खबर का असर,घूसखोरी और अफसरशाही के अड़ियल रवैये पर लगा ताला

भवन निर्माण अनुमति की प्रक्रिया हुई पूरी तरह ऑनलाइन

अधिवक्ता कार्तिकेय समतानी की जनहित याचिका-शिकायत और 'हमारे समाचार पत्र' के प्रमुखता से उठाए गए मुद्दे पर राज्य सरकार का बड़ा फैसला 


Junaid Khan - शहडोल। भोपाल नगर निकायों में नक्शा पास कराने और भवन निर्माण की अनुमति के नाम पर वर्षों से फल-फूल रहे अवैध वसूली के गिरोह तथा जिम्मेदार अधिकारियों की बेलगाम कार्यशैली पर आखिरकार शासन की चाबुक चल ही गई। आम जनता की गाढ़ी कमाई ऐंठने और फाइलों को महीनों दबाकर रखने वाले लापरवाह अफसरों और बाबुओं की नकेल कसते हुए राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मध्य प्रदेश नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने प्रदेशभर में भवन निर्माण अनुमति की पूरी प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से शत-प्रतिशत ऑनलाइन कर दिया है। गौरतलब है कि हमारे समाचार पत्र ने विगत दिनों "नक्शा पास कराने के नाम पर नगर पालिका क्षेत्रों में फैला भ्रष्टाचार का जाल और विभागों के चक्कर काटने को मजबूर जनता" शीर्षक से इस गंभीर जनसमस्या को प्रमुखता से उजागर किया था। समाचार पत्र द्वारा बेबाकी से किए गए इस खुलासे को राज्य सरकार और नगरीय प्रशासन विभाग ने बेहद गंभीरता से संज्ञान में लिया, जिसका सीधा असर इस जनहितैषी फैसले के रूप में सामने आया है। विभागीय साठगांठ, एनओसी (NOC) का झमेला और विभिन्न टेबल पर चढ़ने वाली 'चढ़ावे' की संस्कृति को जड़ से खत्म करने के लिए मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के अधिवक्ता कुमार कार्तिकेय समतानी ने सशक्त मोर्चा खोला था। अधिवक्ता समतानी ने नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री को सीधे शिकायत पत्र भेजकर नगर पालिकाओं में व्याप्त कथित अवैध वसूली, पारदर्शिता के अभाव और बिना वजह फाइलों को अटकाने की प्रवृत्ति पर करारा प्रहार किया था। उन्होंने अपनी मांग में स्पष्ट किया था कि जब तक प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध नहीं होगी, तब तक भ्रष्ट तंत्र आम नागरिकों का शोषण करता रहेगा। अधिवक्ता कार्तिकेय समतानी द्वारा जनहित में उठाए गए इस साहसी कदम और तथ्यात्मक मांग की चौतरफा सराहना हो रही है। उनके इस प्रयास ने उन लापरवाह और भ्रष्ट अधिकारियों की कमर तोड़ दी है, जो भवन निर्माण अनुमति की फाइलों को अपनी अवैध कमाई का जरिया बनाए हुए थे। सरकार द्वारा जारी नई व्यवस्था के तहत अब आवेदकों को जल शोधन, दमकल या अन्य विभागों के चक्कर काटकर अलग-अलग एनओसी जुटाने की कोई आवश्यकता नहीं होगी। विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने का काम शासन का ऑनलाइन पोर्टल खुद करेगा। नियमों की अवहेलना करने वाले और जनता को परेशान करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र को सीमित करते हुए अब इस प्रक्रिया में समय-सीमा तय कर दी गई है। अधिवक्ता समतानी ने सरकार के इस कदम को सुशासन और पारदर्शिता की ओर बड़ा कदम बताते हुए कहा कि इससे आम आदमी को दफ्तरों के चक्कर लगाने और भ्रष्टाचार के दंश से मुक्ति मिलेगी। यह फैसला साबित करता है कि जब मीडिया निष्पक्षता से आवाज उठाता है और कानून के जानकार जनहित में खड़े होते हैं, तो व्यवस्था को झुकना ही पड़ता है।

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