फर्ज की राह पर पिता-पुत्र की दो पीढ़ियां, मिलनसार SI राकेश बागरी के नक्शेकदम पर चले बेटे रविकेश,पहले ही प्रयास में बने सब इंस्पेक्टर, नवागत SP से सम्मानित करने की उठी मांग

फर्ज की राह पर पिता-पुत्र की दो पीढ़ियां, मिलनसार SI राकेश बागरी के नक्शेकदम पर चले बेटे रविकेश,पहले ही प्रयास में बने सब इंस्पेक्टर, नवागत SP से सम्मानित करने की उठी मांग 


Junaid Khan - शहडोल। जिले की माटी ने एक बार फिर ऐसा होनहार रत्न पैदा किया है, जिसने अपनी मेधा और कड़े अनुशासन से न सिर्फ अपने परिवार का, बल्कि पूरे शहडोल संभाग का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। महज 23 वर्ष की अल्पायु में, जहां युवा अक्सर करियर की दिशा तय करने में उलझे होते हैं, वहां रविकेश सिंह बागरी ने अपने पहले ही प्रयास में सब इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा को क्रैक कर खाकी का गौरव हासिल किया है। शहडोल कोतवाली में आयोजित एक गरिमामय व सादे समारोह में नगर निरीक्षक (TI) राघवेंद्र तिवारी ने इस युवा प्रतिभावान अधिकारी को पुष्पगुच्छ भेंट कर महकमे की ओर से सम्मानित किया। इस दौरान थाना प्रभारी ने रविकेश के उज्ज्वल और सेवाभावी भविष्य की कामना करते हुए कहा कि ऐसे युवाओं का पुलिस बल में आना विभाग के लिए एक नई ऊर्जा और गौरव का विषय है। रविकेश की यह कामयाबी इसलिए भी बेहद खास और अनुकरणीय है, क्योंकि उन्होंने अपने पिता, शहडोल कोतवाली में ही पदस्थ बेहद लोकप्रिय सब इंस्पेक्टर राकेश सिंह बागरी के पदचिन्हों पर चलने का फैसला किया है। राकेश सिंह बागरी जिले में अपनी मिलनसार कार्यशैली, बेदाग छवि, सरल स्वभाव और 'कम्युनिटी पुलिसिंग' के जरिए जनता के बीच एक अमिट विश्वास कायम करने के लिए जाने जाते हैं। पिता की इसी जनसेवा और खाकी के प्रति समर्पण को देखकर बड़े हुए रविकेश ने बचपन से ही इसे अपना आदर्श माना। कॉन्वेंट स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने पंडित शंभूनाथ शुक्ल विश्वविद्यालय (PTSNS) शहडोल से बीए और एमए की उच्च शिक्षा ग्रहण की। प्रतिभा का आलम यह रहा कि उन्होंने उच्च शिक्षा के दौरान ही बेहद कठिन मानी जाने वाली 'यूजीसी-नेट' (UGC-NET) परीक्षा भी क्वालिफाई कर ली। हालांकि, उनका अंतिम लक्ष्य संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के जरिए देश की सर्वोच्च सेवा में जाना है, जिसकी तैयारी के लिए वे देश की राजधानी दिल्ली में रहकर पसीना बहा रहे थे। इसी बीच जब मध्य प्रदेश पुलिस में सब इंस्पेक्टर की भर्ती आई, तो उन्होंने अपनी तैयारी को परखने के लिए पहली बार परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में सफलता का परचम लहरा दिया। इस ऐतिहासिक सफलता पर पूरे जिले के बुद्धिजीवियों और आम जनता का मानना है कि इस तरह के मेधावी और उच्च शिक्षित युवाओं की मेधा को पहचानना और उन्हें प्रोत्साहित करना प्रशासन का भी दायित्व बनता है। शहडोल के जागरूक नागरिकों और वरिष्ठ पत्रकारों का कहना है कि जिले के नवागत पुलिस अधीक्षक (SP) को खुद ऐसे होनहार और जमीन से जुड़े युवाओं को जिला मुख्यालय पर विशेष रूप से सम्मानित करना चाहिए, ताकि अंचल के अन्य युवाओं में भी अनुशासित अध्ययन, कड़ी मेहनत और देश सेवा के प्रति एक नया जज्बा पैदा हो सके। जब एक ही थाने में फर्ज की राह पर पिता और पुत्र की दो पीढ़ियां एक साथ खाकी का मान बढ़ाने के लिए खड़ी होंगी, तो इससे न केवल पुलिस महकमे का इकबाल बुलंद होगा, बल्कि आम जनता में सुरक्षा और न्याय का विश्वास और अधिक सुदृढ़ होगा। रविकेश की इस शानदार उपलब्धि पर पुलिस विभाग के आला अधिकारियों, शुभचिंतकों और मित्रों ने उज्ज्वल भविष्य की ढेरों बधाइयां प्रेषित की हैं।

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