हत्या के 04 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा

हत्या के 04 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा


Junaid Khan - शहडोल। माननीय विशेष न्यायालय (अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989) जिला शहडोल ने थाना जैतपुर के अपराध कं0 286/24, विशेष सत्र प्रकरण कं0 212/24 शासन बनाम जीवनलाल कुशवाहा एवं अन्य 03 में समस्त आरोपीगणों 1. जीवनलाल कुशवाहा पिता स्व० छोटेलाल कुशवाहा आयु 54 वर्ष पेशा मजदूरी, 2. राजेन्द्र कुशवाहा पिता स्व० छोटेलाल कुशवाहा आयु 48 वर्ष पेशा मजदूरी, 3. भूपेन्द्र कुशवाहा पिता जीवनलाल कुशवाहा आयु 24 वर्ष पेशा खेती, एवं 4. रमेश कुशवाहा पिता जीवनलाल कुशवाहा आयु 34 वर्ष पेशा मजदूरी, समस्त निवासी ग्राम पैरीबहरा, थाना जैतपुर जिला शहडोल, को भादवि की धारा 302 सहपठित धारा 34 में आजीवन कारावास एवं 3000-3000 हजार रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया। प्रकरण में शासन की ओर से श्री कैलाश चंद पटेल डीपीओ एससी/एसटी द्वारा पैरवी की गई। घटना का विवरण - जिला मीडिया प्रभारी शहडोल द्वारा प्रकरण के पैरवीकर्ता अधिकारी द्वारा दी गई। जानकारी अनुसार बताया कि फरियादी निर्मल कुशवाहा पिता तोषेराम कुशवाहा उम्र 23 वर्ष निवासी ग्राम पैरीबहरा थाना जैतपुर जिला शहडोल दिनांक 16/06/2024 को रात करीब 08:30 बजे अपने घर के बाहर बैठा था तभी शिवदयाल कुशवाहा के घर से सामने से लडाई झगडा और बचाओ बचाओ की आवाज आई लगा कि मेरे पिता तोषेराम की आवाज है। आवाज सुनकर वह शिवदयाल कुशवाहा के घर तरफ दौडा और देखा कि उसके पिता को गांव के रमेश कुशवाहा, भूपेन्द्र कुशवाहा डण्डा से, जीवनलाल कुशवाहा कुल्हाडी से और राजेन्द्र कुशवाहा लोहे की पाईप से, चारो लोग मिलकर मारपीट कर रहे थे। वह अपने पिता को बचाने लाग मिलकर मारपीट कर रहे थे। वह अपने पिता को बचाने के लिए राजेन्द्र कुशवाहा को पकडने लगा तो राजेन्द्र कुशवाहा धक्का मार कर गिरा दिया तब वह जोर जोर से चिल्लाया कि मेरे पिताजी को बचा लो तब उसकी आवाज सुनकर रमेश कुशवाहा, दलप्रताप कुशवाहा, बृजभूषण कुशवाहा और उसका छोटा भाई प्रकाश कुशवाहा दौडकर आए। उन चारों की मारपीट से उसके पिता के सिर, पीठ, दोनों हाथ, सीने, दाहिने पैर के घुटने के नीचे प्राणघातक चोट पहुंची थी जहां अस्पताल में उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। प्रकरण में मर्ग इंटीमेशन कायमी उपरांत उक्त चारों आरोपीगणों के विरूद्ध थाना जैतपुर में अपराध कं0 286/24 धारा 302/34 भादवि का अपराध पंजीबद्ध किया गया। सम्पूर्ण विवेचना कार्यवाही उपरांत अभियोग पत्र माननीय न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। प्रकरण की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए श्रीमान पुलिस अधिक्षक महोदय द्वारा जघन्य एवं सनसनीखेज के रूप में चिन्हित किया गया। अभियोजन की ओर से माननीय न्यायालय समक्ष कुल... साक्षियों के साक्ष्य कराने उपरांत अंतिम तर्क प्रस्तुत किए गए एवं उक्त चारों आरोपियों को उनके द्वारा किए गए नर्मम, अमानवीय, जघन्य अपराध के लिए कठोर से कठोर सजा दिए जाने हेतु अनुरोध किया गया। माननीय न्यायालय द्वारा प्रकरण की गंभीरता, आरोपीगणों द्वारा कारित जघन्य अपराध एवं अभियोजन द्वारा प्रस्तुत तर्क से सहमत होकर प्रकरण के समस्त आरोपीगणों को भादवि की धारा 302 सहपठित धारा 34 में आजीवन कारावास एवं 3000-3000 हजार रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया।

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