खाकी की सुस्ती या शातिर चोरों के आगे बेबस पुलिस? सराफा कारोबारी से 45 लाख की सनसनीखेज चोरी के 10 दिन बाद भी सिंहपुर पुलिस के हाथ खाली

अमरहा बाजार में हुई वारदात पर FIR में केवल 4.5 लाख का जिक्र, पुलिस के 'कैमरा एंगल और लाइट गुल' वाले बहानों पर उठे गंभीर सवाल,सुरक्षा व्यवस्था तार-तार


Junaid Khan - शहडोल। जिले में कानून व्यवस्था किस कदर वेंटिलेटर पर आ चुकी है और अपराधियों के हौसले बुलंद हैं, इसकी एक बानगी सिंहपुर थाना क्षेत्र में देखने को मिली है। ग्राम अमरहा के साप्ताहिक बाजार में एक प्रतिष्ठित सराफा व्यापारी के जीवनभर की कमाई पर शातिर चोरों ने दिनदहाड़े डाका डाल दिया, लेकिन वारदात के पूरे 10 दिन बीत जाने के बाद भी स्थानीय पुलिस के हाथ पूरी तरह खाली हैं। खैरा निवासी पीड़ित सराफा व्यापारी सत्येन्द्र कुमार सोनी (38 वर्ष) के साथ हुई इस वारदात ने पुलिस गश्त और सुरक्षा के दावों की पोल खोलकर रख दी है। पीड़ित के मुताबिक, उनके थैले में सोने और चांदी के बेशकीमती आभूषणों समेत कुल 45 लाख रुपये से अधिक का माल था, जिसे चोरों ने पलक झपकते ही साफ कर दिया। हैरान करने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी डकैतीनुमा चोरी के मामले में पुलिस ने एफआईआर (FIR) में महज 4 लाख 50 हजार रुपये की चोरी का ही जिक्र किया है, जिसने पुलिसिया जांच की नीयत और उसकी संवेदनशीलता पर शुरुआत में ही एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

भरोसे का फायदा उठाकर ले उड़े जेवरात और नकदी, थाना प्रभारी के अजीब तर्कों से आक्रोशित हैं क्षेत्रीय व्यापारी

यह पूरी सनसनीखेज वारदात बीती 28 जून को रविवार के दिन अमरहा बाजार में दुर्गा मंदिर के ठीक पीछे घटित हुई थी। शाम करीब 7.40 बजे दुकान बढ़ाने के बाद पीड़ित सत्येन्द्र सोनी ने अपने सारे जेवरात और ₹21,250 की नकदी को एक सुरक्षित बैग में समेटा था। इसी बीच, आवश्यक कार्य आने पर वे पास के ही एक अन्य परिचित व्यापारी को अपना यह थैला तकाकर (भरोसे छोड़कर) बगल में गए, लेकिन जब वे चंद मिनटों बाद वापस लौटे तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। लाखों का माल समेटे वह बैग वहां से गायब हो चुका था। इस बड़ी वारदात के बाद जब क्षेत्रीय व्यापारियों ने सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए, तो थाना प्रभारी आशीष झारिया का एक बेहद गैर-जिम्मेदाराना और लचर तर्क सामने आया। थाना प्रभारी का कहना है कि जहां चोरी हुई, वहां सीसीटीवी (CCTV) कैमरा तो लगा है, लेकिन उसका 'एंगल ठीक नहीं था' और ठीक उसी समय 'लाइट भी गोल (गुल) थी', जिसके कारण फुटेज में कुछ भी स्पष्ट नहीं दिख रहा है। पुलिस के इन घिसे-पिटे बहानों ने अपराधियों को पकड़ने की उनकी तत्परता पर पानी फेर दिया है।

लापरवाही की हद,तीसरी आंख के भरोसे बैठी पुलिस कब करेगी मुस्तैद गश्त? व्यापारियों ने दी आंदोलन की चेतावनी

थाना प्रभारी के इस तर्क ने पूरे जिले के व्यापारी वर्ग को आक्रोशित कर दिया है कि आखिर जब अपराधियों को तकनीकी और भौगोलिक परिस्थितियों का पहले से अंदाजा रहता है, तो पुलिस इन संवेदनशील बाजारों में मैन्युअल गश्त और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं करती? पुलिस का यह कहना कि 'आरोपियों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है', अब महज एक कागजी औपचारिकता नजर आने लगा है। 10 दिन का लंबा समय बीत जाने के बाद भी सुराग न मिलना सिंहपुर पुलिस की नाकामी को साफ बयां करता है। स्थानीय सराफा संघ और क्षेत्रीय व्यापारियों ने अब इस खुली लापरवाही के खिलाफ लामबंद होना शुरू कर दिया है। व्यापारियों का साफ कहना है कि यदि आगामी कुछ दिनों के भीतर इस 45 लाख रुपये की महाचोरी का पर्दाफाश नहीं किया गया और पीड़ित को उसका माल वापस नहीं मिला, तो वे उग्र आंदोलन और बाजार बंद करने पर मजबूर होंगे। अब देखना यह है कि शहडोल के आला अधिकारी इस सोती हुई व्यवस्था को जगाने के लिए क्या कड़े कदम उठाते हैं।

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