सोन-मुड़ना नदी जहर बनाने पर मानवाधिकार आयोग सख्त,कलेक्टर व PCB को 4 सप्ताह का अल्टीमेटम

उद्योगों की मनमानी और नेताओं-अफसरों की चुप्पी पर जनता का फूटा गुस्सा, 1200 बैगा आदिवासी परिवारों के अस्तित्व पर गहराया संकट


Junaid Khan - शहडोल। जिले की जीवनदायिनी मानी जाने वाली सोन और मुड़ना नदी में बेधड़क घोले जा रहे औद्योगिक प्रदूषण के गंभीर मामले ने अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के चौखट पर दस्तक दे दी है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों, स्थानीय विधायकों, सांसदों और सत्ता की मलाई चाट रहे नेताओं की चुप्पी तथा प्रशासनिक ढिलाई के बीच मानवाधिकार आयोग ने मामले में कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) के अध्यक्ष और शहडोल कलेक्टर को स्पष्ट निर्देश देते हुए 4 सप्ताह के भीतर विस्तृत कार्रवाई प्रतिवेदन (Action Taken Report - ATR) प्रस्तुत करने को कहा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि वोट मांगने आने वाले नेताओं और एयरकंडीशन कमरों में बैठने वाले अफसरों ने प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के आगे पूरी तरह घुटने टेक दिए हैं, जिसका खामियाजा अब निर्दोष जनता और आदिवासी समुदाय को अपनी जान दांव पर लगाकर भुगतना पड़ रहा है। अल्ट्राटेक सीमेंट उद्योग का कचरा नदियों में, CSR की आड़ में जनता से खिलवाड़ यह पूरा मामला शहडोल निवासी अशोक पटेल द्वारा 26 नवंबर 2025 को मानवाधिकार आयोग में दर्ज कराई गई शिकायत के बाद बेनकाब हुआ है। शिकायत में सीधे तौर पर आरोप लगाया गया है कि अल्ट्राटेक सीमेंट उद्योग से निकलने वाले जहरीले और घातक औद्योगिक अपशिष्ट को सीधे सोन और मुड़ना नदियों में बहाया जा रहा है। नदियों के इस विषैले पानी से क्षेत्र के 1200 से अधिक निर्दोष बैगा आदिवासी परिवारों का स्वास्थ्य, आजीविका और मानवीय गरिमा पूरी तरह से खतरे में पड़ गई है। स्थानीय स्तर पर कई बार प्रशासन और नेताओं से शिकायतें की गईं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने प्रदूषण संबंधी शिकायतों का कोई प्रभावी सत्यापन नहीं किया। इसके अलावा, कंपनी कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के नियमों का पालन करने में भी पूरी तरह विफल रही है। आयोग ने साफ कहा है कि आदिवासियों के स्वास्थ्य और जल स्रोतों से खिलवाड़ उनके संवैधानिक व मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। मानवाधिकार आयोग ने एचआरसीनेट पोर्टल पर मांगी रिपोर्ट, जिम्मेदार अफसरों की नाप-जोख तय शिकायतकर्ता की अर्जी पर संज्ञान लेते हुए मानवाधिकार आयोग ने मामले पर कड़ा रुख अख्तियार किया है और संबंधित अधिकारियों को अविलंब आवश्यक कार्रवाई कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश जारी किया है। आयोग ने यह भी सख्त निर्देश दिए हैं कि इस प्रकरण से संबंधित समस्त पत्राचार केवल 'एचआरसीनेट' (HRCnet) पोर्टल के माध्यम से ही किया जाएगा, ताकि कोई भी अधिकारी अपनी लापरवाही छुपा न सके। नदियों में जहर घोलने वाली कंपनियों को शह देने वाले पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड और शहडोल कलेक्टर की कार्यप्रणाली पर अब मानवाधिकार आयोग की सीधी नजर है। यदि 4 सप्ताह के भीतर आयोग को ठोस रिपोर्ट नहीं भेजी गई, तो दोषी अधिकारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। स्थानीय जनता का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते जागकर इन उद्योगपतियों पर नकेल नहीं कसी, तो आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन किया जाएगा।

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