खाकी बेफिक्र,बेखौफ चोरों ने बंद मकान का ताला तोड़ उड़ाए सोने-चांदी के जेवरात व नकदी
Junaid Khan - शहडोल। जिला मुख्यालय में कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है और पुलिस की सुस्ती व लचर कार्यप्रणाली के कारण आम जनता खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है। खाकी के चौकसी और रात्रिकालीन गश्त के तमाम दावों को हवा में उड़ाते हुए बेखौफ अपराधियों ने एक बार फिर पुलिस को खुली चुनौती दे डाली है। मामला थाना कोतवाली अंतर्गत बीट क्रमांक 1 के वार्ड क्रमांक 18 विवेक नगर का है, जहां बेखौफ चोरों ने एक सूने पड़े मकान को निशाना बनाते हुए लाखों रुपये के सोने-चांदी के जेवरात और नकदी पर हाथ साफ कर दिया। घटना के समय पीड़ित परिवार अपने पुस्तैनी गांव गया हुआ था। पुलिस की इस कार्यशैली ने पूरे प्रशासनिक अमले और जिला पुलिस कप्तानी की निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार पीड़ित अरविंद मिश्रा पिता रामदयाल मिश्रा (उम्र 31 वर्ष), जो कि मूल रूप से ग्राम खारी थाना पपौंध के निवासी हैं और व्यावसायिक सिलसिले में बाहर रहते हैं, के माता-पिता गत 25 जुलाई 2026 को अपने गांव गए हुए थे। पीड़ित का मकान विवेक नगर में बंद था। इसी का फायदा उठाकर अज्ञात शातिर चोरों ने 05 अगस्त की रात से 06 अगस्त के बीच धावा बोला। पड़ोस में रहने वाली बहन सीमा द्विवेदी ने जब 06 अगस्त की सुबह घर का दरवाजा खुला देखा, तब जाकर इस सनसनीखेज वारदात का खुलासा हुआ। चोरों ने रसोई का दरवाजा तोड़ने के साथ-साथ कमरों के ताले, अलमारियों के लॉक व लॉकर तथा पेटियों के कुंदे तोड़कर अंदर रखा सारा सामान अस्त-व्यस्त कर दिया।
अपराधियों ने अलमारी और पेटियों में रखी सोने की चैन, सोने की अंगूठी, तीन जोड़ी चांदी की पायल, चांदी का सिक्का और अलग-अलग स्थानों पर रखी कुल 21,500 रुपये नकदी सहित करीब 90,000 रुपये के माल पर हाथ साफ कर दिया। घटना की लिखित सूचना के बाद कोतवाली पुलिस ने भादंवि/भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 331(4) और 305(ए) के तहत अपराध क्रमांक 0380/2026 दर्ज कर जांच का जिम्मा कार्यवाहक प्रधान आरक्षक गिरीश मिश्रा (नं. 514) को सौंपा है। लेकिन सवाल यह उठता है कि जिला मुख्यालय के बीट-1 जैसे संवेदनशील इलाके में, जहां से महज कुछ दूरी पर थाना स्थित है, वहां चोर इतनी इत्मीनान से इतनी बड़ी वारदात को अंजाम देकर कैसे निकल गए?
जिम्मेदार अधिकारियों को सीधी चुनौती,क्या केवल कागजी एफआईआर तक सीमित रहेगी पुलिस?
यह घटना केवल एक चोरी भर नहीं है, बल्कि जिला पुलिस प्रशासन, कोतवाली थाना प्रभारी राघवेंद्र तिवारी और संबंधित बीट प्रभारियों की घोर लापरवाही और निष्क्रियता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। जब जिला मुख्यालय की सघन बस्तियों में नागरिक सुरक्षित नहीं हैं, तो दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा का क्या आलम होगा? क्या जिम्मेदार अधिकारी केवल खानापूर्ति के लिए एफआईआर दर्ज करने तक सीमित रहेंगे या फिर गश्त व्यवस्था को धरातल पर दुरुस्त कर आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करेंगे? यदि समय रहते पुलिस ने अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया और बढ़ते अपराधों पर अंकुश नहीं लगाया,तो प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ जन-आक्रोश भड़कना तय है।
