सांसद,विद्यायक,मंत्री और अफसरों की अनदेखी पर बरसे कांग्रेसी नेता, दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
Junaid Khan - शहडोल। देश जब 80वें स्वतंत्रता दिवस का जश्न मना रहा था, ठीक उसी वक्त,शहडोल की बदहाल सड़कों और खतरनाक गड्ढों ने प्रशासनिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों के दावों की पोल खोलकर रख दी। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कांग्रेस नेता शेख आबिद ने स्थानीय नागरिकों के साथ मिलकर शहर की जर्जर सड़कों और जानलेवा गड्ढों के खिलाफ एक बड़ा और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन दर्ज कराया। आजादी के इस पर्व पर जहां एक ओर बड़े-बड़े मंचों से विकास के ढोल पीटे जा रहे थे, वहीं दूसरी ओर शहडोल की जनता गड्डों से पटी सड़कों पर अपनी बदहाली के आंसू बहाने को मजबूर थी। शेख आबिद ने जनता के इस दर्द को सड़क पर उतरकर प्रमुखता से उठाया और निकम्मे प्रशासनिक ढर्रे पर सीधा प्रहार किया। शहर की बदहाली पर तीखा हमला बोलते हुए शेख आबिद ने कहा, "हमारे शहर की सड़कों की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है, जो नागरिकों की सुरक्षा और सुविधा के लिए सीधा खतरा बन चुकी है। हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि लापरवाह सिस्टम के कानों तक आम लोगों की बुलंद आवाज़ पहुंचे।" उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय सांसद, क्षेत्र के मंत्री और लोक निर्माण विभाग (PWD) के जिम्मेदार अधिकारी पूरी तरह मूकदर्शक बने हुए हैं। करोड़ों रुपये के बजट का आवंटन कागजों पर सिमट कर रह गया है और धरातल पर जनता को केवल धूल, कीचड़ और बड़े-बड़े गड्ढे नसीब हो रहे हैं। इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में शामिल स्थानीय लोगों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए गड्ढों की तस्वीरें लीं और सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक अपनी सख्त नाराजगी जताई। इस पूरे घटनाक्रम ने जिले के आला अधिकारियों और सरकार में बैठे नुमाइंदों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सड़कों की बदहाली से आए दिन हो रही दुर्घटनाएं, एम्बुलेंस का जाम में फंसना और राहगीरों का चोटिल होना अब आम बात बन चुका है। शेख आबिद ने सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों को सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए अपील की कि यदि शहर की सड़कों को जल्द से जल्द सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन आने वाले दिनों में एक उग्र जन-आंदोलन का रूप ले लेगा। अब देखना यह होगा कि कुंभकर्णी नींद में सोया नगर पालिका प्रशासन और लोक निर्माण विभाग इस जनाक्रोश के बाद जागता है या फिर कागजी वादों के पीछे अपनी नाकामियों को छुपाता रहता है।
