यूरिया-डीएपी की कालाबाजारी पर भड़के किसान,प्रशासन मौन

निजी दुकानों तक सरकारी खाद की पहुंच पर उठे गंभीर सवाल,कृषि उपसंचालक बोले- कराएंगे जांच


Junaid Khan - शहडोल। संभागीय मुख्यालय से सटे ग्राम जमुई में खाद की कालाबाजारी को लेकर अन्नदाताओं का गुस्सा चरम पर पहुंच गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र की एक निजी बीज भंडार दुकान पर यूरिया और डीएपी खाद तय सरकारी दरों से कई गुना अधिक कीमतों पर खुलेआम बेची जा रही है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, जो यूरिया सरकारी दर पर सस्ती मिलती है, उसे 30 से 35 रुपये प्रति किलो और डीएपी को 70 से 80 रुपये प्रति किलो के मनमाने दामों पर किसानों को बेचने का खेल चल रहा है। इस पूरी धांधली ने सरकारी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। किसानों का सीधा सवाल है कि जब शासन-प्रशासन हर किसान को उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराने के दावे करता है, तो इतनी भारी मात्रा में सरकारी खाद निजी दुकानों तक आखिर किसकी शह पर पहुंच रही है?

आपूर्ति के स्रोतों व रिकॉर्ड की हो गहन जांच, भौतिक मिलान जरूरी 

किसानों का कहना है कि यदि किसी निजी दुकान में इतनी बड़ी मात्रा में सरकारी खाद का स्टॉक उपलब्ध है, तो इसकी आपूर्ति का असली स्रोत, बिल, स्टॉक रजिस्टर और बिक्री के पूरे रिकॉर्ड की बारीकी से जांच होनी चाहिए। ग्रामीणों ने मांग उठाई है कि केवल दुकान की ऊपरी जांच करने से इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश नहीं होगा। इसके लिए संबंधित बीज भंडार के लाइसेंस, गोदाम और संचालक के अन्य संभावित भंडारण स्थलों पर भी ताबड़तोड़ छापेमारी की जानी चाहिए। साथ ही यह भी उजागर होना चाहिए कि दुकान को खाद की यह खेप किस एजेंसी से, कितनी मात्रा में और किन दस्तावेजों के आधार पर आवंटित की गई थी। ग्रामीणों ने कृषि विभाग की टीम से मौके पर पहुंचकर खाद के भौतिक स्टॉक का मिलान सरकारी रिकॉर्ड से कराने की पुरजोर मांग की है।

साठगांठ का लग रहा आरोप, उपसंचालक ने दिए कार्रवाई के संकेत

ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यदि सरकारी खाद की जमाखोरी या निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर बिक्री की पुष्टि होती है, तो इस कालाबाजारी में लिप्त जिम्मेदार दुकानदारों और उनका साथ देने वाले संबंधित अधिकारियों पर सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का यक्ष प्रश्न यह है कि सरकारी खाद की आपूर्ति से लेकर किसानों के खेतों तक पहुंचने के बीच ऐसा कौन सा गुप्त खेल चल रहा है, जिससे किसान महंगी खाद खरीदने को मजबूर हैं और बिचौलिए मालामाल हो रहे हैं। इस पूरे मामले पर कृषि उपसंचालक के.एस. यादव ने कहा कि मीडिया के माध्यम से जानकारी प्राप्त हुई है। वे स्वयं जाकर संबंधित दुकान की निष्पक्ष जांच कराएंगे और यदि कालाबाजारी या अनियमितता पाई जाती है, तो दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी तथा किसानों को निर्धारित दरों पर ही खाद दिलाना सुनिश्चित किया जाएगा।

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