रेलवे की आपराधिक लापरवाही पर झुका बिलासपुर रेल मंडल, दबाव में आए अफ़सर, शहडोल पहुँचकर शुरू की उच्चस्तरीय जाँच

मलबे में दबे मासूमों की चीखों के बाद जागे ज़िम्मेदार, सोशल मीडिया पर ख़बर वायरल होने के बाद बिलासपुर से आए वरिष्ठ अधिकारी ने संभाला मोर्चा, जन-आक्रोश के आगे अब 'लीपापोती' की गुंजाइश नहीं


Junaid Khan - शहडोल। हमारे समाचार पत्र में प्रमुखता और तीखे तेवरों के साथ प्रकाशित खोजी ख़बर ने आख़िरकार सोए हुए रेलवे प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। शहडोल रेलवे इंस्टीट्यूट परिसर में जर्जर बाउंड्रीवॉल ढहने से छह मासूम बच्चों के मलबे में दबने और तीन की हालत अत्यंत नाज़ुक होने के गंभीर मामले को जब हमारे द्वारा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया के सभी प्रमुख ग्रुप्स में पूरी प्रखरता के साथ उठाया गया, तो बिलासपुर रेल मंडल से लेकर स्थानीय प्रशासन तक में हड़कंप मच गया। इस गंभीर प्रशासनिक लापरवाही को दबाने और दबाए रखने के स्थानीय स्तर पर तमाम प्रयास किए जा रहे थे, लेकिन जनता के आक्रोश और समाचार के व्यापक प्रभाव को देखते हुए उच्च प्रबंधन को घुटने टेकने पड़े। बिलासपुर मंडल से विशेष रूप से पहुँचे वरिष्ठ कार्मिक अधिकारी ने शहडोल आकर मामले की कमान अपने हाथों में ले ली है, जिससे स्थानीय स्तर पर साक्ष्य मिटाने में जुटे महकमे में खलबली मच गई है।

जाँच की मेज़ पर अफ़सर: बंद कमरे में हुई घंटों मैराथन समीक्षा

समाचार पत्र में उठाए गए सुलगते सवालों का सीधा संज्ञान लेते हुए बिलासपुर से आए वरिष्ठ अधिकारी ने सहायक क्षेत्रीय रेल प्रबंधक (ARJM) कार्यालय के बंद कमरे में स्थानीय अमले के साथ एक आपातकालीन और लंबी समीक्षा बैठक की। सूत्रों के अनुसार, जाँच अधिकारी ने घटना के हर एक तकनीकी पहलू पर विस्तृत विवरण तलब किया है। विशेष रूप से उस जर्जर दीवार के मेंटेनेंस, सीनियर सेक्शन इंजीनियर (IOW) और उनकी पूरी टीम की कार्यप्रणाली को लेकर तीखे सवाल दागे गए हैं। जाँच अधिकारी ने अस्पताल जाकर घायल बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी भी ली और डॉक्टरों को स्पष्ट निर्देश दिए कि उपचार में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मामले को इतनी गंभीरता से लेकर तुरंत ग्राउंड पर उतरना एक बेहद सराहनीय और स्वागत योग्य कदम है, जिसके लिए वे धन्यवाद के पात्र हैं।

हादसे के बाद साक्ष्य मिटाने की थी साज़िश, जनता ने देखा सच

इस पूरी घटना में सबसे शर्मनाक पहलू स्थानीय इंजीनियरिंग विभाग की वह जल्दबाज़ी रही, जिसने मानवीय संवेदनाओं को भी ताक पर रख दिया। घटना के ठीक बाद जहाँ घायल बच्चों को अस्पताल पहुँचाने और उनके जीवन की रक्षा करने की तत्परता दिखानी थी, वहाँ स्थानीय रेल महकमे ने आनन-फानन में जेसीबी मशीनें उतारकर ख़ून से सनी मिट्टी और मलबे को हटाने का काम शुरू कर दिया था। स्थानीय नागरिकों का सीधा आरोप है कि यह तत्परता बच्चों की जान बचाने के लिए नहीं, बल्कि घटिया निर्माण कार्य और मेंटेनेंस की विफलता के तकनीकी साक्ष्यों (लोहे के सरिए, बीम और कॉलम की अनुपस्थिति) को दफ़न करने की एक सोची-समझी साज़िश थी।

लीपापोती की आशंका से आशंकित नागरिक, खड़े हो रहे कई सुलगते सवाल

हालाँकि उच्चस्तरीय अफ़सरों के आने से न्याय की उम्मीद तो जगी है, लेकिन स्थानीय जनता अब भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं है और लीपापोती की आशंका जता रही है। शहडोल के प्रबुद्ध नागरिकों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जैसे ही बिलासपुर से अधिकारियों के आगमन की भनक लगी, स्थानीय इंजीनियरिंग विभाग ने अपनी कमियों को छिपाने के लिए आनन-फानन में जर्जर गेट की सीमेंट से छपाई करवा दी और मलबे वाले स्थान पर लोहे की जाली खड़ी कर दी। सवाल यह उठता है कि जो काम हादसे से पहले बच्चों की सुरक्षा के लिए होना चाहिए था, वह हादसे के बाद केवल अपनी गर्दन बचाने के लिए क्यों किया जा रहा है? क्या यह तात्कालिक मरम्मत इस बात का जीवंत प्रमाण नहीं है कि विभाग को अपनी पुरानी ग़लतियों और कमियों का अच्छी तरह अहसास था?

प्रशासनिक सक्रियता और खोजी पत्रकारिता की बड़ी जीत

इस पूरे घटनाक्रम में जहाँ नागरिक प्रशासन की ओर से अनुविभागीय दंडाधिकारी (SDM) ने तुरंत ग्राउंड ज़ीरो पर मोर्चा संभालकर बच्चों और स्थानीय निवासियों से सीधा संवाद किया और एक कड़ा रुख़ अपनाया, वहीं दूसरी ओर हमारे समाचार पत्र की धारदार रिपोर्टिंग ने इस संवेदनशील मामले को ठंडे बस्ते में जाने से रोक दिया। यही कारण रहा कि रेलवे का वह अमला, जो अब तक परिसर में चल रही अनैतिक गतिविधियों, बिखरी शराब की बोतलों और कचरे को देखकर भी आँखें मूँदे बैठा था, आज वह खुद कटघरे में खड़ा है। बिलासपुर मंडल के अधिकारियों द्वारा इस मामले को संज्ञान में लेकर निष्पक्ष जाँच शुरू करना एक बेहतरीन शुरुआत है, लेकिन इस जाँच की असल सार्थकता और अफ़सरों को असली धन्यवाद तभी सिद्ध होगा, जब इस आपराधिक लापरवाही के मुख्य दोषियों को तत्काल निलंबित कर उन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

Previous Post Next Post