कागजों पर 'मवेशियों' का पेट भर कर डकारा जा रहा सरकारी बजट,सोहागपुर की लालपुर गौशाला में महाघोटाला

क्षमता 200 की, रिकॉर्ड में 300 से ज्यादा मवेशी दर्ज; 'लापता और मृत' दिखाकर राशि गबन करने का सनसनीखेज खेल, ग्रामीणों ने खोला मोर्चा 


Junaid Khan - शहडोल। प्रशासनिक नाक के नीचे सरकारी बजट की बंदरबांट और नियमों को ताक पर रखकर भ्रष्टाचार को अंजाम देने का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सोहागपुर तहसील के ग्राम लालपुर में स्थित 'मुख्यमंत्री गौ सेवा योजना' के तहत संचालित शासकीय गौशाला अब मवेशियों के संरक्षण के बजाय भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा केंद्र बन चुकी है। स्थानीय ग्रामीणों और जागरूक जनप्रतिनिधियों ने सीधे जिले के मुखिया (कलेक्टर) को शिकायती पत्र सौंपकर इस पूरे नेक्सस (गठजोड़) का पर्दाफाश किया है। आरोप है कि धरातल पर गौशाला में महज 200 मवेशी ही मौजूद हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में यह संख्या जानबूझकर 300 से अधिक दर्शाई जा रही है। इस अतिरिक्त संख्या के नाम पर आने वाली भारी-भरकम सरकारी राशि का खुलेआम गबन किया जा रहा है। घोटाले को छिपाने के लिए कागजों पर ही मवेशियों को 'मृत' या 'लापता' दिखाकर फाइलें बंद कर दी जाती हैं। यह सीधे तौर पर जिला प्रशासन की निगरानी प्रणाली को एक खुली चुनौती है कि कैसे जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदकर इस महाघोटाले को मूक सहमति दे रहे हैं।

विवादित चेहरे को दोबारा कमान सौंपने की 'गुपचुप' तैयारी,आरोपों पर गौशाला संचालक की अजीब सफाई

इस पूरे खेल में सबसे गंभीर और हैरान करने वाली बात यह है कि पंचायत स्तर के जिम्मेदार (सचिव) द्वारा स्थापित नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है। ग्रामीणों की मानें तो भ्रष्टाचार की इस मलाई को आपस में बांटने के लिए, गुपचुप तरीके से पुनः उसी विवादित व्यक्ति को गौशाला के संचालन की कमान सौंपने की बिसात बिछाई जा चुकी है, जिसके कार्यकाल पर पहले से ही उंगलियां उठ रही हैं। दूसरी ओर, जब इस महाघोटाले को लेकर वर्तमान गौशाला संचालक मोहन उपाध्याय से तीखे सवाल किए गए, तो उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने इसे विरोधियों की 'द्वेष भावना' करार देते हुए बेहद सतही सफाई दी कि आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं और कोई भी आकर सच्चाई देख सकता है। लेकिन बड़ा सवाल यह उठता है कि अगर सब कुछ साफ है, तो कागजों और जमीन की हकीकत में इतना बड़ा अंतर क्यों है? इस खुली लापरवाही और भ्रष्टाचार पर अब शहडोल का जिला प्रशासन क्या ठोस कार्रवाई करता है या फिर इस फाइल को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा, इस पर पूरे क्षेत्र की नजरें टिकी हैं।

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