रहमान, सोनू और अभय के ट्रैक्टरों से डंप हो रही रेत,रात होते ही हाईवा में री-लोडिंग, खनिज विभाग और स्थानीय पुलिस की मौन सहमति पर उठे सवाल
Junaid Khan - शहडोल। एक तरफ जहां जिले के नवागत कलेक्टर द्वारा पदभार संभालते ही अवैध खनन, रेत माफियाओं और नियम-विरुद्ध दौड़ते वाहनों के खिलाफ लगातार जब्ती व दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है, वहीं दूसरी ओर जैतपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत कमता बिजली दफ्तर के समीप, रसमोहनी और खैरहनी इलाकों में रात के अंधेरे में अवैध रेत उत्खनन एवं परिवहन का काला कारोबार बेधड़क जारी है। सूत्रों और स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मानसून अवधि में एनजीटी (NGT) और शासन द्वारा रेत खदानों के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध होने के बावजूद जैतपुर क्षेत्र में हर रात दर्जनों हाईवा और ट्रैक्टरों से रेत का अवैध लदान व स्टॉक किया जा रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि खदानें पूरी तरह बंद होने के बावजूद गल्हाता पंचायत के सचिव चंद्रशेखर द्वारा अलग-अलग स्थानों के नाम से फर्जी बिल-रसीदें काटी जा रही हैं। इन बिलों में न तो सीजीएसटी (CGST) का उल्लेख है और न ही एसजीएसटी (SGST) का, जिससे सरकारी नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाते हुए शासन को भारी राजस्व का चूना लगाया जा रहा है।
कमता बिजली ऑफिस के पास अवैध डंपिंग का खेल, आरक्षक पर 2000 रुपये प्रति गाड़ी वसूली के गंभीर आरोप
प्राप्त जानकारी व साक्ष्यों के मुताबिक, इस पूरे अवैध सिंडिकेट को संचालित करने के लिए कमता बिजली दफ्तर के ठीक बगल में बाकायदा रेत का अवैध स्टॉक (डंपिंग यार्ड) बनाया गया है। स्थानीय ट्रैक्टर चालक रहमान, सोनू और अभय द्वारा दिन-रात प्रतिबंधित क्षेत्रों से रेत ढोकर इस डंपिंग प्वाइंट पर जमा की जाती है, जिसके बाद रात होते ही हाईवा गाड़ियों में रेत री-लोड करके आगे भेजी जाती है। स्थानीय ग्रामीणों व मुखबिरों का आरोप है कि इस पूरे अवैध कारोबार को खाकी का सीधा संरक्षण प्राप्त है। आरोप है कि आरक्षक कृष्णा द्वारा हर हाईवा गाड़ी से 2000 रुपये की कथित वसूली की जा रही है, जबकि रेत लादने वाले ट्रैक्टर चालकों से अलग से एंट्री वसूली जा रही है। पुलिसकर्मी की कथित शह और पंचायत सचिव द्वारा बिना टैक्स की रसीदें थमाए जाने से अवैध कारोबारियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि प्रशासन के प्रतिबंधात्मक आदेशों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है।
प्रशासन और खनिज विभाग के लिए खुली चुनौती,कब जागेगा जिम्मेदार अमला?
नदियों के अस्तित्व और पर्यावरण की रक्षा के लिए बारिश के मौसम में रेत उत्खनन पर शासन द्वारा पूर्ण रोक लगाई गई है। इसके बावजूद जैतपुर, रसमोहनी और खैरहनी क्षेत्र में सरेआम कट रही अवैध रसीदों, डंपिंग यार्डों और बेधड़क दौड़ते वाहनों ने जिला खनिज अधिकारी और स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। जब नवागत कलेक्टर के सख्त रुख से जिले भर के रेत माफियाओं में हड़कंप है, तब जैतपुर-रसमोहनी बेल्ट में यह नेटवर्क किसके दम पर फल-फूल रहा है? क्या जिम्मेदार अधिकारी इस पूरी धांधली से अनजान बने हुए हैं या फिर निचले अमले की मिलीभगत से यह खेल चल रहा है? क्षेत्र की जनता अब यह देखना चाहती है कि फर्जी रसीद काटने वाले पंचायत सचिव, वसूली के आरोपी आरक्षक और अवैध खनन कराने वाले संलिप्त लोगों पर जिला प्रशासन और पुलिस कप्तान कब कड़ा संज्ञान लेते हैं।
