के कारण दादी प्रसाद शारीरिक मजदूरी करने में भी असमर्थ हैं। उनके परिवार के पेट पालने का एकमात्र जरिया यही चंद बिस्वा जमीन थी, जिसे कॉरपोरेट की हवस ने उजाड़ दिया। यह सीधे तौर पर पूंजीपतियों द्वारा एक गरीब के पेट पर लात मारकर की गई खुली डकैती है, जिसने शासन के 'सबका साथ, सबका विकास' के दावों की हवा निकाल दी है।

कलेक्टर की चौखट पर न्याय की गुहार, पीड़ित परिवार ने दी सामूहिक आत्मदाह की चेतावनी,क्या पूंजीपतियों के आगे नतमस्तक रहेगा प्रशासनिक अमला?

इस खुली गुंडागर्दी और नाइंसाफी से तंग आकर अब बेबस और दाने-दाने को मोहताज बुजुर्ग किसान ने जिला कलेक्टर की चौखट पर दस्तक देकर न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित ने प्रशासन को बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि रिलायंस कंपनी द्वारा उसके खेत की तत्काल मरम्मत कराकर उसे पूर्व स्थिति में नहीं लाया गया और हुए भारी नुकसान का उचित मुआवजा नहीं दिया गया, तो उसका पूरा परिवार भूख से दम तोड़ देगा या फिर सामूहिक आत्मदाह जैसा आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला शासन-प्रशासन और रिलायंस प्रबंधन की होगी। अब देखना यह है कि कानून का दम भरने वाले जिले के आला अधिकारी इस गंभीर और संवेदनशील मामले में कॉरपोरेट दबाव को दरकिनार कर कोई त्वरित व सख्त दंडात्मक एक्शन लेते हैं, या फिर हमेशा की तरह पूंजीपतियों की इस नग्न डकैती पर अपनी मूक सहमति की मुहर लगाकर फाइलों को दबा दिया जाता है।

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