मोती महल के सामने ध्रुव बार में गुंडागर्दी,22 हजार की बोतल मांगने पर बेसबॉल बैट से हमला, सिर-हाथ में गंभीर चोट; पुलिस ने FIR के बजाय X-Ray का थमाया बहाना
Junaid Khan - शहडोल। मध्य प्रदेश में सुशासन और कानून-व्यवस्था के बड़े-बड़े दावों की धज्जियां उड़ाते हुए शहडोल के शराब माफियाओं ने एक बार फिर खूनी खेल खेला है। शहर के वार्ड नंबर 05, श्रीराम हॉस्पिटल के पास रहने वाले स्थानीय निवासी भूपेंद्र सिंह के साथ बीती रात मोती महल के सामने स्थित ध्रुव बार में जिस तरह की बर्बरता की गई, उसने जिले की पुलिस व्यवस्था, आबकारी विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित भूपेंद्र सिंह जब बार में सिंगल मॉल्ट,जैक डेनियल और ब्लू लेबल,खरीदने पहुंचे, तो वहां मौजूद शराब ठेके के गुर्गों ने न सिर्फ शराब देने से साफ मना किया, बल्कि ग्राहक की आर्थिक हैसियत पर अभद्र टिप्पणियां करते हुए औकात दिखाने की बात कही। 22,000 रुपये तक देने की बात पर बात इतनी बढ़ गई कि कर्मचारियों ने ग्राहक पर शराब का क्वार्टर फेंककर मार दिया। इसके महज कुछ ही देर बाद, 3 से 4 दबंगों ने घेरकर भूपेंद्र पर बेसबॉल बैट से जानलेवा हमला कर दिया। सिर पर आ रहे प्राणघातक वार को जब पीड़ित ने हाथ से रोका, तो उनके हाथ में गंभीर फ्रैक्चर की आशंका पैदा हो गई और सिर पर भी गहरे जख्म आए।
जब रक्षक ही बन जाएं मूकदर्शक, कोतवाली पुलिस की ढिलाई पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चिंताजनक और शर्मनाक पहलू शहर की कोतवाली पुलिस का रवैया रहा। खून से लथपथ पीड़ित जब न्याय की उम्मीद में रात में ही कोतवाली थाना पहुंचा, तो पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर आरोपियों पर कार्रवाई करने के बजाय केवल औपचारिकता निभाई। मेडिकल एग्जामिनेशन (MLC) के नाम पर अस्पताल ले जाया गया, जहां रविवार का बहाना बनाकर एक्स-रे टाल दिया गया। हद तो तब हो गई जब अगले दिन दोपहर 3 बजे पीड़ित दोबारा थाने पहुंचा, तो उसे साफ कह दिया गया कि अभी कोई मदद नहीं मिलेगी, एक्स-रे और एफआईआर की प्रक्रिया एक साथ ही आगे बढ़ेगी। यह स्थिति दर्शाती है कि नवागत पुलिस कप्तानों के सख्त निर्देशों और हाल ही में पुलिस द्वारा मारे गए छापों के बावजूद मैदानी स्तर पर कोतवाली पुलिस का खौफ अपराधियों में रत्ती भर भी नहीं है। बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या पुलिस किसी बड़े हादसे या पीड़ित की जान जाने का इंतजार कर रही है? जब सरेराह नागरिक का खून बह रहा है, तब जिम्मेदार अधिकारी आखिर किसकी शह पर मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश कर रहे हैं?
आबकारी विभाग की रहस्यमयी चुप्पी और कैमरे से परहेज,किसका है संरक्षण?
घटना ने आबकारी विभाग की भूमिका को भी पूरी तरह संदिग्ध बना दिया है। नियमानुसार हर शराब दुकान और बार में उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे चालू हालत में होना अनिवार्य है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रहे। लेकिन सवाल उठता है कि पुलिस और आबकारी विभाग इन दुकानों के कैमरों की जांच क्यों नहीं करते? आखिर क्यों इन शराब माफियाओं पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती? अभी हाल ही में पुलिस प्रशासन ने शराब माफियाओं पर बड़ा छापा मारा था, जिसमें मुख्य आरोपी ठेकेदार अब भी फरार चल रहा है। इसके बावजूद इन शराब विक्रेताओं और ठेकेदारों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे कानून-व्यवस्था को जेब में लेकर घूम रहे हैं। जनता अब सीधे तौर पर पूछ रही है कि जब मुख्य आरोपी फरार है, तो बाकी दुकानों पर यह गुंडागर्दी किसकी छत्रछाया में फल-फूल रही है? क्या आबकारी विभाग के आला अधिकारी केवल राजस्व वसूली तक सीमित रह गए हैं या फिर इन माफियाओं के साथ उनकी कोई मूक सहमति है?
प्रशासनिक लापरवाही से सरकार की छवि धूमिल, जनता मांग रही जवाब
शहडोल में आबकारी विभाग और स्थानीय पुलिस की इस खुली सांठगांठ व लापरवाही के कारण मध्य प्रदेश सरकार की साख पर गहरा बट्टा लग रहा है। एक तरफ राज्य सरकार प्रदेश में कानून का राज स्थापित करने और माफिया-मुक्त शासन का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ शहडोल का आम नागरिक अपने ही शहर में सुरक्षित नहीं है। यदि एक सामान्य ग्राहक अपनी पसंद की बोतल मांगने पर बेसबॉल बैट से पीटा जाता है और पुलिस एफआईआर दर्ज करने में ही टालमटोल करती है, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक तंत्र के पंगु होने का प्रमाण है। जिला प्रशासन, नवागत पुलिस नेतृत्व और आबकारी आयुक्त को इस पूरे मामले का तत्काल संज्ञान लेना होगा। पीड़ित भूपेंद्र सिंह को त्वरित न्याय दिलाने के लिए तत्काल धाराबद्ध एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए, दोषी कर्मचारियों व बार संचालक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो और कर्तव्य में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर भी गाज गिरनी चाहिए, ताकि कानून का इकबाल पुनः कायम हो सके।
