अस्पताल की सुरक्षा में सेंध,internal सफाईकर्मियों ने ही उड़ाए AC के उपकरण और स्टेबलाइजर, CCTV में कैद हुई करतूत
Junaid Khan - शहडोल। जिला अस्पताल शहडोल की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक मॉनिटरिंग पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल परिसर की देखरेख और स्वच्छता का जिम्मा संभालने वाले कर्मियों ने ही संस्थान को चपत लगाना शुरू कर दिया है। ताजा मामले में अस्पताल के अतिसंवेदनशील हिस्सों डायलिसिस यूनिट और ब्लड बैंक में लगे ए.सी. के आउटडोर उपकरण और स्टेबलाइजर चोरी हो गए हैं। हैरानी की बात यह है कि इस वारदात को किसी बाहरी गिरोह ने नहीं, बल्कि अस्पताल के ही संविदा सफाईकर्मियों ने दिन-दिहाड़े अंजाम दिया। इस घटना ने अस्पताल की निजी सुरक्षा एजेंसी, स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है, क्योंकि संवेदनशील मेडिकल यूनिट्स की सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक सीधे तौर पर मरीजों की जान और जन-सुविधाओं से खिलवाड़ है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना 7 अगस्त 2026 की सुबह लगभग 11:00 बजे की है। स्काईबुल सिक्योरिटी सर्विस प्राइवेट लिमिटेड के सिक्योरिटी सुपरवाइजर अंकित पांडेय जब अगले दिन ड्यूटी पर पहुंचे, तो सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. शिल्पी सराफ द्वारा उन्हें चोरी की जानकारी दी गई। इसके बाद जब अस्पताल में लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के फुटेज खंगाले गए, तो सफाईकर्मी विक्की बसोर और बलदेव कोल दिन के उजाले में डायलिसिस यूनिट का स्टेबलाइजर और ब्लड बैंक कक्ष में लगे ए.सी. का आउटडोर पार्ट ले जाते हुए रंगे हाथों दिखाई दिए। चोरी गए उपकरणों की कुल कीमत करीब 40,000 रुपये आंकी गई है। सुपरवाइजर की लिखित शिकायत पर कोतवाली थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 305(E) और 3(5) बीएनएस (BNS) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
अस्पताल प्रबंधन की लचर मॉनिटरिंग और सुरक्षा चक्र पर उठे सवाल
यह कोई पहला मौका नहीं है जब जिला अस्पताल में इस तरह की घटना घटी हो। प्राथमिकी में दर्ज तथ्यों के मुताबिक, अस्पताल परिसर से पहले भी ए.सी. पार्ट्स की चोरी हो चुकी है। इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता न करना प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है। सवाल यह उठता है कि जिस अस्पताल में 24 घंटे सुरक्षा गार्ड तैनात रहते हैं और प्रतिदिन सैकड़ों मरीजों व तीमारदारों की आवाजाही होती है, वहां से दिन-दिहाड़े इतने भारी-भरकम इलेक्ट्रॉनिक उपकरण कैसे गायब हो जाते हैं? आउटसोर्स एजेंसियों के कर्मचारियों के चरित्र सत्यापन (Police Verification) और उनकी गतिविधियों पर अधिकारियों का कोई नियंत्रण क्यों नहीं है? सरकारी संपत्ति की सुरक्षा में इस तरह की बार-बार हो रही चूक से न केवल शासन-प्रशासन के राजस्व को चूना लग रहा है, बल्कि महत्वपूर्ण चिकित्सा सेवाएं भी बाधित हो रही हैं। अब देखना यह है कि पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी और माल बरामदगी कब तक करती है और अस्पताल प्रशासन सुरक्षा खामियों पर क्या ठोस कदम उठाता है।
